झांसी-कानपुर हाईवे और झांसी-ललितपुर हाईवे पर घूम रहे आवारा पशु वाहन चालकों के लिए बड़ा खतरा बन चुके हैं। हाईवे पर जगह-जगह सड़कों पर घूम रहे और बीच मार्ग में बैठे मवेशियों के कारण लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं। खासकर रात के समय तेज रफ्तार वाहनों के सामने अचानक पशु आ जाने से चालकों को संभलने तक का मौका नहीं मिल पाता। बारिश के मौसम में खेतों में पानी भरने और मच्छरों के प्रकोप के कारण यह समस्या और बढ़ गई है। हरे चारे और पानी की तलाश में छुट्टा मवेशियों के झुंड सीधे हाईवे पर डेरा डाल रहे हैं।
झांसी-कानपुर हाईवे पर पिछले कुछ महीनों में आवारा पशुओं के कारण गंभीर हादसे सामने आए हैं। छह अगस्त को झांसी-कानपुर हाईवे पर पूंछ थाना क्षेत्र के खिल्ली के पास अचानक पशु आ जाने से कार सवार डिवाइडर से टकरा गए। इस हादसे में माफिया अतीक अहमद के बेटे अबान सहित दो लोगों की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। यह कोई पहला मामला नहीं है, इससे पहले भी मोंठ, पूंछ और चिरगांव के समीप हुए कई हादसों में लोग या तो जान गंवा चुके हैं या गंभीर रूप से घायल होकर अस्पताल पहुंचे हैं।
आज लगभग हर नेशनल हाईवे की स्थिति यही बनी हुई है। बारिश में खेतों में पानी भरने व मच्छरों के कारण पशु इन दिनों हाईवे पर जमावड़ा लगाए हुए हैं। एनएचएआई द्वारा ऐसे आवारा पशुओं को हाईवे तक पहुंचने से रोकने के लिए पेट्रोलिंग का दावा किया जाता है, लेकिन हो रहे हादसे बता रहे हैं कि पेट्रोलिंग मवेशियों को खदेड़ने में नाकाफी साबित हो रही है। रात के समय आवारा पशु दूर से दिखाई नहीं देते, और अचानक सामने आने पर वाहन चालक उन्हें बचाने के लिए तेज ब्रेक लगाते हैं या वाहन मोड़ते हैं। इससे पीछे से आ रहे वाहनों की टक्कर, वाहन पलटने अथवा डिवाइडर से टकराने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
गोशालाएं कागजों तक सीमित, हाईवे पर मवेशियों का डेरा
शासन और प्रशासन ने आवारा पशुओं की समस्या से निपटने के लिए गांव-गांव गोशालाओं का निर्माण कराया है, इसके बावजूद हाईवे पर मवेशियों की बेरोकटोक चहल-कदमी जारी है। पिछले एक साल के सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़ों पर गौर करें तो अधिकांश हादसे पशुओं को बचाने के चक्कर में ही घटित हुए हैं।
इनका यह है कहना
झांसी-कानपुर हाईवे पर पशुओं को भगाने के लिए लगातार पेट्रोलिंग कराई जाती है। कुछ क्षेत्र ऐसे हैं जहां गांवों के नजदीक पशु हाईवे पर आ जाते हैं। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए एनएचएआई जल्द ही हाईवे के किनारे तार फेंसिंग कराने जा रही है, जिससे पशुओं के मुख्य मार्ग पर आने पर रोक लगाई जा सके। मनोज कुमार, परियोजना निदेशक (एनएचएआई झांसी)
प्रमुख हादसे…
6 अगस्त: झांसी-कानपुर हाईवे पर पूंछ के खिल्ली के पास पशु बचाने में कार डिवाइडर से भिड़ी, इसमें दो लोगों की मौत हो गई।
7 अगस्त: झांसी-ललितपुर हाईवे पर ओरछा के चकरपुर चौकी क्षेत्र में पशु को बचाने के चक्कर में टमाटर से भरा ट्रक पलट गया।
30 जुलाई: झांसी-खजुराहो हाईवे पर मप्र-उप्र सीमा के पास पशु बचाने के प्रयास में दूध से भरा टैंकर पलट गया।
18 मई: झांसी-कानपुर हाईवे पर पूंछ के सेसा के पास पशु बचाने में कार पलटी, जिसमें लोग घायल हुए।
15 अप्रैल: झांसी-कानपुर हाईवे पर मोंठ के समीप पशु बचाने के चक्कर में गिट्टी से भरा ट्रक पलट गया।
18 फरवरी: झांसी-खजुराहो हाईवे पर मऊरानीपुर के समीप पशु से टकराने के कारण एक बाइक सवार की मौत हो गई।
23 जनवरी: झांसी-खजुराहो हाईवे पर मऊरानीपुर के बीच पशु से कार टकराने से तीन लोग घायल हो गए।
