Muzaffarnagar में Census 2027 को लेकर प्रशासन ने व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं। कोरोना महामारी के कारण वर्ष 2021 में स्थगित हुई जनगणना अब नए स्वरूप और डिजिटल प्रणाली के साथ 2027 के नाम से शुरू होने जा रही है। जिला प्रशासन ने इसे आधुनिक तकनीक के साथ अधिक पारदर्शी और सहभागी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।
जिला मजिस्ट्रेट Umesh Mishra ने पत्रकारों से बातचीत में जानकारी दी कि इस बार जनगणना प्रक्रिया का पहला चरण पूरी तरह डिजिटल रखा गया है, जिससे आम नागरिक स्वयं भी अपने विवरण दर्ज कर सकेंगे।
ऑनलाइन जनगणना: 7 मई से 21 मई तक खुद भर सकेंगे विवरण
Muzaffarnagar Census 2027 के तहत पहला चरण 7 मई से 21 मई तक चलेगा। इस दौरान नागरिक ऑनलाइन पोर्टल पर लॉगिन कर अपना विवरण स्वयं भर सकते हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह प्रक्रिया सरल और उपयोगकर्ता के अनुकूल बनाई गई है, ताकि अधिक से अधिक लोग इसमें भाग ले सकें।
इस डिजिटल व्यवस्था की खास बात यह है कि यदि किसी व्यक्ति से जानकारी भरने में कोई त्रुटि रह जाती है, तो बाद में उसे सुधारने का अवसर भी मिलेगा। इससे डेटा की शुद्धता और विश्वसनीयता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
डेटा रहेगा पूरी तरह सुरक्षित और गोपनीय: प्रशासन का आश्वासन
जिला मजिस्ट्रेट ने आम जनता से अपील की है कि वे अपनी जानकारी सही और सटीक तरीके से दर्ज करें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जनगणना के दौरान एकत्र किया गया डेटा पूरी तरह गोपनीय रखा जाएगा और इसका उपयोग केवल सरकारी योजनाओं के निर्माण में किया जाएगा।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कोई भी प्रगणक नागरिकों से ओटीपी या निजी दस्तावेज की मांग नहीं करेगा। इस प्रकार की किसी भी मांग को संदिग्ध मानकर तुरंत प्रशासन को सूचित करने की सलाह दी गई है।
दूसरा चरण: 22 मई से घर-घर जाकर होगी मकानों की गणना
पहले डिजिटल चरण के बाद दूसरा चरण 22 मई से 20 जून तक चलेगा, जिसमें प्रगणक घर-घर जाकर मकानों की गणना करेंगे। इस दौरान भवन स्वामियों से आवश्यक जानकारी प्राप्त की जाएगी।
इस चरण का उद्देश्य आवासीय संरचना, सुविधाओं और परिवारों से जुड़ी आधारभूत जानकारी एकत्र करना है, जिससे विकास योजनाओं को बेहतर तरीके से तैयार किया जा सके।
6576 कर्मचारियों की तैनाती, फील्ड में 6400 से अधिक अधिकारी सक्रिय
Muzaffarnagar Census 2027 को सफल बनाने के लिए प्रशासन ने बड़े स्तर पर मानव संसाधन तैनात किए हैं। कुल 6576 कर्मचारियों को इस कार्य में लगाया गया है, जिनमें से 6443 कर्मचारी और अधिकारी फील्ड में सक्रिय रूप से काम करेंगे।
प्रत्येक प्रगणक को लगभग 180 मकानों की जिम्मेदारी सौंपी गई है, ताकि समयबद्ध तरीके से कार्य पूरा किया जा सके।
जनपद को 14 सेक्टर में बांटकर बनाई गई रणनीति
पूरे जिले को 14 प्रशासनिक क्षेत्रों में विभाजित किया गया है, जिससे कार्य को व्यवस्थित ढंग से संचालित किया जा सके। प्रत्येक क्षेत्र में अलग-अलग टीमों को जिम्मेदारी दी गई है और समन्वय के लिए विशेष निगरानी व्यवस्था भी बनाई गई है।
इससे जनगणना प्रक्रिया को सुचारू रूप से पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
34 सवालों के जरिए जुटाई जाएगी विस्तृत जानकारी
अपर जिला अधिकारी Gajendra Kumar ने बताया कि इस बार जनगणना के दौरान कुल 34 प्रश्न पूछे जाएंगे। ये प्रश्न सामाजिक, आर्थिक और पारिवारिक स्थिति से जुड़े होंगे।
इसके लिए सभी कर्मचारियों को तकनीकी और व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा चुका है, ताकि वे नागरिकों से सही जानकारी प्राप्त कर सकें और प्रक्रिया में कोई त्रुटि न हो।
हर वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित करने की योजना
जनगणना प्रक्रिया को व्यापक और समावेशी बनाने के लिए समाज के विभिन्न वर्गों को इसमें शामिल किया गया है। इसमें जनप्रतिनिधि, मीडिया कर्मी, संस्थाएं, पुलिस, अर्धसैनिक बल, वकील और न्यायिक अधिकारी जैसे सभी वर्गों के लिए अलग-अलग तिथियां निर्धारित की गई हैं।
मीडिया प्रतिनिधियों के लिए 9 मई की तारीख तय की गई है, जिससे सूचना का प्रसार भी प्रभावी ढंग से हो सके।
समस्या होने पर सीधे प्रशासन से संपर्क की अपील
प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि यदि जनगणना से संबंधित किसी भी प्रकार की समस्या आती है, तो वे सीधे जिला प्रशासन से संपर्क करें। जिला मजिस्ट्रेट और अपर जिलाधिकारी स्तर पर शिकायतों का समाधान करने की व्यवस्था बनाई गई है।
इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि प्रक्रिया के दौरान किसी भी व्यक्ति को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
नीतिगत योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण आधार बनेगी जनगणना
विशेषज्ञों के अनुसार जनगणना केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं बल्कि देश की विकास योजनाओं की आधारशिला होती है। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी नीतियों के निर्माण में इन आंकड़ों की अहम भूमिका होती है।
इसलिए नागरिकों से अपेक्षा की जा रही है कि वे सही और पूर्ण जानकारी उपलब्ध कराएं, ताकि भविष्य की योजनाएं अधिक प्रभावी ढंग से बनाई जा सकें।
मुजफ्फरनगर में शुरू होने जा रही डिजिटल जनगणना 2027 प्रशासन और आम जनता के बीच एक नए सहयोग मॉडल का उदाहरण बन सकती है। तकनीक के इस्तेमाल से प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और अधिक विश्वसनीय बनाने का प्रयास किया गया है। अब जिम्मेदारी नागरिकों पर भी है कि वे सही जानकारी देकर इस राष्ट्रीय अभियान को सफल बनाने में अपना योगदान दें।
