जिन हाथों ने महीनों खेत में पसीना बहाकर गेहूं की फसल तैयार की अब वही किसान उपज बेचने के लिए धूप में दर-दर की ठोकरें खाने के लिए मजबूर हैं।
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खबर वहीं जो सत्य हो©
जिन हाथों ने महीनों खेत में पसीना बहाकर गेहूं की फसल तैयार की अब वही किसान उपज बेचने के लिए धूप में दर-दर की ठोकरें खाने के लिए मजबूर हैं।
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