लखनऊ। बारिश की फुहारों के बीच जब कविताएं गूंजी और सुरों ने साथ दिया तो अवध की सांस्कृतिक विरासत का रंग और गहरा हो गया। हजरतगंज स्थित एक होटल में एक्सक्यूरेटर्स इवेंट्स की ओर से ‘बारिश-आर्ट, म्यूजिक, मानसून’ के लखनऊ अध्याय का आयोजन किया गया। कला, साहित्य और संगीत से सजी इस शाम में अस्करी नकवी, यतींद्र मिश्र और कुटले खान की मौजूदगी ने माहौल को खास बना दिया।

शाम की शुरुआत अस्करी नकवी की प्रस्तुति ‘मेघा रे’ से हुई। इसके बाद साहित्य, संगीत और सिनेमा की दुनिया को जोड़ते हुए प्रसिद्ध कवि यतींद्र मिश्र ने ‘कहानी गीतों की : बारिश एडिशन’ पेश किया। शब्दों और किस्सों की इस प्रस्तुति के बाद कुटले खान प्रोजेक्ट ने अपने संगीत से समां बांध दिया।

मंच की शुरुआत लोकप्रिय ‘केसरिया बालम’ से हुई। इसके बाद ‘झूले झूले लाल’, ‘छाप तिलक’, ‘सानू इक पल’, ‘घूमर’, ‘सजदा’ और ‘दम नाल दम’ जैसे गीतों ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। बारिश के मौसम में संगीत की इन प्रस्तुतियों ने शाम को अलग ही रंग दे दिया।

बारिश बाजार में दिखा हुनर का रंग

मंच से इतर ‘बारिश बाजार’ भी आकर्षण का केंद्र रहा। यहां डिजाइनरों, कारीगरों, लाइफस्टाइल ब्रांड्स और स्थानीय रचनाकारों ने अपनी कलात्मकता और हुनर को प्रस्तुत किया। चुनिंदा खानपान, पेय, सुगंधों और हस्तशिल्प ने भी लोगों का ध्यान खींचा। एक्सक्यूरेटर्स इवेंट्स के संस्थापक मिन्हाल हसन ने कहा कि ‘बारिश-आर्ट, म्यूजिक, मानसून’ का यह सीजन दिल्ली, जयपुर और लखनऊ में कला प्रेमियों के बीच संगीत, कला और संस्कृति से जुड़ी यादगार एवं भावपूर्ण अनुभूतियां साझा करने में खास रहा।

कार्यक्रम में काव्य पाठ करते यतींद्र मिश्रा और गायन करते अस्करी नकवी। 

कार्यक्रम में काव्य पाठ करते यतींद्र मिश्रा और गायन करते अस्करी नकवी। 



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