झांसी। राष्ट्रकवि डॉ. मैथिलीशरण गुप्त की साहित्यिक विरासत को सहेजने के लिए चिरगांव की राष्ट्रकवि बंधु हवेली में प्रस्तावित संग्रहालय बनने से पहले ही पारिवारिक विवाद में उलझ गया है। सरकार करीब पांच करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी दे चुकी है, लेकिन संग्रहालय के लिए दी गई 123.58 वर्गमीटर जमीन के दानपत्र की वैधता पर परिवार के ही एक सदस्य ने सवाल खड़े कर दिए हैं। उनका दावा है कि दान की गई संपत्ति के सभी सहखातेदारों की सहमति नहीं ली गई। मामले में सरकार, संस्कृति विभाग, संग्रहालय के अधिकारियों और राष्ट्रकवि के पौत्रों समेत सात लोगों को कानूनी नोटिस भेजा गया है।

दानपत्र में पूरी संपत्ति देने पर उठे सवाल

राष्ट्रकवि के दौहित्र प्रमोद कुमार गुप्त की ओर से भेजे गए कानूनी नोटिस में उपनिबंधक कार्यालय मोंठ में 17 दिसंबर 2025 को पंजीकृत दानपत्र की वैधता पर आपत्ति जताई गई है। नोटिस के मुताबिक संग्रहालय के लिए 123.58 वर्गमीटर जमीन का सशर्त दानपत्र सौरभ गुप्त और वैभव गुप्त ने किया है, लेकिन दोनों संबंधित संपत्ति के पूर्ण स्वामी नहीं हैं।

आरोप है कि संपत्ति में सौरभ और वैभव की मां शांति देवी तथा उनकी बहन भी सहखातेदार हैं। इसके बावजूद दानपत्र तैयार करते समय उनकी सहमति नहीं ली गई। नोटिस में दावा किया गया है कि ऐसे में दो लोगों की ओर से पूरी संपत्ति का दान किया जाना वैध नहीं है।

प्लॉट बताया, मौके पर बना है निर्माण

नोटिस में दानपत्र में संपत्ति का विवरण दर्ज करने के तरीके पर भी सवाल उठाए गए हैं। आपत्ति करने वाले पक्ष का कहना है कि दानपत्र में संपत्ति को प्लॉट के रूप में दर्शाया गया है, जबकि मौके पर हॉलनुमा कमरे और छत समेत निर्माण मौजूद है। इसके अलावा दानपत्र में दानकर्ता की ओर से केवल दो पुत्रों को दर्शाए जाने पर भी आपत्ति जताई गई है। नोटिस में कहा गया है कि संपत्ति पर अन्य वारिसों के अधिकार भी हैं, इसलिए उनकी सहमति के बिना दानपत्र किए जाने पर सवाल उठता है।

राष्ट्रकवि के पौत्रों को भी बनाया पक्षकार

मामले में उत्तर प्रदेश सरकार, संस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव, संग्रहालय निदेशक, उपनिदेशक संग्रहालय डॉ. मनोज कुमार के साथ डॉ. मैथिलीशरण गुप्त के पौत्र वैभव गुप्त और सौरभ गुप्त समेत सात लोगों को पक्षकार बनाया गया है। उधर, दानपत्र से जुड़े सौरभ गुप्त ने इसे पारिवारिक विवाद बताया है। उनका कहना है कि सभी पक्ष आपस में बैठकर मामले को सुलझा लेंगे। उनके मुताबिक यह कोई गंभीर विषय नहीं है।

अप्रकाशित रचनाओं और पत्रों को भी सहेजने की थी तैयारी

चिरगांव की राष्ट्रकवि बंधु हवेली में प्रस्तावित संग्रहालय का उद्देश्य राष्ट्रकवि डॉ. मैथिलीशरण गुप्त की स्मृतियों और साहित्यिक विरासत को सहेजना है। संग्रहालय में उनकी अप्रकाशित रचनाओं और लेखों को प्रदर्शित करने की योजना है। परिवार के पास सुरक्षित उनके हाथ से लिखे पत्रों को भी यहां रखा जाना प्रस्तावित है।

राज्य सरकार इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए करीब पांच करोड़ रुपये मंजूर कर चुकी है और पहली किस्त भी स्वीकृत की जा चुकी है। ऐसे में संग्रहालय के लिए दी गई जमीन के स्वामित्व और दानपत्र को लेकर विवाद खड़ा होने से परियोजना के आगे बढ़ने पर सवाल खड़े हो गए हैं।



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