झांसी। मऊरानीपुर थाना क्षेत्र के खुशीपुरा (रानीपुर) में आठ साल पहले एक महिला की हत्या के मामले में अदालत ने दोषी नरेश श्रीवास को उम्रकैद की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश (आवश्यक वस्तु अधिनियम) एडीजे शिवकुमार तिवारी की अदालत ने बुधवार को फैसला सुनाया। अदालत ने दोषी पर कुल 15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

अभियोजन के अनुसार, गुरसराय थाना क्षेत्र के चोकरी गांव निवासी नरेश श्रीवास की रिश्तेदारी खुशीपुरा (रानीपुर) में थी। कन्हैयालाल की शादीशुदा बेटी नीलम घटना के समय अपने मायके में रह रही थी। 2 सितंबर, 2018 को नरेश श्रीवास लोहे का गंडासा लेकर कन्हैयालाल के घर पहुंचा था।

शादीशुदा होने की वजह से नीलम ने किया था इन्कार

नरेश ने नीलम से अपने साथ पत्नी बनकर चलने को कहा था। नीलम पहले से शादीशुदा थी, इसलिए उसने नरेश के साथ जाने से इन्कार कर दिया। इस बात से नाराज होकर नरेश ने नीलम पर लोहे के गंडासे से हमला कर दिया। हमले में नीलम गंभीर रूप से घायल हो गई और मौके पर ही उसकी मौत हो गई। घटना के समय नीलम की बहन पूजा और भाई राहुल भी घर में मौजूद थे। नरेश ने उन दोनों पर भी हमला किया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। घटना के समय नीलम के पिता कन्हैयालाल मजदूरी करने घर से बाहर गए हुए थे।

घटना की जानकारी मिलने पर कन्हैयालाल ने पुलिस को तहरीर देकर प्राथमिकी दर्ज कराई। आरोप लगाया गया था कि नरेश श्रीवास गंडासा लेकर उनके घर पहुंचा था। वह नीलम को अपने साथ चलने के लिए दबाव बना रहा था। नीलम के इन्कार करने पर उसने उस पर हमला किया। बीच-बचाव करने पहुंचे पूजा और राहुल को भी उसने निशाना बनाया था। पुलिस ने तहरीर के आधार पर नरेश श्रीवास के खिलाफ हत्या और हत्या के प्रयास सहित संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया और विवेचना के दौरान साक्ष्य जुटाए। इसके बाद पुलिस ने आरोपपत्र अदालत में दाखिल किया और मामला न्यायालय में विचाराधीन रहा।

हत्या और हत्या के प्रयास में मिलीं सजाएं

अदालत में एडीजीसी देवेश श्रीवास्तव द्वारा पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर नरेश को दोषी पाया गया। बुधवार को विशेष न्यायाधीश (आवश्यक वस्तु अधिनियम) ने दोषी नरेश को दफा 302 में आजीवन कारावास की सजा सुनाई। उस पर दस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। साथ ही, हत्या के प्रयास की धारा में उसे सात साल की सजा सुनाई गई और पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।



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