झांसी। नौकरी दिलाने के नाम पर युवाओं से ठगी करने वाले गिरोह का शनिवार को पुलिस ने भंडाफोड़ कर दिया। साइबर पुलिस की अगुआई में तीन टीमों ने प्रेमनगर के बिजौली स्थित कार्यालय पर छापा मारकर आठ जालसाजों को गिरफ्तार किया। मौके पर ट्रेनिंग के नाम पर रखे गए 50 युवक-युवतियों को भी पुलिस ने मुक्त कराया। गिरोह का सरगना समेत तीन आरोपी पुलिस को चकमा देकर फरार हो गए।
पुलिस ने मौके से फर्जी कंपनी और चिटफंड से संबंधित छह रजिस्टर, पांच कॉपियां, छह डायरी, नौ प्रमाण-पत्र, एप्लीकेशन फॉर्म की नौ जिल्द, कैशबुक और 20 रुपये के 52 स्टांप पेपर बरामद किए। गिरफ्तार आरोपियों में सात राजस्थान और एक प्रयागराज का रहने वाला है। सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
तीन महीने से झांसी में चला रहे थे ठगी का खेल
पुलिस के मुताबिक गिरोह पिछले करीब तीन महीने से झांसी में सक्रिय था। कुछ दिन पहले तीन युवक साइबर थाने पहुंचे और गिरोह की गतिविधियों की जानकारी दी। इसके बाद एसएसपी विकास कुमार ने साइबर थाना, बरुआसागर और बबीना पुलिस की संयुक्त टीम गठित की। शनिवार को टीम ने बिजौली स्थित कृष्णा कॉम्प्लेक्स में एमएस मां लक्ष्मी एसोसिएट के कार्यालय पर छापा मारा। पुलिस के पहुंचते ही वहां अफरातफरी मच गई और कुछ युवक भाग निकले।
ये हुए गिरफ्तार
पुलिस ने मौके से प्रयागराज के कर्नलगंज निवासी आलोक कुमार (21) को गिरफ्तार किया। उसके साथ राजस्थान के टोंक निवासी रामसिंह मीणा (24), लखन मेहता (19), बब्बू (23), आलोक कुमार (33), मोहित वर्मा (19), सुरेंद्र और नितेश (23) को भी पकड़ा गया। आरोपियों की निशानदेही पर इमारत में ट्रेनिंग के नाम पर रखे गए 50 युवक-युवतियों को मुक्त कराया गया।
नौकरी के नाम पर बुलाकर ट्रेनिंग के नाम पर वसूली
एसएसपी विकास कुमार ने बताया कि आरोपी युवाओं को विभिन्न विभागों में नौकरी दिलाने का झांसा देकर बुलाते थे। एंट्री फॉर्म के नाम पर 1,100 रुपये लिए जाते थे। इसके बाद ट्रेनिंग के नाम पर भी उनसे रकम वसूली जाती थी। लेन-देन से संबंधित दस्तावेजों से इसकी पुष्टि हुई है।
प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया कि युवाओं को ट्रेनिंग के नाम पर इमारत में रोककर रखा जाता था। उनके परिचितों और रिश्तेदारों को भी नौकरी का झांसा देकर बुलाया जाता था। बाद में उन्हें मल्टी लेवल मार्केटिंग के उत्पाद बेचने के लिए मजबूर किया जाता था। पुलिस के मुताबिक गिरोह वाराणसी और लखनऊ में इसी तरह के मामलों में कार्रवाई के बाद झांसी आया था। गिरोह के नेटवर्क और फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है।
ब्रेनवॉश के लिए रोज चलती थी एक घंटे की क्लास
नौकरी दिलाने के नाम पर युवाओं को झांसी बुलाने के बाद जालसाज उनका ब्रेनवॉश करते थे। नेटवर्क मार्केटिंग में जोड़ने के लिए रोजाना एक घंटे की क्लास चलती थी। ‘सक्सेस बिल्डिंग प्रोग्राम’ के जरिये उन्हें लग्जरी जिंदगी और जल्द सफलता के सपने दिखाए जाते थे। पुलिस के मुताबिक इसी वजह से युवक-युवतियां लंबे समय तक ठगी का अहसास नहीं कर पाए।
तीन मंजिली इमारत में रह रहे थे युवक-युवतियां
जालसाजों ने राजगढ़ इलाके में तीन मंजिली इमारत किराये पर ले रखी थी। अलग-अलग मंजिलों पर युवक-युवतियों को रखा गया था। एक कमरे में चार से पांच लोग रहते थे। पुलिस के पहुंचने पर अधिकांश युवक-युवतियां हैरान रह गए। उन्हें बताया गया कि नौकरी के नाम पर उनके साथ ठगी की जा रही है।
पूछताछ में सामने आया कि पहले एंट्री फॉर्म के नाम पर 1100 रुपये लिए जाते थे। इसके बाद ट्रेनिंग के नाम पर रकम वसूलकर उन्हें नेटवर्क मार्केटिंग से जोड़ दिया जाता था। आलोक कुमार, लखन मेहता और मोहित युवाओं की क्लास लेते थे। उन्हें परिवार और परिचितों को भी नेटवर्क से जोड़ने के लिए कहा जाता था।
पुलिस के मुताबिक युवक-युवतियों को भरोसा था कि ट्रेनिंग पूरी करने के बाद उन्हें सरकारी नौकरी मिल जाएगी। उन्हें आसानी से बाहर जाने भी नहीं दिया जाता था। किसी के जाने की जिद करने पर लिखापढ़ी कराई जाती थी। तीन युवकों को धीरे-धीरे ठगी का अहसास हुआ और उन्होंने साइबर पुलिस को सूचना दी। इसी के बाद पुलिस ने कार्रवाई की।
कॉरपोरेट ऑफिस जैसा बनाया था ठिकाना
रेस्क्यू किए गए युवक-युवतियों ने पुलिस को बताया कि उन्हें करीब तीन महीने पहले सरकारी नौकरी के नाम पर झांसी बुलाया गया था। प्रेमनगर इलाके में कार्यालय को कॉरपोरेट कंपनी जैसा स्वरूप दिया गया था। इससे युवाओं में कंपनी के प्रति भरोसा पैदा किया जाता था। अधिकांश युवक राजस्थान के टोंक और आसपास के रहने वाले हैं। युवतियां प्रयागराज, वाराणसी और गाजीपुर की हैं। नौकरी की तलाश में पहुंचे इन युवाओं को कंपनी की सदस्यता, ट्रेनिंग और सफलता के नाम पर नेटवर्क मार्केटिंग से जोड़ा गया।
वाराणसी और लखनऊ से जुड़े गिरोह के तार
पुलिस के मुताबिक गिरोह के तार वाराणसी और लखनऊ में पकड़े गए जालसाजों से भी जुड़े हैं। वाराणसी में पकड़ी गई महादेव इंटरप्राइजेज से भी इनके संबंध सामने आए हैं। इसमें रॉयल हेल्थ इंडिया और रॉयल हेल्थ वेलनेस प्राइवेट लिमिटेड के नाम से भी नेटवर्क संचालित होने की जानकारी मिली है।
एसएसपी विकास कुमार के मुताबिक वाराणसी और लखनऊ में कार्रवाई के बाद गिरोह ने झांसी को नया ठिकाना बनाया था। यहां से मध्य प्रदेश और दूसरे राज्यों में नेटवर्क फैलाने की कोशिश की जा रही थी। गिरोह के फरार सरगना और अन्य सदस्यों की भूमिका की जांच की जा रही है।
दो दिन सुरागकशी के बाद दबिश
तीन युवकों की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने दो दिन तक इलाके में सुरागकशी की। शनिवार को दबिश से पहले पुलिसकर्मियों को इमारत की छत पर भी तैनात किया गया, ताकि कोई आरोपी भाग न सके। एहतियात के तौर पर फायर ब्रिगेड की टीम भी मौके पर बुला ली गई थी।
इस तरह से ठगी से बचने के लिए सतर्कता जरूरी
सीओ साइबर आसमा वकार का कहना है कि साइबर ठगी से बचने के लिए जागरूकता के साथ ही सतर्कता बरतनी भी जरूरी है। नौकरी के नाम पर अगर कोई प्रलोभन दे तब उससे सतर्क रहने के साथ ही इन बातों का भी ध्यान देना चाहिए-
-नौकरी के बदले पैसा मांगें तो तुरंत सतर्क हो जाएं।
-रजिस्ट्रेशन, सदस्यता, ट्रेनिंग या सिक्योरिटी के नाम पर पहले पैसे मांगने वाली नौकरी से दूरी बनाएं।
कंपनी की वैधता खुद जांचें : कंपनी का पंजीकरण, कार्यालय, वेबसाइट, नियुक्ति प्रक्रिया और आधिकारिक संपर्क नंबर स्वतंत्र रूप से सत्यापित करें। केवल कंपनी द्वारा दिए गए दस्तावेजों पर भरोसा न करें।
‘जल्दी अमीर बनने’ और लोगों को जोड़ने वाली योजना से बचें : नौकरी के बजाय परिवार और परिचितों को जोड़ने, सदस्य बनाने या कमीशन कमाने पर जोर दिया जा रहा हो तो यह बड़ा चेतावनी संकेत है।
बाहर जाने से रोकें तो तुरंत मदद लें : किसी ट्रेनिंग सेंटर या ऑफिस में मोबाइल, दस्तावेज या बाहर जाने की स्वतंत्रता पर रोक लगाई जा रही हो तो परिजनों और पुलिस को तत्काल सूचना दें।
ठगी का संदेह हो तो सबूत सुरक्षित रखें : व्हाट्सएप चैट, कॉल रिकॉर्ड, भुगतान की रसीद, बैंक विवरण, कंपनी के दस्तावेज और विज्ञापन सुरक्षित रखें और तुरंत शिकायत करें।
