सरकारी कर्मचारियों की जिस सेवा पुस्तिका को उनकी जिंदगी माना जाता है, सिंचाई विभाग में उनके ही रखरखाव को लेकर गंभीर लापरवाही बरती जा रही है। तकरीबन सभी डिवीजन में कर्मचारियों से जुड़ी सेवा पुस्तिकाओं का कोई रखरखाव नहीं है। इस वजह से तकरीबन प्रत्येक डिवीजन से सेवा पुस्तिकाएं गायब हैं। उसकी जगह प्रतिलिपि बनाकर काम चलाया जा रहा है।
झांसी मंडल में सिंचाई विभाग में एक हजार से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। इनका प्रदर्शन आंकने के लिए सेवा पुस्तिका ही इकलौता माध्यम है। इसमें ही उनकी नौकरी से जुड़ी हर छोटी-बड़ी बात दर्ज होती है। नौकरी ज्वाइन करने, पदोन्नति समेत प्रतिकूल कार्रवाई तक इसमें दर्ज होती है। प्रत्येक कर्मचारी के लिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण होती है लेकिन, इनके रख रखाव की कोई मुक्कमल व्यवस्था नहीं है। सबसे बड़ी लापरवाही अनुसंधान नियोजन खंड, बेतवा प्रखंड, माताटीला जैसे डिवीजन में सामने आई है। यहां कई कर्मचारियों की सेवा पुस्तिकाएं गायब हैं। इसको लेकर कर्मचारी भी रोष जता चुके हालांकि अधिशासी अभियंता नितिन कुमार इससे इन्कार करते हैं। उनका कहना है सेवा पुस्तिकाओं की नियमित देखरेख होती है। कुछ सेवा पुस्तिकाओं का पता नहीं चल रहा था, उसे भी कर्मचारी ने वापस कर दी हैं।
7 सेवा पुस्तिकाएं गायब होने पर हंगामा
अनुसंधान नियोजन खंड में सात कर्मचारियों की सेवा पुस्तिकाएं काफी समय से गायब मिलीं। इनके गायब होने का पता चलने पर कुछ दिन पहले कर्मचारियों ने हंगामा भी किया। इसके बाद इनकी तलाश शुरू हुई। काफी मशक्कत के बाद यह पुस्तिकाएं वरिष्ठ सहायक अजीत कुमार के पास मिलीं। वरिष्ठ सहायक ने यह सेवा पुस्तिकाएं कार्यालय में जमा कराईं हैं। तब जाकर कर्मचारियों ने राहत की सांस ली। जिनकी पुस्तिकाएं गायब हुई थीं उनमें गणेश प्रसाद वर्मा, राजेश दुबे (जिलेदार), अतुल दुबे (सींच पर्यवेक्षक), बाली मिश्रा (सींचपाल), विपिन कुमार सींचपाल), पामेला वर्मा (ड्राफ्टमैन) और आकाश रायकवार (कनिष्ठ सहायक) शामिल थे।
