झांसी-कानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर जल्द ही ओवरलोड वाहनों पर लगाम कसी जाएगी। इसके लिए हाईवे पर सरकार वे-इन-मोशन और ऑटोमेटिक वेइंग सेंसर तकनीक अपनाने जा रही है। जिसे सड़क के नीचे लगाया जाएगा। जिससे हाईवे पर गुजरते हुए वाहन की वजन मापना आसान होगा। इस संबंध में प्रदेश सरकार के खनन विभाग की भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) से वार्ता चल रही है। सबकुछ ठीक रहा तो जल्द ही हाईवे पर ऑटोमेटिक वेइंग सेंसर लगने के बाद अवैध रूप से दौड़ रहे ओवरलोड वाहनों पर कार्रवाई की जा सकेगी।
नेशनल हाईवे पर गिट्टी, बजरी समेत खनन संबंधी ओवरलोड वाहनों से हाईवे की सड़कें समय से पहले खराब हो रही हैं। अब सरकार ने हाईवे पर नई तकनीक से ओवरलोड वाहनों की पहचान कर कार्रवाई की रणनीति तैयार की है। इसके लिए हाईवे पर अब सड़कों के नीचे वाहनों का भार मापने वाले सेंसर लगाए जाएंगे। जैसे ही गाड़ी के टायर इसके ऊपर से गुजरेंगे, यह तकनीक तुरंत वजन का हिसाब लगा लेगी। एनएचएआई के परियोजना निदेशक मनोज कुमार ने बताया कि खनन विभाग और एनएचएआई के बीच इस संबंध में वार्ता चल रही है। इसके लिए झांसी-कानपुर हाईवे पर सेंसर लगाने की सहमति बन गई है। प्रदेश सरकार के आदेश के बाद इस पर कार्य शुरू किया जाएगा।
डिजिटल लिंक रहेगा सिस्टम
एनएचएआई अफसर की मानें तो यह सिस्टम सीधे कैमरे, फास्टैग और सरकार के वाहन पोर्टल से जुड़ा होता है। ओवरलोडिंग मिलते ही डेटा सीधे सरकारी रजिस्टर में दर्ज हो जाता है और संबंधित गाड़ी की पहचान की जा सकेगी। ओवरलोडिंग का यह बढ़ा हुआ शुल्क केवल फास्टैग के जरिए ही अपने आप काटा जाएगा। बताया कि 10 फीसदी ओवरलोड वाहन पर कोई जुर्माना नहीं लगाया जाता है। 10 से 40 फीसदी ओवरलोड पर सामान्य टोल टैक्स का दो गुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुना और 40 प्रतिशत से अधिक पर सामान्य टोल का चार गुना चार्ज वसूल किया जाता है।
