रामनगर निवासी ठेकेदार वीरेंद्र कुमार (45) भी इसी बस से लौट रहे थे। वह करीब दस दिन पहले काम के सिलसिले में बाहर गए थे। उन्होंने बताया कि गांव से करीब दो किलोमीटर पहले कुछ युवक बाइक से बस के पीछे-पीछे आ रहे थे। तभी अचानक बस में धुआं भरने लगा। देखते ही देखते धुआं इतना बढ़ गया कि यात्रियों को सांस लेना मुश्किल हो गया और करीब पांच फीट तक आग की लपटें उठने लगीं।

वीरेंद्र के मुताबिक, इसके बाद बस में अफरा-तफरी मच गई। हर यात्री अपनी जान बचाने के लिए बाहर निकलने की कोशिश करने लगा। उन्होंने भी किसी तरह दरवाजे से छलांग लगा दी। पीछे मुड़कर देखा तो बस आग की लपटों से घिर चुकी थी। उन्होंने बताया कि कुछ देर पहले तक जिस बस में लोग अपने घर पहुंचने की उम्मीद में बैठे थे, वही देखते ही देखते काल के मुंह में समा गई।

पीछे फंसे शीशपाल ने कांच तोड़कर बचाई जान

गोहन थाना क्षेत्र के चाकी गांव निवासी शीशपाल सिंह (30) नोएडा में डिलीवरी का काम करते हैं और परिवार के साथ वहीं रहते हैं। नानी के निधन की खबर मिलने पर वह घर लौट रहे थे। हादसे के समय वह बस में सबसे पीछे बैठे थे।

शीशपाल ने बताया कि अचानक धुआं भरने लगा। इसी दौरान चालक ने यात्रियों से जल्दी बाहर निकलने के लिए कहा। वह पीछे की सीट पर होने के कारण दरवाजे तक नहीं पहुंच सके। धुएं और आग के बीच उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा था। आखिरकार उन्होंने बस का कांच तोड़ा और उसी रास्ते से बाहर निकलकर अपनी जान बचाई। इस दौरान उनके पैर में मोच आ गई।

बाहर निकलने के बाद भी शीशपाल कुछ देर तक उस भयावह दृश्य को देखते रहे। उनके सामने लोग जान बचाने के लिए भाग रहे थे और बस लगातार आग की लपटों में घिरती जा रही थी। पैर में चोट होने के बावजूद वह वापस नोएडा चले गए।



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