Muzaffarnagar। पटेलनगर में आयोजित 51वें श्रीरामलीला मंचन महोत्सव के दसवें दिन रामायण के दो महत्वपूर्ण प्रसंगों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। श्री आदर्श रामलीला भवन सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित रामलीला में रविवार को रावण-अंगद संवाद और शक्ति लीला का प्रभावशाली मंचन किया गया। कलाकारों ने रामचरितमानस के लंकाकांड के प्रसंगों को पारंपरिक शैली में प्रस्तुत करते हुए धर्म, शौर्य, सत्य और मर्यादा का संदेश दिया।
रामलीला के दौरान एक ओर अंगद ने लंकापति रावण को उसके अहंकार और अधर्म के परिणामों से सचेत किया, वहीं दूसरी ओर मेघनाद के शक्ति बाण से लक्ष्मण के मूर्छित होने का मार्मिक प्रसंग प्रस्तुत किया गया। कलाकारों की संवाद अदायगी, भावपूर्ण अभिनय और पारंपरिक मंचन ने दर्शकों को रामायण की घटनाओं से जोड़ दिया।
दीप प्रज्ज्वलन और श्रीगणेश वंदना के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
श्री आदर्श रामलीला भवन सेवा समिति की ओर से पटेलनगर में चल रहे रामलीला महोत्सव के दसवें दिन कार्यक्रम का शुभारंभ विधिवत पूजा-अर्चना के साथ किया गया। मुख्य अतिथियों ने भगवान श्रीगणेश की वंदना की तथा श्रीरामचरितमानस और सिया-राम की आरती के पश्चात संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित किया। इसके बाद रामलीला मंचन की शुरुआत हुई।
कार्यक्रम में प्रमुख उद्यमी सतीश चन्द गोयल (टिहरी स्टील), नरेन्द्र गोयल (दुर्गा इस्पात), शशांक मित्तल (अग्रवाल स्टील), सीए शीतल जैन (अध्यक्ष, सीए एसोसिएशन), अमरकांत गुप्ता एडवोकेट, धर्मेन्द्र पंवार नीटू (वरिष्ठ सपा नेता), विशाल गर्ग (जिला महामंत्री, भाजपा), रजनीश मुंजाल (एलजी सर्विस सेंटर), सुरेन्द्र वर्मा (वर्मा ज्वैलर्स), रविन्द्र कुमार जैन, निशांत कुमार (टीवी कलाकार) और रजनी मिश्रा (कवयित्री) सहित अन्य अतिथि मौजूद रहे।
अंगद ने रावण की सभा में पहुंचकर दिया श्रीराम का संदेश
रामलीला के पहले प्रमुख प्रसंग में राम-रावण युद्ध से पहले की घटनाओं को मंच पर उतारा गया। कथा के अनुसार, भगवान श्रीराम ने वानरराज सुग्रीव के वीर सेनापति अंगद को दूत बनाकर लंका भेजा था। अंगद का उद्देश्य रावण को अंतिम बार समझाना और माता सीता को सम्मानपूर्वक वापस लौटाने का संदेश देना था।
रावण की राजसभा में पहुंचकर अंगद ने निर्भीकता के साथ भगवान श्रीराम का संदेश सुनाया। उन्होंने रावण को उसके अहंकार और अधर्म के रास्ते से लौटने की चेतावनी दी तथा श्रीराम की शरण में आने का संदेश दिया। लेकिन अपने अभिमान में डूबा रावण सत्य को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हुआ।
कलाकारों ने अंगद के ओजपूर्ण संवादों और रावण के अहंकारपूर्ण व्यवहार को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। सभा में अंगद के दृढ़ वचनों और उनके पैर जमाने के प्रसंग का भी सजीव चित्रण किया गया। अंगद की निर्भीकता, प्रभु श्रीराम के प्रति उनकी अटूट निष्ठा और धर्म के पक्ष में अडिग रहने की भावना मंचन का मुख्य आकर्षण रही।
अंगद-रावण संवाद ने दिया अहंकार छोड़ने का संदेश
अंगद और रावण के बीच संवाद केवल दो पात्रों के बीच का टकराव नहीं, बल्कि सत्य और अहंकार के संघर्ष का प्रतीक है। रामचरितमानस के इस प्रसंग में अंगद रावण को समझाने का प्रयास करते हैं कि शक्ति और वैभव के बावजूद अधर्म का रास्ता विनाश की ओर ले जाता है। दूसरी ओर, रावण अपने अभिमान के कारण सही बात को मानने से इनकार करता है।
रामलीला में इस प्रसंग को कलाकारों ने जिस अंदाज में प्रस्तुत किया, उससे दर्शकों के सामने धर्म और मर्यादा के महत्व का संदेश उभरा। संवादों के दौरान दर्शक कथा में डूबे नजर आए और कलाकारों के अभिनय को सराहा। मंचन ने यह भाव भी सामने रखा कि किसी व्यक्ति की वास्तविक महानता उसके पद या शक्ति से नहीं, बल्कि उसके आचरण, विवेक और सत्य के प्रति सम्मान से तय होती है।
मेघनाद के शक्ति बाण से मूर्छित हुए लक्ष्मण
अंगद-रावण संवाद के बाद शक्ति लीला का मंचन किया गया। इस प्रसंग में लंका के युद्ध के दौरान मेघनाद द्वारा चलाए गए शक्ति बाण से लक्ष्मण के मूर्छित होने की घटना दिखाई गई। रामायण का यह प्रसंग युद्ध की गंभीरता, वीरता और अपने कर्तव्य के प्रति समर्पण को दर्शाता है।
कलाकारों ने युद्ध के वातावरण, पात्रों की भावनाओं और घटनाक्रम को पारंपरिक रामलीला शैली में प्रस्तुत किया। लक्ष्मण के मूर्छित होने का दृश्य भावनात्मक रहा, जबकि मेघनाद के पराक्रम और युद्ध के घटनाक्रम ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। प्रभावशाली संवादों और अभिनय ने मंचन को जीवंत बनाया।
शक्ति लीला के माध्यम से रामायण के उस दौर को प्रस्तुत किया गया, जब धर्म की रक्षा के लिए संघर्ष निर्णायक मोड़ पर पहुंच रहा था। इस प्रसंग में वीरता के साथ-साथ त्याग, कर्तव्य और अपने प्रियजनों के प्रति समर्पण की भावना भी दिखाई दी।
धर्म, सत्य और मर्यादा का संदेश दे रही रामलीला
कार्यक्रम संयोजक विकल्प जैन ने बताया कि रामलीला के माध्यम से दर्शकों तक यह संदेश पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है कि अहंकार और अधर्म का मार्ग अंततः विनाश की ओर ले जाता है, जबकि सत्य, धर्म और मर्यादा का पालन मनुष्य को श्रेष्ठ बनाता है। रामायण के प्रसंग आज भी समाज को नैतिकता, कर्तव्य और सही रास्ते पर चलने की प्रेरणा देते हैं।
रामलीला केवल धार्मिक कथा का मंचन नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके माध्यम से नई पीढ़ी को रामायण के पात्रों, आदर्शों और जीवन मूल्यों से परिचित होने का अवसर मिलता है। पटेलनगर में आयोजित महोत्सव भी इसी परंपरा को आगे बढ़ा रहा है, जिसमें कलाकारों की मेहनत और समिति के सदस्यों का सहयोग महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
आयोजन में समिति के सदस्यों और कलाकारों का रहा सहयोग
रामलीला महोत्सव के आयोजन, व्यवस्था और मंचन में मुख्य प्रबंधक अनिल ऐरन, कार्यक्रम संयोजक विकल्प जैन, जितेन्द्र कुच्छल, सुरेन्द्र मंगल, विजय मित्तल, प्रमोद गुप्ता, पंकज शर्मा, पीयूष शर्मा, नारायण ऐरन, विजय गुप्ता, मुकेश गोयल, मनीष कपूर, राकेश बंसल, जितेन्द्र नामदेव, राजेश मित्तल, भगवती, तनिष्क भारद्वाज, डीके जैन, गौरव मित्तल, अनिल लोहिया, अंशुल गुप्ता, ऋषभ जैन, अमर चौधरी, प्रदीप बॉबी, विपिन जैन, हरिओम मास्टर, आकाश गोयल, सोनू सिंह, विपुल मोहन, यश गर्ग, प्रियांशु, पंकज शर्मा, शिवांश ठाकुर, कृष्णा नामदेव, स्पर्श गर्ग और विवेक सिंघल सहित अन्य लोगों की उपस्थिति रही।
समिति के सदस्यों और कलाकारों के सहयोग से रामलीला के विभिन्न प्रसंगों का मंचन किया जा रहा है। आयोजन के माध्यम से धार्मिक आस्था के साथ स्थानीय सांस्कृतिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल रहा है।
परंपरा और संस्कृति से जुड़ रहे दर्शक
पटेलनगर में चल रहा 51वां श्रीरामलीला मंचन महोत्सव धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का संगम बना हुआ है। रामायण के परिचित प्रसंगों को मंच पर देखकर दर्शकों को कथा के मूल संदेशों को समझने का अवसर मिलता है। अंगद की निर्भीकता, रावण का अभिमान और लक्ष्मण के मूर्छित होने जैसे प्रसंग नाटकीय प्रभाव के साथ-साथ जीवन मूल्यों पर विचार करने का अवसर भी देते हैं।
मुजफ्फरनगर के पटेलनगर में 51वें श्रीरामलीला महोत्सव के दसवें दिन अंगद-रावण संवाद और शक्ति लीला के मंचन ने दर्शकों को रामायण के महत्वपूर्ण प्रसंगों से जोड़ा। कलाकारों ने अपने अभिनय के माध्यम से संदेश दिया कि अहंकार और अधर्म से विनाश का रास्ता खुलता है, जबकि सत्य, धर्म और मर्यादा का पालन जीवन को सही दिशा देता है।
