जहरीले सांप को पकड़ने में माहिर 72 वर्षीय बिच्छू आदिवासी को एक लापरवाही ने मौत के मुंह में पहुंचा दिया। सांप पकड़ने के बाद तमाशबीनों को खुश करने के लिए वह कोबरा का प्रदर्शन कर रहा था। इसी दौरान सांप ने उसके चेहरे पर डस लिया। कुछ ही देर में उसका शरीर नीला पड़ने लगा। गंभीर हालत में परिजन उसे मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे, जहां मंगलवार तड़के उसकी मौत हो गई।

मुंह के पास ले जाते ही ढीली हुई पकड़ और चेहरे पर डस गया सांप

मध्य प्रदेश के पिछोर थाना क्षेत्र के टोडा गांव निवासी बिच्छू आदिवासी सांप पकड़कर परिवार का पालन-पोषण करता था। सोमवार शाम बारिश के बाद गांव के एक घर में कोबरा सांप निकल आया। घर के मालिक ने उसे पकड़ने के लिए बिच्छू को बुलाया। करीब 20 मिनट की मशक्कत के बाद उसने सांप को काबू कर लिया। बिच्छू आदिवासी के बेटे मंगल और चचेरे भाई कल्लू ने उक्त जानकारी देते हुए बताया कि सांप पकड़े जाने की खबर फैलते ही मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई। बच्चे भी वहां पहुंच गए। बिच्छू लोगों को सांप दिखाकर प्रदर्शन करने लगा। बच्चों के कहने पर उसने कोबरा को अपने मुंह के पास ले जाने की कोशिश की। इसी दौरान उसकी पकड़ ढीली पड़ गई और सांप ने उसके चेहरे पर हमला कर दिया।

उपचार के दौरान मौत

सर्पदंश के बाद बिच्छू जमीन पर गिर पड़ा। मौके पर अफरा-तफरी मच गई। सांप भी वहां से भाग निकला। परिजन उसे तत्काल मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि जहर शरीर में फैल चुका है। उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। नवाबाद थाना प्रभारी रवि श्रीवास्तव ने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है।

1000 से अधिक सांप पकड़ चुका था बिच्छू

परिजनों के मुताबिक बिच्छू आदिवासी ने जिंदगीभर सांप और बिच्छू जैसे जहरीले जीव पकड़े। वह अब तक एक हजार से अधिक सांप पकड़ चुका था। इनमें कोबरा समेत कई विषैले सांप शामिल थे। वर्षों से यह काम करते-करते सांप पकड़ना उसके लिए आसान हो गया था। वह सांपों को पकड़ने के बाद जंगल में छोड़ देता था। इसके बदले उसे कुछ पैसे मिल जाते थे। परिजनों का कहना है कि इतने वर्षों में उसे कभी सांप ने नहीं काटा था। पहली बार हुए सर्पदंश ने उसकी जान ले ली।



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