मऊरानीपुर। मेला जलविहार महोत्सव में आयोजित श्रीरामचरितमानस व संत सम्मेलन में संतों एवं विद्वानों ने प्रभु भक्ति, धर्म और मानव जीवन के वास्तविक ध्येय पर सारगर्भित विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम का शुभारंभ पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि आयुष श्रीवास व बैजनाथ तिवारी ने किया। इसके उपरांत श्रीरामचरितमानस के संगीतमय पाठ व संतों के प्रवचनों की वर्षा से संपूर्ण प्रांगण भक्तिमय हो उठा। सम्मेलन को संबोधित करते हुए रामजीवन पस्तोर ने कहा कि आज का मानव भौतिकता की चकाचौंध में पूरी तरह उलझकर रह गया है। इस कारण उसे क्षणिक सुख तो मिलता है, परंतु स्थायी शांति नहीं मिलती। यदि जीवन के समस्त दुखों और कष्टों से मुक्ति पानी है, तो परमात्मा की शरण और हरि कथा से जुड़ना ही एकमात्र मार्ग है।
पं. बृजेश त्रिपाठी ने कहा कि संसार रूपी भवसागर से पार उतरने के लिए केवल भगवान नाम का सहारा ही पर्याप्त है। परमात्मा की सच्ची भक्ति से ही जीव का परम कल्याण संभव है।
सिद्धशरण रिछारिया ने श्रद्धालुओं से अपील करते हुए कहा कि यदि मनुष्य मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्शों व जीवन मूल्यों को अपने आचरण में ढाल ले तो उसका जीवन स्वतः सुखमय और आनंदित हो जाएगा।
दीदी नीलम गायत्री ने श्रीरामचरितमानस की महिमा का बखान करते हुए कहा कि श्रीरामचरितमानस जैसा सर्वसमावेशी व जीवन मूल्य सिखाने वाला कोई अन्य ग्रंथ नहीं है। इसे राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि समय ही मनुष्य का सबसे योग्य व कठोर शिक्षक होता है, जो किसी की भूल को क्षमा नहीं करता।
इस अवसर पर बाबा रामदास ब्रह्मचारी, आशू भारद्वाज, अखिलेश सेठ, आशीष कौशिक, राजेन्द्र रावत, छगन राजपूत, अभिलाषा तिवारी, सुभाष चतुर्वेदी, प्रणव द्विवेदी, सुनील शर्मा आदि मौजूद रहे।
