एक जिला एक व्यंजन यानी ओडीओसी योजना में बालूशाही का चयन हुआ है। उद्योग विभाग की टीम ने बालूशाही से जुड़ा ब्योरा जुटाने के बाद इसे उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन निदेशालय को भेजा है।

मैदा, घी और चीनी की चाशनी से तैयार होने वाला यह व्यंजन काफी समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। जनपद और आसपास के क्षेत्रों में विवाह के साथ अन्य सार्वजनिक समारोह में इस मिठाई का खूब उपयोग होता है। बालूशाही का इतिहास काफी पुराना है। बनाने की विशिष्ट विधि के कारण यह अन्य क्षेत्रों की बालूशाही से अलग मानी जाती है। अनुमान के अनुसार 250 से ज्यादा दुकानों पर बालूशाही बनती है। लगभग 1000 लोग इस काम से जुड़े हैं। आने वाले समय में इसकी गुणवत्ता और ब्रांडिंग को बेहतर करने का काम शुरू होगा।

उद्योग उपायुक्त मनीष चौधरी ने बताया कि यहां की बालूशाही की अपनी विशिष्टता के कारण इसे एक जिला एक व्यंजन में चयनित किया गया है। बालूशाही पर्यटन, खानपान और स्थानीय संस्कृति की विशिष्ट पहचान कायम करने में सहायक बनेगी।



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