झांसी। डेढ़ सौ साल से अधिक पुराने पारीछा बांध का कायाकल्प होगा। पहले चरण में करीब तीन करोड़ रुपये खर्च करके अंग्रेजों के जमाने से लगे लोहे के विशाल गेटों (फॉलिंग शटर) की मरम्मत कराई जाएगी। स्लूज गेट भी सुधारे जाएंगे। बांध की दूसरी संरचनाओं में भी सुधार होगा। इस प्रस्ताव को शासन ने मंजूर कर दिया है। सिंचाई अफसरों का कहना है इससे बांध की स्टोरेज क्षमता भी बढ़ जाएगी। यह काम अब जल्द ही आरंभ होगा।
बेतवा नदी पर वर्ष 1875 में पारीछा गांव में बांध का निर्माण कराया गया था। इसके निर्माण में पत्थर, चूना और सुर्खी का इस्तेमाल हुआ था। इस मजबूती की वजह से यह बांध अभी भी पूरे देश में पहचाना जाता है। बांध में पानी स्टोर करने के लिए 318 लोहे के विशाल गेट हैं। काफी पुराने हो जाने से यह गेट अब खराब हो रहे हैं। इससे बांध में रिसाव हो रहा है। केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट के जरिये भी बांध के पुनर्निर्माण का प्रस्ताव है लेकिन सिंचाई अफसरों का कहना है इसमें पांच साल से अधिक समय लगने की उम्मीद है जबकि पानी की जरूरत देखते हुए सुधार की तुरंत आवश्यकता है। अधिशासी अभियंता बृजेश पोरवाल का कहना है पानी की जरूरत को देखते हुए प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। इसे शासन ने मंजूर कर लिया है। अब यह काम शुरू कराया जाएगा।
केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट से खर्च होंगे 100 करोड़
केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट के जरिये पारीछा बांध में व्यापक पैमाने पर बदलाव होगा। इस पर करीब सौ करोड़ रुपये खर्च किए जाने का प्रस्ताव है। इसके तहत बांध के सभी पुराने 318 गेट बदलकर प्यानो डैम की तर्ज पर इसे बदला जाएगा। ऑटोमैटिक गेट हो जाने से जल प्रबंधन बेहतर तरीके से हो सकेगा हालांकि इसमें अभी पांच साल से अधिक का समय लगने की उम्मीद है। सिंचाई अफसरों का कहना है कि प्रस्ताव को पहले केंद्रीय जल आयोग की ओर से मंजूरी मिलेगी। इसके बाद यहां काम आरंभ कराया जाएगा।
अभी 78.76 मिलियन घनमीटर पानी स्टोरेज की क्षमता
पारीछा बांध में 78.76 मिलियन घनमीटर पानी स्टोर होता है। इस बांध की लंबाई 1,174.6 मीटर तथा ऊंचाई करीब 16.77 मीटर है। इसमें लगे 318 फॉलिंग शटर पानी के प्रवाह और निकासी को नियंत्रित करते हैं। सिंचाई विभाग के आंकड़ों के मुताबिक इसके स्पिलवे से 22,990 घनमीटर प्रति सेकंड पानी छोड़ा जा सकता है। इससे 920 मेगावाट क्षमता वाली पारीछा ताप विद्युत परियोजना को भी पानी दिया जाता है।
