जिले के आठ ब्लाॅक प्रमुखों और 599 क्षेत्र पंचायत सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो चुका है। मगर क्षेत्र पंचायतों में विकास की रफ्तार जारी रहेगी। कारण शासन ने आठों ब्लाकों में के प्रमुखों को प्रशासक के रूप में तैनात किया है। शासन द्वारा जारी नई गाइडलाइन के तहत अब किसी भी नए विकास कार्य या नीतिगत फैसले के लिए जिलाधिकारी की अनुमति अनिवार्य होगी।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई, जिला पंचायत का कार्यकाल 11 जुलाई और 19 जुलाई को क्षेत्र पंचायतों का कार्यकाल समाप्त हो चुका है। मगर शासन ने नए चुनाव होने तक क्षेत्र पंचायत प्रमुखों को ही प्रशासक के रूप में नियुक्त कर दिया है। यह व्यवस्था 20 जुलाई से लागू हो गई है। अब इन प्रमुखों के पास पहले जैसी शक्तियां नहीं रहेंगी। मगर फिर क्षेत्र में चल रहे विकास कार्य पर कोई ब्रेक नहीं लगेगा। नए प्रशासक केवल सामान्य रूटीन कार्य ही कर सकेंगे। कोई नीतिगत या बड़े फैसले नहीं ले सकेंगे। अगर कोई जरूरी या नीति संबंधी फैसला लेना हो तो डीएम की मंजूरी लेनी होगी। यह व्यवस्था तब तक चलेगी जब तक नए चुनाव के बाद नई क्षेत्र पंचायतें बनकर अपनी पहली बैठक नहीं कर लेती। डीपीआरओ बाल गोविंद श्रीवास्तव ने कहा कि शासन ने क्षेत्र पंचायत चुनाव होने तक प्रमुखों को प्रशासक के रूप में तैनात करने का आदेश दिया है। जिसके तहत कार्य किया जा रहा है।
