विभिन्न मुकदमों में शामिल जिले के टाॅप टेन अपराधी बिंडोला उर्फ बिंदादीन ने कार्रवाई से बचने के लिए खुद की हत्या की झूठी कहानी रची। इसके बाद वह लगातार अपराधों को अंजाम देता रहा। वर्ष 2018 में सिरसीकलां गांव में एक घर में डकैती की घटना में भी बिंडोला शामिल था जबकि वह स्वयं को मृतक घोषित करा चुका था। अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर प्रथम व विशेष न्यायाधीश दस्यु प्रभावित क्षेत्र अधिनियम ध्रुव राय ने आठ साल पुराने डकैती के मामले में शातिर अपराधी बिंडोला समेत पांच दोषियों को सात-सात वर्ष कारावास की सजा सुनाई है।
थाना खन्ना के सिरसीकलां निवासी कुलदीप मिश्रा ने पुलिस को तहरीर देकर बताया था कि 29 जनवरी 2018 की रात वह अपने भाई सौरभ, मां विमला व बुआ संता के साथ घर पर सो रहा था। तभी तीन से चार बदमाश मकान की दीवार फांदकर चढ़े और सीढि़यों के सहारे नीचे आ गए। बदमाश मां को पीटते हुए जेवरात आदि के बारे में पूछने लगे। रोने की आवाज सुनकर जब वह पहुंचा तो एक बदमाश ने उसे तमंचे से पीटा। घटना रात करीब 12.30 से डेढ़ बजे के बीच हुई। बदमाश उसके घर से सोने की जंजीर, झुमकी, अंगूठी, चांदी की पायल, 25 हजार की नकदी, मोबाइल आदि सामान ले गए। घटना के अगले दिन थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई। पुलिस की विवेचना के दौरान जगदीश व मुन्ना प्रजापति निवासी मवई बुजुर्ग बांदा, भूपेंद्र प्रजापति निवासी सिरसीकलां, छंगा उर्फ धनीराम निवासी लवकुशनगर छतरपुर और बिंडोला उर्फ बिंदादीन निवासी खन्ना के नाम सामने आए। चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया लेकिन बिंडोला का कुछ पता नहीं चल सका।
पुलिस ने गिरफ्तारी का प्रयास किया लेकिन वह नहीं मिला। न्यायालय से उसके खिलाफ वारंट भी जारी हुआ था। बिंडोला थाना खन्ना का हिस्ट्रीशीटर था। जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि वर्ष 2015 में बिंडोला ने स्वयं की हत्या की साजिश रची थी और वह अपराध कर रहा था। 16 मई 2015 को बिंडोला के बड़े भाई हरिदास ने मौदहा हमीरपुर में भगवानदीन आदि के खिलाफ बिंडोला की हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। आरोपी ने वहां मिले एक शव को जला दिया था और बिंडोला नाम के पहचान पत्र भी फेंक दिए थे लेकिन उसके जीवित होने के कई साक्ष्य मिले और उसे भगोड़ा घोषित कर कुर्की की कार्रवाई गई। शासन ने उस पर 25 हजार का ईनाम घोषित किया था। बाद में पुलिस ने आरोपी को कस्बा खन्ना जाने वाली पुलिया से गिरफ्तार किया। न्यायालय ने फैसला सुनाते हुए पांचों दोषियों को सात-सात वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। साथ ही दस-दस हजार रुपये का जुर्माना लगाया। अर्थदंड अदा न करने पर छह-छह माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी। शातिर अपराधी बिंडोला के हाजिर न होने पर न्यायालय ने अलग से दो साल के कारावास की सजा सुनाई।
