लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) में बेहतर प्रदर्शन करने वाले विभागों, संस्थानों और संबद्ध महाविद्यालयों को अधिक अकादमिक स्वतंत्रता देने की योजना मंजूर की है। एनआईआरएफ रैंकिंग-लिंक्ड एकेडमिक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस योजना के तहत पात्र विभाग और कॉलेज अपने उत्कृष्टता क्षेत्र से जुड़े विवि के निर्धारित पाठ्यक्रम में 70 फीसदी तक संशोधन कर सकेंगे।
योजना के तहत उत्कृष्टता केंद्रों को पारंपरिक परीक्षा प्रणाली के अलावा ओपन बुक परीक्षा, केस आधारित मूल्यांकन, कैपस्टोन प्रोजेक्ट, उद्योग आधारित मूल्यांकन, सतत आंतरिक मूल्यांकन और कौशल आधारित परीक्षण अपनाने की सुविधा होगी।
कुलपति प्रो. जेपी सैनी ने बताया कि प्रत्येक उत्कृष्टता केंद्र में अकादमिक सलाहकार एवं निगरानी समिति गठित की जाएगी। इसमें संस्थान प्रमुख, शिक्षक, बाहरी विषय विशेषज्ञ, उद्योग प्रतिनिधि, प्रख्यात पूर्व छात्र और कुलपति की ओर से नामित दो विशेषज्ञ शामिल होंगे। हालांकि न्यूनतम शैक्षणिक मानक, डिग्री की अनिवार्यता, क्रेडिट ढांचा, प्रवेश नियम और परीक्षा की शुचिता पर विवि का नियंत्रण बना रहेगा। कुलपति के अनुसार, योजना से विभागों और संबद्ध कॉलेजों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। इससे विद्यार्थियों को वैश्विक उद्योग की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने में मदद मिलेगी।
रैंकिंग में प्रदर्शन नहीं गिरा तो वापस होगी सुविधा
कुलपति ने बताया यह अकादमिक स्वायत्तता स्थायी नहीं होगी। योजना में नियमित समीक्षा का प्रावधान है। निर्धारित पात्रता बनाए रखने में विफल रहने वाले विभाग या कॉलेज से उत्कृष्टता केंद्र का दर्जा और उससे जुड़ी सुविधाएं वापस ली जा सकेंगी।
एक भी कॉलेज के पास नहीं है एनआईआरएफ रैंकिंग
लखनऊ विश्वविद्यालय के विधि और प्रबंधन विभाग के पास ही फिलहाल अभी तक एनआईआरएफ की रैंकिंग है। दूसरी ओर लखनऊ विवि से संबद्ध किसी भी कॉलेज के पास एनआईआरएफ रैंकिंग नहीं है। लविवि की रैंकिंग सेल डायरेक्टर प्रो. गीतांजलि ने बताया कि इस बार विवि से संबद्ध सभी 33 राजकीय और एडेड कॉलेजों ने रैंकिंग के लिए आवेदन किया है।
