झांसी। उपभोक्ता मामलों के विभाग की ओर से तैयार ई-जागृति पोर्टल साइबर ठगी से जुड़े मामलों के निराकरण में मील का पत्थर साबित हो रहा है। पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने के बाद मामले की सुनवाई उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में होती है और निराकरण से राहत मिल रही है।
साइबर ठगी मामलों की बात करें तो तीन साल में डेढ़ सौ से ज्यादा मामलों के पंजीयन हुए। इसमें ओटीपी के माध्यम से राशि निकालने, क्रेडिट कार्ड बनवाने के नाम पर ठगी के मामले सामने आए हैं। इनमें पीड़ित नेशनल साइबर क्राइम पेट्रोल के 1930 नंबर पर शिकायत तो करते ही हैं। उनका रुझान ई-जागृति पोर्टल पर भी बढ़ा है। आधा सैकड़ा से ज्यादा मामलों का निराकरण हुआ।
केस-1
उमेश अग्रवाल के साथ करीब 6.50 लाख रुपये की ठगी हो गई थी। इसकी शिकायत ई-जागृति पोर्टल पर की गई थी। पंजीयन के बाद जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में मामला आया था। इसमें बीएसएनल को दोषी पाया गया था। आयोग ने पूरी रकम वापस देने का आदेश दिया था।
केस-2
नटराज ऑटोमोबाइल से इलेक्ट्रिक कार की डीलरशिप के नाम पर 19 लाख से ज्यादा की ठगी हुई थी। मामले की शिकायत ई-जागृति पोर्टल के माध्यम से की गई थी। इसके बाद मामले की सुनवाई आयोग में हुई। बैंक को दोषी पाया गया था और उसे राशि वापस दिलाने का आदेश हुआ था।
ऑडियो वीडियो के माध्यम से की जा सकती है शिकायत
उपभोक्ता मामलों से जुड़े एडवोकेट गणेश खरे ने बताया कि साइबर ठगी से पीड़ित उपभोक्ता ई-जागृति पोर्टल के माध्यम से पंजीयन करा सकते हैं। फिर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में इसकी सुनवाई होती है। इस तरह के कई लोगों को राहत मिल चुकी है।
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ईजागृति पोर्टल के माध्यम से साइबर ठगी से जुड़े कई मामलों में पीड़ितों को राहत मिली है। उपभोक्ताओं को एपीके नाम की बेवसाइट पर क्लिक हीं करना चाहिए। किसी अनजान व्यक्ति के मांगे जाने पर ओटीपी न दें।
-अमरपाल सिंह, अध्यक्ष, उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, झांसी
