उरई। खेतों में पराली जलाने से मिट्टी की उर्वरता घटने के साथ पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है। इसे रोकने के लिए किसानों पर जुर्माने के साथ एफआईआर भी दर्ज हो सकती है। रविवार को जालौन में आयोजित जनपद स्तरीय मिलेट्स महोत्सव एवं किसान मेले में किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के प्रति जागरूक करते हुए अधिकारियों ने यह जानकारी दी।


उप कृषि निदेशक डॉ. गगनदीप सिंह ने बताया कि पराली जलाने से पर्यावरण प्रदूषित होता है और खेतों की मिट्टी की उर्वरता भी प्रभावित होती है। इससे आगामी फसलों की पैदावार और गुणवत्ता पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। किसानों से अपील की गई कि फसल अवशेषों को खेतों में न जलाएं। इसके बजाय आधुनिक कृषि यंत्रों अथवा वेस्ट डी-कंपोजर की मदद से उनका प्रबंधन करें। मेले में कृषि विभाग सहित विभिन्न विभागों ने स्टॉल लगाकर योजनाओं और आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी। किसानों को ज्वार, बाजरा, कोदो, सांवा और रागी जैसी मोटे अनाज की फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया गया। इस मौके पर सीडीओ केके सिंह, भारतीय किसान संघ और भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारी सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।



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