Muzaffarnagar में जानसठ क्षेत्र से किसानों की चिंता बढ़ाने वाली चोरी की बड़ी घटना सामने आई है। जानसठ थाना क्षेत्र के हाजीपुर और निठारी गांवों के जंगल में बीती रात बेखौफ बदमाशों ने एक के बाद एक करीब आधा दर्जन यानी छह किसानों के नलकूपों को निशाना बनाया। चोर नलकूपों के कमरों के ताले तोड़कर विद्युत मोटर और स्टार्टर चोरी कर ले गए।
वारदात का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि बदमाश केवल मोटर चोरी करके नहीं भागे। उन्होंने खेतों में ही चोरी की गई मोटरों को खोल डाला और उनके भीतर से कीमती तांबे के तार निकाल लिए। इसके बाद मोटरों की लोहे की खाली बॉडी को वहीं खेतों में छोड़कर फरार हो गए।
सुबह जब किसान अपने खेतों पर पहुंचे और नलकूपों के कमरे खुले तथा ताले टूटे देखे, तो उनके होश उड़ गए। खेतों में मोटरों की खाली बॉडी और बिखरा सामान देखकर ग्रामीणों को रात में हुई चोरी का पता चला।
एक ही रात में छह नलकूपों को निशाना बनाए जाने से इलाके में हड़कंप मच गया है।
एक रात, छह नलकूप और किसानों को हजारों का नुकसान
जानसठ क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में किसानों की खेती काफी हद तक नलकूपों पर निर्भर रहती है। खेतों की सिंचाई के लिए विद्युत मोटर और स्टार्टर बेहद महत्वपूर्ण उपकरण हैं।
ऐसे में एक साथ छह नलकूपों से मोटर और स्टार्टर चोरी होने से प्रभावित किसानों के सामने केवल आर्थिक नुकसान का सवाल नहीं है, बल्कि खेती की सिंचाई भी प्रभावित होने की चिंता खड़ी हो गई है।
बदमाशों ने जिस तरीके से वारदात को अंजाम दिया, उससे यह भी संकेत मिलता है कि उन्हें नलकूपों और मोटरों के बारे में जानकारी थी। खेत में ही मोटर खोलकर तांबे के तार निकालना बताता है कि चोरी करने वाले सामान के उपयोगी हिस्से को अलग करने की तैयारी के साथ पहुंचे थे।
हाजीपुर के किसानों के नलकूप बने बदमाशों का निशाना
मिली जानकारी के अनुसार चोरी की घटनाओं में हाजीपुर निवासी दीपचंद पुत्र बालेसर प्रधान, रामकुमार पुत्र बाबू और दिनेश पुत्र बुद्ध के नलकूप शामिल हैं।
इसके अलावा निठारी गांव के नरेश पुत्र छोटे के नलकूप को भी बदमाशों ने निशाना बनाया। दो अन्य किसानों के नलकूपों से भी चोरी की जानकारी सामने आई है।
इस तरह एक ही रात में करीब छह नलकूपों पर लगातार चोरी की घटना ने ग्रामीणों को चिंता में डाल दिया है।
ताले तोड़े, कमरे में घुसे और मोटर उखाड़ ले गए
बदमाशों ने नलकूपों के कमरों के ताले तोड़कर अंदर प्रवेश किया।
नलकूपों के कमरों में लगी विद्युत मोटर और स्टार्टर को निशाना बनाया गया। चोरी के बाद बदमाश मोटरों को खेतों में ही ले गए और वहीं उन्हें खोलकर उनके अंदर मौजूद तांबे के तार निकाल लिए।
तांबे के तार निकालने के बाद लोहे की मोटर बॉडी को खेत में ही छोड़ दिया गया।
सुबह खेतों में पहुंचने वाले किसानों ने जब यह दृश्य देखा तो पूरे इलाके में चोरी की घटना की जानकारी फैल गई।
मोटर की बॉडी खेत में, तांबा लेकर भागे चोर
इस वारदात का तरीका सामान्य चोरी से अलग दिखाई देता है।
चोरों ने मोटरों के उन हिस्सों को अपने साथ नहीं ले गए जिनका कबाड़ के रूप में मूल्य अपेक्षाकृत कम हो सकता है। उन्होंने मोटरों को मौके पर खोलकर उनमें से कीमती तांबे के तार अलग किए और खाली बॉडी वहीं छोड़ दी।
इससे किसानों को यह भी अंदाजा हुआ कि बदमाश संभवतः तांबे और धातु के सामान को निशाना बनाने के इरादे से आए थे।
ग्रामीणों के लिए यह स्थिति इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि खेतों में बने नलकूप अक्सर आबादी से दूर होते हैं और रात में वहां निगरानी सीमित रहती है।
सुबह खेत पहुंचे किसानों के उड़ गए होश
मंगलवार सुबह जब किसान अपने खेतों में पहुंचे तो उन्हें नलकूपों के कमरों के ताले टूटे मिले।
अंदर जाकर देखा तो विद्युत मोटर और स्टार्टर गायब थे। आसपास नजर दौड़ाने पर खेतों में मोटरों की खाली बॉडी और बिखरा सामान दिखाई दिया।
एक के बाद एक कई नलकूपों पर चोरी का पता चलने के बाद किसानों और ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया।
ग्रामीणों का कहना है कि एक ही रात में इतने नलकूपों को निशाना बनाए जाने से साफ है कि बदमाश इलाके में सक्रिय हैं।
किसानों में पुलिस के प्रति बढ़ा आक्रोश
लगातार नलकूपों पर चोरी की घटना से किसानों में पुलिस व्यवस्था को लेकर नाराजगी है।
ग्रामीणों का कहना है कि खेतों में बने नलकूप रात के समय अपेक्षाकृत सुनसान स्थानों पर होते हैं। ऐसे में वहां चोरी रोकने के लिए पुलिस गश्त और निगरानी महत्वपूर्ण हो जाती है।
किसानों की चिंता सिर्फ चोरी तक सीमित नहीं है। नलकूप की मोटर चोरी होने के बाद उसे दोबारा लगवाने में खर्च आता है और तब तक खेतों की सिंचाई भी प्रभावित हो सकती है।
एक ही रात में छह किसानों के साथ हुई घटना ने इस चिंता को और बढ़ा दिया है।
सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस
घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची।
पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और वारदात से जुड़े संभावित साक्ष्य जुटाने का प्रयास किया।
नलकूपों के टूटे ताले, मोटरों की खाली बॉडी और घटनास्थल के आसपास की स्थिति को पुलिस जांच का हिस्सा बना रही है।
पुलिस ने मामले में जांच शुरू कर दी है।
पुलिस बोली- जल्द पकड़े जाएंगे चोर
पुलिस का कहना है कि मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है और आरोपियों को जल्द गिरफ्तार करने का प्रयास किया जा रहा है।
घटना में शामिल बदमाशों की पहचान और उनके संभावित ठिकानों का पता लगाने के लिए जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
हालांकि, चोरी की वारदात को किस गिरोह ने अंजाम दिया और बदमाश कितने लोग थे, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
क्या किसी गिरोह की सक्रियता का संकेत है?
एक ही रात में छह नलकूपों को निशाना बनाया जाना सामान्य चोरी से अलग दिखाई देता है। लगातार कई स्थानों पर वारदात को अंजाम देने के लिए बदमाशों को क्षेत्र की जानकारी और नलकूपों की स्थिति का अंदाजा होना जरूरी हो सकता है।
हालांकि यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि इसके पीछे कोई संगठित गिरोह ही है। पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सभी घटनाएं एक ही समूह ने कीं या अलग-अलग चोरियों का संबंध किसी दूसरे नेटवर्क से है।
फिलहाल पुलिस के सामने घटनाओं को जोड़कर देखने और आरोपियों तक पहुंचने की चुनौती है।
किसानों के लिए नलकूप सिर्फ मशीन नहीं, खेती की जीवनरेखा
किसान के लिए नलकूप की मोटर केवल एक विद्युत उपकरण नहीं होती। यह खेतों की सिंचाई व्यवस्था का अहम हिस्सा है।
समय पर पानी न मिलने से फसल प्रभावित हो सकती है। विशेष रूप से जब मौसम और फसल की जरूरत के अनुसार सिंचाई जरूरी हो, तब मोटर चोरी होने से किसान की परेशानी बढ़ जाती है।
मोटर, स्टार्टर और विद्युत उपकरण दोबारा लगवाने का खर्च भी किसान पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल सकता है।
इसलिए नलकूप चोरी की घटनाओं का असर केवल चोरी हुए सामान के मूल्य तक सीमित नहीं रहता।
तांबे के तारों पर क्यों रहती है चोरों की नजर?
बिजली के उपकरणों में इस्तेमाल होने वाले तांबे का बाजार मूल्य होने के कारण कई जगहों पर चोर ऐसे सामान को निशाना बनाते हैं।
नलकूपों की मोटरों में भी तांबे की वायरिंग होती है। इस मामले में बदमाशों ने मोटर की बॉडी को खेत में छोड़कर अंदर से तांबे के तार निकाल लिए।
यह तरीका चोरी किए गए सामान को तेजी से अलग कर ले जाने और अपेक्षाकृत अधिक मूल्य वाले हिस्से को साथ ले जाने की कोशिश की ओर संकेत करता है।
हालांकि चोरी के पीछे वास्तविक उद्देश्य और आगे चोरी किए गए तांबे का क्या किया गया, यह पुलिस जांच का विषय होगा।
ग्रामीण इलाकों में रात की सुरक्षा फिर सवालों में
हाजीपुर और निठारी के जंगलों में हुई इस घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में रात की सुरक्षा को लेकर पुराने सवाल फिर खड़े कर दिए हैं।
गांव से बाहर खेतों में बने नलकूपों पर किसान हर समय मौजूद नहीं रह सकते। ऐसे में रात के समय पुलिस गश्त और ग्रामीण निगरानी व्यवस्था महत्वपूर्ण हो जाती है।
ग्रामीणों को आशंका है कि यदि समय रहते ऐसे मामलों पर अंकुश नहीं लगाया गया तो बदमाश अन्य किसानों के नलकूपों को भी निशाना बना सकते हैं।
एक साथ कई वारदातों ने बढ़ाई चिंता
छह नलकूपों पर एक साथ चोरी होने का अर्थ है कि नुकसान कई परिवारों तक पहुंचा है।
यदि अलग-अलग किसानों के नलकूपों से मोटर और स्टार्टर चोरी हुए हैं, तो हर किसान को अपनी सिंचाई व्यवस्था दोबारा खड़ी करनी होगी।
ग्रामीणों के मुताबिक, पुलिस को केवल इस घटना का खुलासा ही नहीं करना चाहिए, बल्कि रात के समय खेतों में गश्त भी बढ़ानी चाहिए ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
किसानों की मांग- खेतों में बढ़े गश्त
ग्रामीणों की सबसे बड़ी मांग पुलिस गश्त बढ़ाने की है।
खेतों में बने नलकूपों को अक्सर रात के समय सुनसान माना जाता है। यदि पुलिस नियमित अंतराल पर ऐसे क्षेत्रों में गश्त करे तो संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा सकती है।
इसके साथ ही किसानों के बीच आपसी निगरानी और आसपास के नलकूपों पर नजर रखने की व्यवस्था भी बनाई जा सकती है।
हालांकि सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल किसानों की नहीं हो सकती। ग्रामीण क्षेत्रों में प्रभावी पुलिसिंग भी जरूरी है।
चोरी के बाद खेती पर भी पड़ेगा असर
मोटर और स्टार्टर चोरी होने से किसान को सबसे पहले आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है, लेकिन समस्या यहीं खत्म नहीं होती।
नलकूप बंद होने से खेतों में पानी पहुंचाना मुश्किल हो सकता है। किसान को नई मोटर लगवाने या अस्थायी व्यवस्था करने में समय और पैसा दोनों लग सकते हैं।
यदि इसी दौरान फसल को सिंचाई की जरूरत हो तो नुकसान और बढ़ सकता है।
यही वजह है कि किसानों के लिए ऐसी चोरी की घटनाएं बेहद गंभीर होती हैं।
पुलिस जांच से खुल सकते हैं कई सवाल
अब जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि बदमाश घटनास्थल तक कैसे पहुंचे, उन्होंने किन नलकूपों को चुना, चोरी का सामान किस रास्ते से ले गए और क्या सभी वारदातों के बीच कोई समान कड़ी मौजूद है।
इसके अलावा आसपास के क्षेत्रों में पहले हुई नलकूप मोटर चोरी की घटनाओं से भी इस मामले की कड़ी जोड़ी जा सकती है।
यदि पुलिस किसी संदिग्ध समूह तक पहुंचती है तो इलाके में हुई अन्य समान चोरियों का भी खुलासा होने की संभावना बन सकती है।
ग्रामीणों में दहशत से ज्यादा गुस्सा
घटना के बाद ग्रामीणों में चिंता जरूर है, लेकिन इसके साथ पुलिस के प्रति आक्रोश भी दिखाई दे रहा है।
किसानों का मानना है कि यदि खेतों में नलकूप सुरक्षित नहीं रहेंगे तो रात में चोरी रोकना मुश्किल होगा।
ग्रामीणों को उम्मीद है कि पुलिस जल्द आरोपियों को गिरफ्तार करेगी और चोरी हुए सामान की बरामदगी भी करेगी।
अब निगाह पुलिस के खुलासे पर
हाजीपुर और निठारी के जंगल में हुई छह नलकूपों की चोरी ने जानसठ क्षेत्र में किसानों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
पुलिस ने मौके का निरीक्षण कर जांच शुरू कर दी है और जल्द आरोपियों की गिरफ्तारी का दावा किया है।
अब देखना होगा कि पुलिस इस वारदात को कितनी जल्दी सुलझाती है और क्या इस चोरी के पीछे सक्रिय किसी गिरोह या समूह का पता चलता है।
फिलहाल किसानों के सामने अपनी सिंचाई व्यवस्था को दोबारा दुरुस्त करने की चुनौती है, जबकि ग्रामीणों की नजर पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।
