Muzaffarnagar शहर के बीचों-बीच स्थित ऐतिहासिक झांसी की रानी पार्क इन दिनों बदहाली और अव्यवस्थाओं का शिकार बना हुआ है। कभी शहरवासियों के लिए सुकून, हरियाली और परिवार के साथ समय बिताने का प्रमुख केंद्र माना जाने वाला यह पार्क अब गंदगी, शराबखोरी और असामाजिक गतिविधियों के कारण चर्चा में है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर पालिका प्रशासन की लापरवाही के चलते पार्क की हालत लगातार खराब होती जा रही है। जिस पार्क में सुबह-शाम बुजुर्ग टहलने, बच्चे खेलने और परिवार समय बिताने पहुंचते थे, वहां अब शराब की खाली बोतलें, रैपर और कूड़े के ढेर नजर आने लगे हैं।
शाम ढलते ही शुरू हो जाता है शराबियों का जमावड़ा
स्थानीय निवासियों के मुताबिक जैसे ही शाम होती है, पार्क में असामाजिक तत्वों की आवाजाही बढ़ने लगती है। आरोप है कि कई लोग खुलेआम पार्क के अंदर बैठकर शराब पीते हैं और देर रात तक वहां हुड़दंग मचाते हैं।
पार्क के कोनों, झाड़ियों और बेंचों के आसपास बड़ी मात्रा में शराब की खाली बोतलें, डिस्पोजल ग्लास और रैपर पड़े दिखाई देते हैं। लोगों का कहना है कि अब परिवार और महिलाएं यहां आने से कतराने लगी हैं।
कुछ स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि कई बार शिकायत करने के बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। शाम के समय पार्क का माहौल पूरी तरह असुरक्षित महसूस होने लगा है।
गंदगी और बदबू से लोगों का जीना मुश्किल
झांसी की रानी पार्क की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि कई जगहों पर कूड़े के ढेर जमा हैं। इनसे उठने वाली बदबू के कारण लोगों का वहां रुकना मुश्किल हो गया है।
पार्क के भीतर सफाई व्यवस्था लगभग ध्वस्त दिखाई देती है। जगह-जगह प्लास्टिक कचरा, खाने-पीने का सामान और गंदगी फैली हुई है। कई स्थानों पर घास और झाड़ियां भी अनियंत्रित तरीके से बढ़ चुकी हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नगर पालिका की ओर से नियमित सफाई और निगरानी नहीं होने के कारण पार्क धीरे-धीरे असामाजिक गतिविधियों का केंद्र बनता जा रहा है।
बच्चों के खेलने की जगह भी नहीं सुरक्षित
सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि पार्क में बच्चों के खेलने वाले क्षेत्र के आसपास भी गंदगी फैली हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि टूटी बोतलें और कचरा बच्चों के लिए खतरा बन सकते हैं।
कई अभिभावकों ने बताया कि अब वे अपने बच्चों को पार्क में खेलने के लिए भेजने से डरते हैं। उन्हें आशंका है कि गंदगी और असामाजिक तत्वों की मौजूदगी बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सार्वजनिक पार्कों की खराब स्थिति बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास पर भी असर डालती है।
नगर पालिका के स्वच्छता दावों पर उठे सवाल
झांसी की रानी पार्क की मौजूदा स्थिति ने नगर पालिका के स्वच्छता अभियान और रखरखाव के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर के प्रमुख पार्कों में शामिल होने के बावजूद इसकी हालत लगातार खराब होती जा रही है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नगर पालिका द्वारा समय-समय पर स्वच्छता और सौंदर्यीकरण के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही दिखाई देती है।
लोगों का कहना है कि अगर शहर के सबसे प्रमुख पार्क की यह स्थिति है, तो बाकी सार्वजनिक स्थलों का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठे सवाल
पार्क में शराबियों और असामाजिक तत्वों की बढ़ती मौजूदगी ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पार्क में पर्याप्त निगरानी नहीं है और शाम के समय पुलिस गश्त भी बेहद कम दिखाई देती है।
महिलाओं और बुजुर्गों ने कहा कि असामाजिक तत्वों की वजह से अब वे पार्क में अकेले जाने से बचते हैं। कई लोगों ने पार्क में सीसीटीवी कैमरे और सुरक्षा गार्ड तैनात करने की मांग की है।
ऐतिहासिक पहचान पर लग रहा दाग
झांसी की रानी पार्क केवल एक सामान्य पार्क नहीं बल्कि शहर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा माना जाता है। वर्षों से यह पार्क शहरवासियों के लिए सामाजिक और पारिवारिक गतिविधियों का केंद्र रहा है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस ऐतिहासिक स्थल की दुर्दशा पूरे शहर की छवि को प्रभावित कर रही है। लोगों ने मांग की है कि पार्क का सौंदर्यीकरण कर इसे फिर से परिवारों और बच्चों के लिए सुरक्षित बनाया जाए।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से की कार्रवाई की मांग
निवासियों ने नगर पालिका प्रशासन से तत्काल सफाई अभियान चलाने, असामाजिक तत्वों पर कार्रवाई करने और पार्क में नियमित निगरानी बढ़ाने की मांग की है।
लोगों का कहना है कि अगर समय रहते स्थिति नहीं सुधारी गई तो यह पार्क पूरी तरह अपराध और अव्यवस्था का केंद्र बन सकता है।
कई सामाजिक संगठनों ने भी प्रशासन से पार्क की सुरक्षा और स्वच्छता को प्राथमिकता देने की अपील की है।
क्या अब टूटेगी नगर पालिका की नींद?
झांसी की रानी पार्क की बदहाल स्थिति को लेकर अब शहर में चर्चा तेज हो गई है। लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि खबर सामने आने के बाद नगर पालिका प्रशासन कोई ठोस कदम उठाता है या नहीं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि केवल बयान और योजनाएं नहीं, बल्कि जमीन पर काम दिखाई देना चाहिए। उनका मानना है कि शहर के सार्वजनिक स्थलों की हालत सुधारना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
मुजफ्फरनगर का ऐतिहासिक झांसी की रानी पार्क आज जिस बदहाली से गुजर रहा है, उसने नगर पालिका की व्यवस्थाओं और स्वच्छता दावों की पोल खोल दी है। गंदगी, शराबखोरी और असामाजिक गतिविधियों के बीच यह पार्क अपनी पहचान खोता नजर आ रहा है। अब शहरवासियों की उम्मीद प्रशासन से है कि वह जल्द ठोस कार्रवाई कर इस ऐतिहासिक पार्क को फिर से सुरक्षित, स्वच्छ और परिवारों के लिए उपयुक्त बनाए।
