लखनऊ। कभी शहर हो या गांव, अमीर हो या गरीब-रेडियो हर जगह लोगों की आवाज और मनोरंजन का साथी रहा है। शनिवार को बलरामपुर गार्डन में चल रहे राष्ट्रीय पुस्तक मेले में रेडियो के इसी सफर की कहानी किताब के पन्नों से मंच तक पहुंची। यहां संतोष वाल्मीकि की पुस्तक रेडियो कल और आज के अंग्रेजी संस्करण रेडियो पास्ट एंड प्रेजेंट का विमोचन किया गया। इस मौके पर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने रेडियो के व्यापक प्रभाव को रेखांकित किया।

वंदे मातरम की थीम पर चल रहे पुस्तक मेले में एक स्टॉल पर कई नई किताबें भी पाठकों के बीच चर्चा में हैं। इनमें योगेंद्र यादव की गणराज्य का स्वधर्म, कार्ल मार्क्स की संघर्षपूर्ण जीवन गाथा और क्रांति पर आधारित मैरी ग्रैबियल की हिंदी अनुवादित प्रेम और पूंजी शामिल हैं। ममता कालिया की संस्मरणात्मक पुस्तक शेषकथा और राजीव कुमार की जहांआरा पादशाही बेगम भी नए प्रकाशनों में शामिल हैं।

मीडिया के भरोसे पर हुई चर्चा

कार्यक्रम में मीडिया : सवाल भरोसे का विषय पर परिचर्चा हुई। इसमें एमएलसी लालजी प्रसाद निर्मल, असम से बैजनाथ बांसफोर, पूर्व उपमहानिदेशक दूरदर्शन डॉ. सतीश ग्रोवर, रेडियो आर्टिस्ट रज्जनलाल, दूरदर्शन कार्यक्रम प्रमुख आत्मप्रकाश मिश्र, वरिष्ठ पत्रकार बृजेश शुक्ल, आलोक जोशी, रमा अरुण रेनू चतुर्वेदी और आरजे प्रतीक ने विचार व्यक्त किए।

गजलों से सजी शाम

पुस्तक मेले की शाम लखनऊ के प्रसिद्ध शायर रामप्रकाश बेखुद के नाम रही। उनके साथ कृपाशंकर विश्वास, सरलता जमाल, बद्र गोरखपुरी, रचना मिश्रा और नवीन शुक्ल ने गजलें पढ़ीं। गजलों की सुरमयी प्रस्तुतियों ने मेले के साहित्यिक माहौल को और रंग दिया।

युवाओं को भा रहीं सेल्फ हेल्प किताबें

पुस्तक मेले में हर दिन युवाओं की भीड़ बढ़ रही है। एक स्टॉल के प्रभारी एमएम शर्मा ने बताया कि युवा सेल्फ हेल्प किताबें काफी पसंद कर रहे हैं। इनमें एटोमिक हैबिट्स, माइंडसेट, द पावर ऑफ नाओ और द साइकोलॉजी ऑफ मनी की मांग ज्यादा है। मोटिवेशनल किताबों में इकिगाई की मांग सबसे अधिक है।

तस्वीरों से सीख रहे बच्चे

एक अन्य स्टॉल पर बच्चों की उम्र के हिसाब से एक्टिविटी और कहानी की किताबें उपलब्ध हैं। स्टॉल की प्रभारी गरिमा ने बताया कि इनमें सोशल इमोशनल लर्निंग, विज्ञान और पर्यावरण से संबंधित किताबें शामिल हैं। बच्चों को सिर्फ लिखकर सिखाने के बजाय तस्वीरों के माध्यम से सीखने पर जोर दिया गया है, ताकि वे चीजों को लंबे समय तक याद रखें और किताबों से जुड़ाव महसूस करें।

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सेल्फ हेल्प की किताबों में युवा खोज रहे बदलाव का रास्ता

एटोमिक हैबिट्स से साइकोलॉजी ऑफ मनी तक, मोटिवेशनल किताबों की बढ़ी मांग

संवाद न्यूज एजेंसी-फोटो

लखनऊ। किताबों के मेले में इस बार युवाओं की पसंद सिर्फ कहानी और साहित्य तक सीमित नहीं है। वे अपनी आदतों, सोच और जीवन को बेहतर बनाने के रास्ते भी किताबों के पन्नों में तलाश रहे हैं। बलरामपुर गार्डन में चल रहे राष्ट्रीय पुस्तक मेले में हर दिन युवाओं की भीड़ बढ़ रही है। एक स्टॉल के प्रभारी के मुताबिक, युवाओं में सेल्फ हेल्प किताबों की मांग काफी ज्यादा है। एटोमिक हैबिट्स, माइंडसेट, द पावर ऑफ नाओ और द साइकोलॉजी ऑफ मनी जैसी किताबें पसंद की जा रही हैं। वहीं, मोटिवेशनल किताबों में इकिगाई की मांग सबसे ज्यादा है।

तस्वीरों से सीख रहे बच्चे

मेले में बच्चों के लिए भी उम्र के हिसाब से एक्टिविटी और कहानी की किताबें उपलब्ध हैं। एक अन्य स्टॉल की प्रभारी गरिमा ने बताया कि इनमें सोशल इमोशनल लर्निंग, विज्ञान और पर्यावरण से संबंधित किताबें शामिल हैं। बच्चों को सिर्फ लिखकर सिखाने के बजाय तस्वीरों के माध्यम से सीखने की कोशिश की गई है, ताकि वे चीजों को लंबे समय तक याद रखें और किताबों से जुड़ाव महसूस करें।

रेडियो के सफर से रूबरू हुए पाठक

मेले में साहित्य के साथ रेडियो और मीडिया की दुनिया भी चर्चा में रही। शनिवार को संतोष वाल्मीकि की पुस्तक रेडियो कल और आज के अंग्रेजी संस्करण रेडियो पास्ट एंड प्रेजेंट का विमोचन हुआ। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि रेडियो ऐसा माध्यम रहा है, जिसे अमीर-गरीब, शहर-गांव हर जगह सुना जाता रहा है।

वंदे मातरम की थीम पर चल रहे मेले में एक स्टॉल पर योगेंद्र यादव की गणराज्य का स्वधर्म, कार्ल मार्क्स की संघर्षपूर्ण जीवन गाथा और क्रांति पर आधारित मैरी ग्रैबियल की हिंदी अनुवादित प्रेम और पूंजी चर्चा में हैं। ममता कालिया की संस्मरणात्मक पुस्तक शेषकथा और राजीव कुमार की जहांआरा पादशाही बेगम भी नए प्रकाशनों में शामिल हैं।

मीडिया के भरोसे पर हुई परिचर्चा

कार्यक्रम में मीडिया : सवाल भरोसे का विषय पर परिचर्चा हुई। इसमें एमएलसी लालजी प्रसाद निर्मल, असम से बैजनाथ बांसफोर, पूर्व उपमहानिदेशक दूरदर्शन डॉ. सतीश ग्रोवर, रेडियो आर्टिस्ट रज्जनलाल, दूरदर्शन कार्यक्रम प्रमुख आत्मप्रकाश मिश्र, वरिष्ठ पत्रकार बृजेश शुक्ल, आलोक जोशी, रमा अरुण रेनू चतुर्वेदी और आरजे प्रतीक ने विचार व्यक्त किए।

गजलों से सजी साहित्यिक शाम

गजलों की शाम लखनऊ के प्रसिद्ध शायर रामप्रकाश बेखुद के नाम रही। उनके साथ कृपाशंकर विश्वास, सरलता जमाल, बद्र गोरखपुरी, रचना मिश्रा और नवीन शुक्ल ने गजलें पढ़ीं। साहित्य और सुरों से सजी शाम ने पुस्तक मेले के माहौल में एक अलग रंग भर दिया।

पुस्तक मेले में किताब का विमोचन करते उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक व अन्य

पुस्तक मेले में किताब का विमोचन करते उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक व अन्य



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