झांसी। जिले में खरीफ फसलों पर बारिश का कहर टूटा है, जिससे किसानों की अच्छी पैदावार की उम्मीदें टूट गई हैं। एक जून से छह सितंबर तक 558.7 एमएम बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से कम थी, लेकिन लगातार वर्षा से खेत जलमग्न हो गए और कई फसलें सड़ गईं। इससे किसान कर्ज चुकाने और बच्चों के खर्च को लेकर चिंतित हैं।
किसानों ने मूंग, मूंगफली, धान, तिल और उड़द जैसी फसलें बोई थीं। जून-जुलाई में कम बारिश से फसल सूखने का डर था। हालांकि, अगस्त और सितंबर की लगातार बारिश ने धान और श्रीअन्न को संजीवनी दी। वहीं, तिल, मूंग और उड़द जैसी अन्य फसलों को भारी नुकसान पहुंचा। कई किसानों ने बैंक से किसान क्रेडिट कार्ड पर ऋण लेकर बोआई की थी। अब वे कर्ज चुकाने की चिंता में डूबे हैं।
खुर्द निवासी ओमप्रकाश ने बताया कि उन्होंने तिल और मूंगफली के लिए चार लाख रुपये का कर्ज लिया था। फसल बर्बाद होने के बाद उन्हें कर्ज चुकाने और गृहस्थी के काम निपटाने की चिंता सता रही है। दुरखुरू के प्रमोद ने भी 80 हजार रुपये का ऋण लेकर उड़द और मूंगफली बोई थी। अगस्त और सितंबर की बारिश से उनकी दोनों फसलें खराब हो गईं।
खेत पर उड़द की फसल को बोने के लिए 1.50 लाख का कर्जा लिया था। अच्छी पैदावार की संभावना थी पर बारिश से फसल खराब हो गई। इस नुकसान से बच्चों की फीस और जरूरी काम के साथ कर्ज कैसे चुकेगा इसको लेकर परेशान हैं।
– विद्याधर, खेरी
खेत पर तिल और उड़द की फसल कर्ज लेकर बोई थी। तिल तो अगस्त में हुई लगातार बारिश से बर्बाद हो गई थी। उड़द की फसल तब प्रभावित नहीं हुई थी लेकिन सितंबर में दोबारा से हुई बारिश ने उड़द की फसल को भी नुकसान पहुंचा दिया है।
-देशराज, वीरपुरा
मूंगफली के लिए करीब एक लाख का कर्ज और जमा पूंजी लगा दी थी। पहले बारिश से मूंगफली की खेती को फायदा पहुंचने को लेकर परिजन खुश थे, लेकिन बाद में लगातार बारिश से खेत जलमग्न हो गया। मकान का निर्माण होना था जो अब लटक गया।
-पहलवान, बिजौरा
खेत पर मूंगफली बोआई के लिए डेढ़ लाख का कर्ज बैंक से लिया था। इसके अलावा बैंक में जमा रकम भी खेती में लगा दी। बेटी की फीस भरनी थी फसल के नष्ट होने से बच्चों की शिक्षा के अलावा परिवार के भरण पोषण की चिंता परिजनों को सता रही है।
– मछला रानी, खेरी
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खरीफ की फसलों का रकबा
फसल रकबा
धान 59102
मक्का 1850
उड़द 90350
मूंग 8994
मूंगफली 215847
तिल 99096
(नोट : रकबा हेक्टेयर में)
