बुंदेलखंड की नदियां इन दिनों रेत माफिया के निशाने पर हैं। एनजीटी और पर्यावरण विभाग के नियमों को ताक पर रखकर बेतवा, धसान, पहूज और सुखनई जैसी नदियों का सीना मशीनों से छलनी किया जा रहा है। वैध बालू घाटों की आड़ में अवैध खनन का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। बिना रॉयल्टी चुकाए कालिख पुते और बिना नंबर प्लेट वाले डंपरों से रेत बाहर भेजी जा रही है। इससे जहां पर्यावरण को भारी नुकसान हो रहा है, वहीं सरकारी खजाने को भी करोड़ों रुपये की चपत लग रही है।

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने भी अवैध रेत खनन पर सख्त नाराजगी जताई थी। कोर्ट ने बिना रजिस्ट्रेशन और नंबर प्लेट वाले वाहनों से रेत ढुलाई पर रोक लगाने और कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद झांसी में हालात जस के तस नजर आए।

पड़ताल में सामने आया कि टहरौली क्षेत्र के कलौथरा, कल्याणपुरा और लुहरगांव घाटों से रोजाना ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के जरिये अवैध तरीके से रेत निकाली जा रही है। बाद में इसे एक स्थान पर जमा कर बिना नंबर प्लेट वाले डंपरों से बाहर भेज दिया जाता है। इसी तरह चिरगांव के मुराटा और महेवा खेरा गांवों में भी चोरी-छिपे नदी से रेत निकालकर बेची जा रही है।

मोंठ के तालौड़ गांव में भी रेत माफिया खुलेआम नदी की धारा और किनारों को खोद रहे हैं। यहां खेतों से भी मिट्टी निकाले जाने की शिकायतें हैं। देवरी क्षेत्र के पठा, ढकरवारा, टकटौली, मैलवारा, घाटकोटरा, भंडरा और बसरिया गांवों में रात के अंधेरे में ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से रेत की ढुलाई की जा रही है। इस संबंध में जिलाधिकारी गौरांग राठी ने कहा कि शिकायतों और तथ्यों की जांच कर कार्रवाई कराई जाएगी।

इस तरह तोड़े जा रहे नियम

नियमों के अनुसार नदी में डेढ़ से तीन मीटर तक ही खनन की अनुमति है, लेकिन कई जगह 20 से 30 मीटर तक खोदाई की जा रही है।

पोकलैंड और पनडुब्बी जैसी मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि इन पर स्पष्ट प्रतिबंध है।

रेत परिवहन के दौरान वाहनों को तिरपाल से ढंकना जरूरी है, लेकिन अधिकांश वाहन खुले दौड़ रहे हैं।

रास्तों पर पानी का छिड़काव नहीं होने से गांवों में धूल उड़ रही है।

खनन की अनुमति केवल दिन में है, लेकिन रात में भी मशीनों से खोदाई जारी रहती है।

वैध पट्टों की आड़ में अवैध खनन

जानकारों के मुताबिक वैध पट्टों की आड़ में कई किलोमीटर दूर तक नदी से अवैध खनन किया जा रहा है। पट्टों में प्रतिवर्ष सीमित मात्रा और नौ माह तक खनन की अनुमति होती है। सामान्य तौर पर 30 से 50 वाहनों तक परिवहन की इजाजत रहती है, लेकिन कई घाटों से रोजाना 300 से अधिक वाहन रेत लेकर निकल रहे हैं।

खेत रौंदकर बना दिए रास्ते, विरोध पर धमकी

भंडरा/भदरवारा। क्षेत्र के खकौरा और बिरगुआं गांव के किसानों ने बालू ठेकेदारों पर खेतों से जबरन रास्ता बनाने का आरोप लगाया है। किसानों का कहना है कि ट्रैक्टर और डंपर खेतों की मेड़ और फसलें रौंदते हुए निकलते हैं। विरोध करने पर धमकियां दी जाती हैं। बालकिशन, उत्तम, हरदास, मुन्नीलाल, गोकुल, रज्जू, कन्हैयालाल और बैजनाथ ने उपजिलाधिकारी मऊरानीपुर को शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की है।

टोल से निकलते रेत से भरे ओवरलोड वाहन…



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