झांसी। रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के सब्जी विभागाध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने बुंदेलखंड में खरीफ प्याज उत्पादन के लिए गठिया तकनीक अपनाने की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि जून-जुलाई की भारी वर्षा से प्याज की नर्सरी खराब होती है और पौध नहीं मिलती। गठिया तकनीक इस समस्या का सरल विकल्प है।
बरसात में 20-25 सेंटीमीटर ऊंची मेड़ों पर गठियों की रोपाई होती है। हल्की सिंचाई और फसल प्रबंधन के बाद इस तकनीक से लगभग 65-70 दिनों में गुणवत्तायुक्त प्याज की फसल मिल सकती है।
सब्जी विभागाध्यक्ष ने कहा कि भारी वर्षा के कारण जब सामान्य प्याज की नर्सरी प्रभावित होने की आशंका रहती है, तब गठिया तकनीक किसानों को खरीफ मौसम में भी प्याज उत्पादन का बेहतर विकल्प उपलब्ध कराती है। इससे प्याज का उत्पादन एवं उपलब्धता बढ़ाने के साथ किसानों की आमदनी में वृद्धि तथा उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में भी मदद मिल सकती है। इससे उत्पादन, उपलब्धता व आय बढ़ती है।
