झांसी/बरुआसागर। नोटघाट पुल के पास मंगलवार सुबह करीब 7 बजे मछली पकड़ रहे लोगों को रोकने के लिए नाव से नदी में गए दो सगे भाई हादसे का शिकार हो गए। नदी के बीच पत्थर से नाव टकराने के बाद पलट गई और कटरा मोहल्ला निवासी महेंद्र रायकवार (25) और उसका छोटा भाई मनीष (20) बेतवा के तेज बहाव में बह गए।
दोनों को डूबता देख पिता राजू उन्हें बचाने के लिए दूसरी नाव से पहुंचे, लेकिन तब तक दोनों आंखों से ओझल हो चुके थे। सूचना पर पहुंची पुलिस ने गोताखोरों की मदद से तलाश शुरू कराई। बाद में एसडीआरएफ की टीम भी बुलाई गई। देर रात तक दोनों भाइयों का पता नहीं चल सका।
कटरा मोहल्ला निवासी राजू रायकवार के पास नोटघाट से कोलबा के बीच बेतवा में मछली पकड़ने का ठेका है। इन दिनों नदी का बहाव तेज होने के कारण मछली पकड़ने का काम बंद है। इसके बावजूद कुछ लोग चोरी-छिपे जाल लगाकर मछली पकड़ रहे हैं। सुबह राजू अपने दोनों बेटों के साथ नदी की निगरानी करने पहुंचा था।
राजू के मुताबिक नोटघाट पुल के दूसरी तरफ कुछ लोगों ने जाल लगा रखा था। इसे देखकर महेंद्र और मनीष उन्हें रोकने के लिए नाव से रवाना हो गए। दोनों अभी नदी के बीच ही पहुंचे थे कि नाव पत्थर से टकरा गई और पलट गई। दोनों नदी में जा गिरे। यह देखकर राजू ने उन्हें बचाने के लिए अपनी नाव से पीछा किया, लेकिन तेज बहाव के कारण दोनों कुछ ही देर में लापता हो गए।
हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। सूचना पर बरुआसागर थानाध्यक्ष प्रकाश सिंह पुलिस बल के साथ पहुंचे। गोताखोरों ने नदी में उतरकर दोनों की तलाश शुरू की, लेकिन कई घंटे की कोशिश के बाद भी सफलता नहीं मिली। तहसीलदार सदर विवेक कुमार भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि दोनों युवकों की तलाश के लिए एसडीआरएफ की टीम को भी लगाया गया है।
पिता ने रोका था, फिर भी नदी में चले गए
दोनों बेटों के नदी में बह जाने से पिता राजू और परिवार वालों का रो-रोकर बुरा हाल है। राजू ने बताया कि नदी का बहाव तेज होने के कारण उसने दोनों बेटों को नाव लेकर जाने से मना किया था। मोबाइल पर फोन कर उन्हें वापस आने के लिए भी कहा, लेकिन दोनों नहीं माने। राजू के मुताबिक महेंद्र और मनीष को तैरना भी नहीं आता था। इसके बावजूद दोनों मछली पकड़ रहे लोगों को रोकने के लिए नदी में चले गए और हादसे का शिकार हो गए।
