लखनऊ। निजी प्रैक्टिस के मामले में केजीएमयू के थोरेसिक सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. शैलेंद्र कुमार पर कड़ी कार्रवाई हुई है। विभागाध्यक्ष के पद से हटाने के साथ उनकी दो वार्षिक वेतन वृद्धि भी रोक दी गई है। केजीएमयू की कार्यपरिषद ने इस कार्रवाई का फैसला पहली अप्रैल को हुई बैठक में लिया था।
कुलसचिव ने दो सितंबर को आदेश जारी किया था। बृहस्पतिवार को यह आदेश केजीएमयू के डीन, सभी विभागाध्यक्षों और संबंधित अधिकारियों को भेज दिया गया। अब थोरेसिक सर्जरी विभाग की कमान डॉ. अनुराग राय को सौंप दी गई है।
सितंबर 2023 से चल रही है जांच
डॉ. शैलेंद्र पर निजी प्रैक्टिस के आरोप सितंबर 2023 में लगे थे। ठाकुरगंज स्थित निजी अस्पताल में एक मरीज की मौत हो गई थी। उसका इलाज डॉ. शैलेंद्र कर रहे थे। मरीज के परिजनों ने रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी। शिकायत के बाद केजीएमयू प्रशासन ने मामले की जांच कराई, जिसमें डॉ. शैलेंद्र दोषी पाए गए। नवंबर 2024 में जांच रिपोर्ट केजीएमयू की कार्यपरिषद के सामने रखी गई। परिषद ने आगे की कार्रवाई के लिए कुलपति को अधिकृत किया। इस वर्ष 28 जनवरी को उन्हें आरोप पत्र जारी कर 15 दिन में जवाब देने के लिए कहा गया।
डिप्टी रजिस्ट्रार ने दे दिया था इस्तीफा
केजीएमयू के डिप्टी रजिस्ट्रार व फिजियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. संदीप भट्टाचार्या पर 21 मई को निजी प्रैक्टिस के आरोप लगे थे। आईआईएम रोड निवासी एफबी सिंह ने उनके खिलाफ शिकायत की थी। मामला उत्तर प्रदेश मेडिकल काउंसिल और राजभवन तक भी पहुंचा। इसके बाद केजीएमयू प्रशासन ने जांच शुरू की। कुलपति के निर्देश पर पांच सदस्यीय जांच कमेटी बनाई गई। इसमें प्रतिकुलपति, डीन एकेडमिक्स, डीन पैरामेडिकल, चीफ प्रॉक्टर और फैकल्टी इंचार्ज लीगल सेल शामिल थे। कमेटी ने प्रोफेसर के बयान दर्ज किए। जांच के बीच डॉ. संदीप ने केजीएमयू के डिप्टी रजिस्ट्रार पद से इस्तीफा दे दिया था। प्रशासन ने इसे स्वीकार कर लिया।
