डिफेंस कॉरिडोर का दायरा और बढ़ने जा रहा है। दूसरे चरण में रक्षा गलियारे के विस्तार के लिए 728 हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि खरीदी जाएगी। गरौठा तहसील के तीन गांवों में भूमि खरीद के लिए काश्तकारों से आपत्तियां मांगी गई हैं। इनके निस्तारण के बाद इसी माह खरीद प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।

डिफेंस कॉरिडोर केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना है, जिसका उद्देश्य देश को रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है। पहले चरण में एरच, गेंदा कबूला, कठर्री, लबेरा, नेकेरा और इस्किल गांवों में 1076 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहीत की जा चुकी है। यहां कई बड़ी कंपनियों की उत्पादन इकाइयों की स्थापना का कार्य शुरू हो चुका है।

भारत डायनामिक्स लिमिटेड (बीडीएल) की इकाई का 80 प्रतिशत से अधिक निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। इसके अगस्त में शुरू होने की संभावना है। इस इकाई में एंटी टैंक मिसाइल और उससे जुड़े पुर्जों का निर्माण किया जाएगा।

डिफेंस कॉरिडोर में लगातार निवेश प्रस्ताव आने और नई इकाइयों के लिए एमओयू होने से अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता बढ़ी है। इसी को देखते हुए दूसरे चरण में 728 हेक्टेयर भूमि खरीदने की प्रक्रिया शुरू की गई है। यह भूमि जनपद की गराैठा तहसील के गौंती, जखनवारा और झबरा गांवों में ली जाएगी। यूपीडा की ओर से प्रभावित काश्तकारों से आपत्तियां आमंत्रित की गई हैं। एडीएम वित्त एवं राजस्व पल्लवी मिश्रा ने बताया कि निर्धारित समय सीमा में प्राप्त आपत्तियों का निस्तारण करने के बाद भूमि क्रय और बैनामा की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

37 परियोजनाओं के लिए 12,500 करोड़ रुपये के एमओयू

डिफेंस कॉरिडोर में अब तक 37 परियोजनाओं के लिए करीब 12,500 करोड़ रुपये के निवेश संबंधी एमओयू हो चुके हैं। जानकारों के अनुसार यहां बनने वाले रक्षा उत्पाद न केवल देश की जरूरतों को पूरा करेंगे, बल्कि उनका निर्यात भी किया जाएगा। इससे क्षेत्र में औद्योगिक विकास और रोजगार के नए अवसर सृजित होने की उम्मीद है।



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