झांसी। कृष्ण जन्माष्टमी पर जब देश-दुनिया में कान्हा की भक्ति की गूंज सुनाई देगी, तब झांसी का एक पुराना भवन उस शख्स की कहानी भी सुनाएगा, जिसने कृष्ण भक्ति को दुनिया तक पहुंचाने का सपना यहीं देखा था। अक्तूबर 1952 में अभय चरण झांसी आए। भारती भवन में रहकर उन्होंने कृष्ण भक्ति के प्रचार का काम शुरू किया। यहीं भक्तों को संगठित किया। आगे चलकर यही अभय चरण श्रील प्रभुपाद के नाम से दुनिया में पहचाने गए और इस्कॉन के माध्यम से कृष्ण भक्ति को वैश्विक विस्तार मिला।

वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई की धरती से इस्कॉन के संस्थापक अभय चरण यानी श्रील प्रभुपाद का गहरा जुड़ाव रहा है। उन्होंने 16 मई 1953 को लीग ऑफ डिवोटीज यानी भक्त संघ के विचार को आकार दिया। उनका सपना था कि झांसी से शुरू हुआ यह अभियान आगे दुनिया तक पहुंचे। हालांकि भारती भवन को लेकर हुए विवाद के बाद उन्होंने यह कहते हुए झांसी छोड़ दिया कि मुकदमा नहीं लड़ना…।

210 रुपये लौटाए, चेक भी हुआ था बाउंस

‘झांसी : भक्तों का संघ’ पुस्तक में दर्ज विवरण के अनुसार, भारती भवन में रहने को लेकर विवाद के दौरान अभय चरण को 210 रुपये चेक के जरिये वापस कर दिए गए लेकिन चेक बाउंस हो गया। इसके बाद यह सवाल उठाया गया कि रकम लौटाए जाने के बाद अभय के पास भारती भवन में रहने का कोई न्यायसंगत औचित्य नहीं रह गया था।

पुस्तक में उल्लेख है कि इस स्थिति के बाद अभय चरण ने विचार किया कि जब वह अपना घर छोड़ चुके हैं तो अब न उन्हें मकान चाहिए और न मुकदमा लड़ना चाहिए। उन्होंने कानूनी विवाद में उलझने के बजाय भारती भवन छोड़ दिया और झांसी से चले गए।

‘प्रभुपाद कृष्ण भक्ति के प्रचार के लिए डॉ. शास्त्री के घर में रहे’

भारती भवन से जुड़े मौजूदा पक्ष की ओर से डॉ. नीति शास्त्री ने बताया कि प्रभुपाद कृष्ण भक्ति के प्रचार के लिए उनके घर में रहे थे। उनके पिता सुरेश चंद्र शास्त्री ने भी प्रभुपाद के कार्य में सहयोग किया था। उन्होंने बताया कि युवाओं को नशे से बचाने और उन्हें सही दिशा देने के उद्देश्य से 40 रुपये की मदद देकर उन्हें अमेरिका भेजा गया था।

डॉ. शास्त्री का कहना है कि भारती भवन की जमीन पर इस्कॉन की ओर से किया जाने वाला दावा सही नहीं है। उनके अनुसार यह जमीन राधाबाई स्मारक की केयरटेकर सरयूबाई ने महिला सहायक संघ को दान में दी थी। इसके लिखित दस्तावेज मौजूद है। वर्तमान में इसी भवन में उनके प्रबंधन में भगिनीमंडल की गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में भारती भवन में रचनात्मक गतिविधियों का और विस्तार करने का प्रयास किया जाएगा।

झांसी से निकला मिशन, दुनिया तक पहुंचा

भारती भवन के इतिहास, दस्तावेज और दावों की अपनी-अपनी व्याख्याएं हैं, लेकिन इतना तय है कि 1952-53 में यह भवन अभय चरण के झांसी प्रवास, भक्त संघ, कृष्ण संकीर्तन और पदयात्रा की शुरुआती गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र रहा और यह मिशन दुनिया तक पहुंचा।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

अभी अभी की खबरें