झांसी। मध्य प्रदेश और बुंदेलखंड क्षेत्र में लगातार हो रही भारी बारिश से बेतवा नदी उफान पर है। तेज बहाव के चलते शुक्रवार रात पारीछा बांध से दो लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इस मानसूनी सीजन में पहली बार इतनी बड़ी मात्रा में पानी छोड़ा गया है। इससे सुकुवां-ढुकुवां बांध पर भी दबाव बढ़ गया है।
बांधों से लगातार पानी छोड़े जाने को देखते हुए नदी के निचले इलाकों में अलर्ट जारी किया गया है। सिंचाई विभाग के अनुसार छोड़ा गया पानी करीब तीन दिन में यमुना के रास्ते प्रयागराज पहुंचने की संभावना है। वहीं, राजघाट बांध से भी भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण चंदेरी-ललितपुर मार्ग पर आवागमन रोक दिया गया है।
भोपाल, विदिशा समेत बेतवा के कैचमेंट क्षेत्र में लगातार बारिश से नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। बेतवा पर बने कई बांध अपनी क्षमता के करीब पहुंच चुके हैं। ऐसे में जलस्तर नियंत्रित करने के लिए इनसे लगातार पानी छोड़ा जा रहा है।
डाउनस्ट्रीम में स्थित पारीछा और सुकुवां-ढुकुवां बांध से शुक्रवार रात करीब दो लाख क्यूसेक की दर से पानी छोड़ा गया। वहीं, माताटीला बांध से 1.67 लाख क्यूसेक पानी छोड़ने के लिए 20 गेट खोले गए।
पानी की रफ्तार बढ़ने की संभावना
एक्सईएन पंकज सिंह के मुताबिक पारीछा बांध के 11 गेट छह फुट और नौ गेट आठ फुट की ऊंचाई तक खोले गए हैं। देर रात पानी की रफ्तार और बढ़ने की संभावना है। उधर, राजघाट बांध से शुक्रवार रात करीब 10 बजे 1.50 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इससे चंदेरी-ललितपुर मार्ग पर आवागमन रोक दिया गया।
इसके अलावा सहायक नदियों पर बने लहचूरा बांध से 87,900 क्यूसेक, पहाड़ी से 84,806 क्यूसेक और बड़वार से 200 क्यूसेक पानी छोड़ा गया।
सात दिन में 1.67 मीटर बढ़ा बेतवा का जलस्तर
बांधों से लगातार पानी छोड़े जाने के कारण बेतवा नदी का जलस्तर भी बढ़ रहा है। 28 अगस्त से शुक्रवार तक नदी के जलस्तर में 1.67 मीटर की वृद्धि दर्ज की गई। सिंचाई विभाग के आंकड़ों के अनुसार 28 अगस्त को नोटघाट में बेतवा का जलस्तर 193.97 मीटर था, जो शुक्रवार को बढ़कर 195.58 मीटर पहुंच गया। इस दौरान औसतन 23 सेंटीमीटर प्रतिदिन की दर से जलस्तर बढ़ा। हालांकि, नदी अभी खतरे के निशान से नीचे बह रही है। नोटघाट पर खतरे का निशान 205 मीटर है। बेतवा के साथ धसान और पहूज नदियों में भी जलस्तर बढ़ने से तेजी बनी हुई है।
