खिलारा। बुंदेलखंड की प्राचीन लोकसंस्कृति नारे सुआटा आज भी ग्रामीण अंचलों में श्रद्धा और उत्साह से निभाई जा रही है। नवरात्र पर ग्राम खिलारा में युवतियां रंगोली बनाकर इस पुरानी परंपरा का निर्वहन कर रही हैं। यह परंपरा लोकगीतों, पारंपरिक रीति-रिवाजों और पूजा अर्चना से बुंदेली संस्कृति की अनूठी छटा दिखाती है। नारे सुआटा माता गौरा, पार्वती और शक्ति उपासना से जुड़ी आस्था का प्रतीक मानी जाती है। युवतियां पारंपरिक रंगोली बनाती हैं और लोकगीतों से अपनी सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रखती हैं। बुजुर्गों से सीखी गई यह परंपरा नई पीढ़ी तक पहुंच रही है। आधुनिकता के दौर में भी ग्रामीणों का लोकसंस्कृति के प्रति लगाव इसे कायम रखे हुए है। यह लोकपर्व बुंदेलखंड की सांस्कृतिक पहचान, आपसी मेलजोल और धार्मिक आस्था को बढ़ावा देता है। संवाद




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