नगर निगम की कार्यकारिणी का चुनाव दो महीने की खींचतान के बाद आखिरकार तय हुआ तो अगले ही दिन भाजपा में ऐसा सियासी घमासान मचा कि चुनाव ही टल गया। भाजपा पार्षद दल के नेता नरेंद्र नामदेव और सचेतक मुकेश सोनी ने पार्टी के कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्रीय अध्यक्ष को चिट्ठी भेजकर मेयर और पार्टी के कुछ पार्षदों पर निशाना साध दिया। दोनों ने आरोप लगाया कि चुनाव की पूर्व सूचना तक उन्हें नहीं दी गई। चिट्ठी सामने आने के कुछ ही घंटे बाद नगर निगम ने बृहस्पतिवार को चुनाव स्थगित करने का आदेश जारी कर दिया।

नगर निगम की 12 सदस्यीय कार्यकारिणी में छह सदस्यों का दो साल का कार्यकाल एक जून को पूरा हो चुका है। इनमें भाजपा के पांच और बसपा का एक पार्षद शामिल है। इसके बाद से ही कार्यकारिणी के छह नए सदस्यों के चुनाव की मांग उठ रही थी। पार्षद लगातार चुनाव कराने का दबाव बना रहे थे, जबकि मेयर की ओर से जल्द चुनाव कराने का आश्वासन दिया जा रहा था।

बुधवार को आखिरकार नगर निगम की ओर से 21 अगस्त को चुनाव कराने की घोषणा हुई। चुनाव की घोषणा के अगले ही दिन भाजपा पार्षद दल के नेता और सचेतक ने क्षेत्रीय अध्यक्ष को चिट्ठी भेजकर मोर्चा खोल दिया। इससे चुनाव से ठीक पहले भाजपा के अंदरखाने की नाराजगी खुलकर सामने आ गई। इस मामले में मेयर बिहारी लाल आर्य का कहना है कि पार्टी नेताओं की व्यस्तता के चलते बैठक करने का समय नहीं था, इसलिए चुनाव स्थगित करना पड़ा। अगली तिथि जल्द घोषित होगी।

‘अखबार पढ़कर मिली चुनाव की जानकारी’

क्षेत्रीय अध्यक्ष को भेजी गई चिट्ठी में नरेंद्र नामदेव और मुकेश सोनी ने लिखा कि नगर निगम में भाजपा के 45 पार्षद हैं। संगठन ने विधिवत उन्हें पार्षद दल का नेता और सचेतक नियुक्त किया है। इसके बावजूद कार्यकारिणी चुनाव की जानकारी उन्हें पहले नहीं दी गई। दोनों का आरोप है कि कार्यकारिणी का कार्यकाल खत्म होने से पहले ही चुनाव कराने के लिए मेयर को सूचित किया गया था। इसके बाद भी चुनाव टलता रहा। उनका आरोप है कि बाद में मेयर और उनके कुछ चुनिंदा पार्षदों ने आनन-फानन में बैठक का हवाला देकर 21 अगस्त को चुनाव कराने की घोषणा कर दी। इसकी सूचना पार्षद दल के नेता, सचेतक और पार्टी संगठन को नहीं दी गई। चुनाव की जानकारी उन्हें समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों से मिली।

‘निजी हित में चुनाव टालने’ का आरोप

चिट्ठी में दोनों भाजपा नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि मेयर और उनके कुछ चुनिंदा पार्षद निजी हितों के चलते चुनाव को टालते रहे। उन्होंने क्षेत्रीय अध्यक्ष से मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। चुनाव की घोषणा के ठीक बाद आई इस चिट्ठी ने भाजपा के भीतर चल रही खींचतान को सार्वजनिक कर दिया।

सुबह खुला कार्यालय, कुछ देर बाद चुनाव स्थगित

चिट्ठी के बाद गुरुवार सुबह नगर निगम कार्यालय खुला तो कुछ ही देर में कार्यकारिणी चुनाव स्थगित करने का आदेश जारी हो गया। अपर नगर आयुक्त राहुल कुमार यादव की ओर से जारी पत्र में कहा गया कि महापौर बिहारी लाल आर्य के आदेश के क्रम में छह कार्यकारिणी सदस्यों का निर्वाचन अपरिहार्य कारणों से स्थगित किया जाता है। अब चुनाव की नई तारीख का इंतजार है।

दो महीने बाद बनी थी बात, एक दिन में फिर बिगड़ गई

कार्यकारिणी के छह सदस्यों का कार्यकाल एक जून को पूरा हुआ था। इसके बाद करीब दो महीने तक चुनाव की तारीख तय नहीं हो सकी। बुधवार को 21 अगस्त की तारीख घोषित हुई, लेकिन 24 घंटे भी नहीं बीते कि भाजपा पार्षद दल की चिट्ठी और उसके बाद चुनाव स्थगित होने से पूरा मामला फिर उलझ गया।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

अभी अभी की खबरें