लखनऊ। बलरामपुर गार्डन में लगे 23वें राष्ट्रीय पुस्तक मेले में इस बार युवाओं की अच्छी खासी भीड़ दिख रही है। रविवार को यहां पहुंचे पाठकों में करीब 80 फीसदी युवा नजर आए। बात करने पर पता चला कि उनमें से ज्यादातर जेन-जी सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं और कंटेंट की तलाश उन्हें पुस्तक मेले तक खींच लाई है। इन युवाओं में कुछ को पुराने लेखकों की कालजयी कृतियों के साथ ही नए लेखकों की चर्चित किताबें खूब पसंद आ रही हैं।
मेले के आयोजक मनोज सिंह चंदेल ने भी इस बात की तस्दीक की और कहा कि जो लोग भी यह कहते हैं कि युवा साहित्य और किताबों से दूर होता जा रहा है, उन्हें इस बार पुस्तक मेले में आकर देखना चाहिए। उन्होंने बताया कि कंटेंट क्रिएटर हिंदी साहित्य, इतिहास, शायरी-कविता, खेल, कुकिंग, स्टॉक मार्केट, फिल्म समीक्षा, हास्य-व्यंग्य, राजनीति और जीवनी से जुड़ी किताबें तलाश रहे हैं। इससे उनमें पढ़ने की आदत भी बढ़ रही है।
लखनऊ विश्वविद्यालय की शालिनी, बीबीएयू की प्रियंका, रितेश, आरती और भाषा विश्वविद्यालय के आकाश, अनिल व सुरेश ने बताया कि वे सोशल मीडिया पर तथ्य आधारित सामग्री देना चाहते हैं। उनके मुताबिक इंटरनेट पर फेक जानकारी के बीच किताबें भरोसेमंद स्रोत हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय के बीटेक छात्र मयंक कुमार ने कहा कि किताब का संदर्भ देने से दर्शकों का भरोसा भी बढ़ता है।
इतिहास की पुष्टि के लिए किताबें जरूरी
पुस्तक मेले में मौजूद इतिहासकार रवि भट्ट ने कहा कि इतिहास की पुष्ट जानकारी के लिए किताबें पढ़ना बहुत जरूरी है क्योंकि सोशल मीडिया पर कई बार झूठी खबरें गलत संदेश का प्रचार करती हैं। ऐसे में युवा किताबें पढ़कर सोशल मीडिया के लिए कंटेेंट तैयार कर रहे हैं तो यह बहुत अच्छी बात है।

बलरामपुर गार्डन में आयोजित राष्ट्रीय पुस्तक मेले में पुस्तकों की खरीदारी करते लोग।
