झांसी। पूंछ थाना क्षेत्र के काशीपुरा गांव निवासी योगेंद्र सिंह यादव (53) ने फंदा लगाकर जान दे दी। वह एक कंपोजिट उच्च प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक थे। परिजनों का कहना है शिक्षक योग्यता परीक्षा (टीईटी) परीक्षा पास न कर पाने से वह परेशान रहते थे। दो बार परीक्षा देने के बाद भी कामयाबी नहीं मिली थी। अंदेशा जताया है कि इस वजह से उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठाया। हालांकि, पुलिस को कमरे से कोई भी सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ। पुलिस आगे मामले की जांच कर रही है।

काशीपुरा निवासी योगेंद्र गांव से करीब दो किलोमीटर दूर खरैला गांव के कंपोजिट उच्च प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक थे। पत्नी ममता गांव के स्कूल में शिक्षामित्र हैं। योगेंद्र की नौकरी को करीब 21 साल हो चुके थे। उनके भतीजे नीशू का कहना है कि टीईटी परीक्षा पास करने को अनिवार्य करने के बाद से वह दो बार परीक्षा दे चुके थे, लेकिन उनको कामयाबी नहीं मिली।

दो महीने पहले हुई परीक्षा में भी पास नहीं हुए। इससे वह तनाव में रहने लगे। वह चिड़चिड़े रहने लगे थे। रविवार सुबह घर के लोग बाहर थे। तभी ऊपर के कमरे में जाकर पंखे के लॉक पर रस्सी के सहारे फंदा लगा लिया। थाना प्रभारी विद्या सागर सिंह के मुताबिक उनके पास से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला। पोस्टमार्टम कराने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है।

फंदे से उतारकर परिजन ही लेकर पहुंचे अस्पताल

योगेंद्र के फंदा लगाने के कुछ देर बाद बेटा शिवेंद्र उनके कमरे में पहुंचा। उसने ही सबसे पहले उनको फंदे से लटका देखा। यह देख उसकी चीख निकल गई। चीख-पुकार सुनकर परिवार के लोग भी आ गए। पत्नी ममता यह दृश्य देखकर बेहोश हो गईं। परिजन उनको फंदे से उतारकर मोंठ सीएचसी लेकर पहुंचे। यहां डॉक्टरों ने उनको मृत घोषित कर दिया। उनकी मौत से परिवार में रोना-पिटना मच गया। योगेंद्र गांव के संपन्न परिवार से थे। परिवार में पत्नी ममता समेत दो बेटी अंजू और श्वेता एवं बेटा शिवेंद्र है। दोनों बेटियों की शादी हो चुकी जबकि शिवेंद्र अविवाहित है।



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