Muzaffarnagar के तुगलपुर कम्हेड़ा स्थित काऊ सेंचुरी में गौवंश संरक्षण और डेयरी विकास को नई दिशा देने वाला बड़ा अभियान शुरू हो गया है। यहां निराश्रित गौवंश की नस्ल सुधार योजना के तहत कृत्रिम गर्भाधान तकनीक के माध्यम से उन्नत नस्ल के बछड़ों और बछियों का जन्म हुआ है, जिसे पशुपालन और डेयरी क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री Sanjeev Balyan ने गौवर्धन गौ सेवा समिति के सदस्यों के साथ काऊ सेंचुरी का दौरा किया और पूरे प्रोजेक्ट की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि यह अभियान केवल गौवंश संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य भविष्य में दुग्ध उत्पादन बढ़ाना और काऊ सेंचुरी को आत्मनिर्भर बनाना भी है।
थार पारकर और गिर नस्ल के बछड़ों का जन्म, कृत्रिम गर्भाधान तकनीक से मिली सफलता
काऊ सेंचुरी में कृत्रिम गर्भाधान के माध्यम से थार पारकर नस्ल के दो बछड़े और गिर नस्ल की दो बछियों का जन्म हुआ है। इनका नाम हीरा, मोती, पद्मणि और नंदिनी रखा गया है। इन नवजात पशुओं को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग उत्सुक नजर आए।
डॉ. संजीव बालियान ने बताया कि भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान और नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के सहयोग से यह कार्यक्रम चलाया जा रहा है। उन्नत नस्ल के सांडों और गायों के सीमन का उपयोग कर निराश्रित गौवंश में नस्ल सुधार का कार्य किया जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार गिर और थार पारकर जैसी नस्लें अधिक दूध उत्पादन और बेहतर स्वास्थ्य के लिए जानी जाती हैं। इस तकनीक से भविष्य में दूध उत्पादन क्षमता को कई गुना तक बढ़ाने की संभावना जताई जा रही है।
भविष्य में प्रतिदिन 20 से 25 लीटर दूध देने की संभावना
डॉ. संजीव बालियान ने जानकारी देते हुए कहा कि जो बछियां इस नस्ल सुधार कार्यक्रम के तहत पैदा हुई हैं, उनसे भविष्य में प्रतिदिन 20 से 25 लीटर तक दूध उत्पादन होने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में देसी नस्लों के संरक्षण और उन्नत डेयरी उत्पादन दोनों को संतुलित करना बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए यह कार्यक्रम शुरू किया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह मॉडल सफल रहता है, तो भविष्य में प्रदेश के अन्य जिलों में भी इसे लागू किया जा सकता है। इससे पशुपालकों की आय बढ़ाने और दुग्ध उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने में मदद मिलेगी।
500 गौवंशीय पशुओं को योजना में शामिल करने की तैयारी
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने बताया कि नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड द्वारा हरित प्रदेश सहकारी समिति को इस योजना के लिए मान्यता दी गई है। शुरुआती चरण में 500 गौवंशीय पशुओं को नस्ल सुधार कार्यक्रम में शामिल किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि अब तक 161 पशुओं में कृत्रिम गर्भाधान की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। प्रत्येक पशु पर लगभग 25 हजार रुपये का खर्च आ रहा है।
काऊ सेंचुरी में मौजूद निराश्रित बछियों का चयन कर उन्हें उन्नत नस्ल के सीमन के जरिए गर्भाधान कराया जा रहा है, जिससे आने वाली पीढ़ियों में बेहतर नस्ल तैयार की जा सके।
काऊ सेंचुरी को आत्मनिर्भर बनाने की योजना, गैस प्लांट और साइलेज मशीन पर फोकस
काऊ सेंचुरी को केवल गौशाला नहीं बल्कि एक आत्मनिर्भर मॉडल के रूप में विकसित करने की तैयारी भी चल रही है। डॉ. बालियान ने बताया कि परिसर में गैस प्लांट लगाने की योजना पर काम किया जा रहा है।
हालांकि प्रदेश सरकार से अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं मिलने के कारण यह परियोजना फिलहाल रुकी हुई है। गैस प्लांट शुरू होने के बाद गोबर से ऊर्जा उत्पादन किया जा सकेगा, जिससे सेंचुरी के खर्चों को कम करने में मदद मिलेगी।
इसके अलावा परिसर में हरे चारे से साइलेज तैयार करने की मशीन भी स्थापित की गई है। इससे भविष्य में पशुओं के लिए हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी और गर्मी या सूखे के मौसम में चारे की समस्या काफी हद तक समाप्त हो सकती है।
काऊ सेंचुरी में बनेगा आधुनिक ट्रेनिंग सेंटर
डॉ. संजीव बालियान ने यह भी बताया कि काऊ सेंचुरी परिसर में नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड द्वारा एक आधुनिक ट्रेनिंग सेंटर तैयार किया जा रहा है। यहां “मैत्री” नाम से जाने जाने वाले पशु मित्रों को तीन महीने का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
प्रशिक्षण पूरा करने के बाद प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र दिया जाएगा, जिसके बाद वे ग्रामीण क्षेत्रों में पशुओं की प्राथमिक चिकित्सा और देखभाल के लिए अधिकृत होंगे।
इस प्रोजेक्ट पर लगभग 14 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं और अगले तीन महीनों में इसके शुरू होने की संभावना जताई गई है।
छात्रावास और आवासीय सुविधा भी होगी उपलब्ध
ट्रेनिंग सेंटर में प्रशिक्षण लेने वाले लगभग 80 लोगों के लिए छात्रावास की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही प्रशिक्षकों और शिक्षकों के लिए आवासीय व्यवस्था भी विकसित की जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में पशु चिकित्सा सेवाओं को मजबूती मिलेगी और पशुपालकों को समय पर सहायता मिल सकेगी।
पशुपालन और डेयरी क्षेत्र में नया मॉडल बनने की तैयारी
तुगलपुर कम्हेड़ा स्थित काऊ सेंचुरी में चल रहा यह प्रोजेक्ट अब केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं माना जा रहा है। डेयरी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह मॉडल सफल रहा तो इसे प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों में भी लागू किया जा सकता है।
गौवंश संरक्षण, उन्नत नस्ल, डेयरी उत्पादन और ग्रामीण रोजगार को एक साथ जोड़ने की यह पहल आने वाले समय में पशुपालन क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है।
कार्यक्रम में कई गणमान्य लोग रहे मौजूद
इस अवसर पर गोवर्धन गौ सेवा समिति के संरक्षक और समाजसेवी भीमसैन कंसल, समिति सचिव विपुल भटनागर, डॉ. शुभम मलिक तथा गन्ना समिति चेयरमैन शंकर सिंह भोला सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
सभी ने इस परियोजना को मुजफ्फरनगर के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए भविष्य में इसके सकारात्मक परिणाम आने की उम्मीद जताई।
मुजफ्फरनगर की तुगलपुर कम्हेड़ा काऊ सेंचुरी में शुरू हुआ नस्ल सुधार कार्यक्रम पशुपालन और डेयरी विकास की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। उन्नत नस्ल के बछड़ों का जन्म, आधुनिक ट्रेनिंग सेंटर की तैयारी और आत्मनिर्भर मॉडल विकसित करने की योजना ने इस परियोजना को खास बना दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह पहल सफल रहती है, तो आने वाले वर्षों में यह मॉडल ग्रामीण अर्थव्यवस्था और डेयरी सेक्टर के लिए नई संभावनाएं पैदा कर सकता है।
