Muzaffarnagar पुलिस ने नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ चलाए जा रहे “ऑपरेशन सवेरा” अभियान के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रतिबंधित नशीली दवाइयों की तस्करी करने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। थाना खालापार पुलिस ने तीन शातिर आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से करीब एक करोड़ रुपये कीमत के 11 लाख 66 हजार 400 नशीले कैप्सूल बरामद किए हैं।

इस कार्रवाई ने पूरे जिले में हड़कंप मचा दिया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 54 कार्टून में भरे “स्पासमोर” कंपनी के प्रतिबंधित कैप्सूल, एक हयुंडई एक्सटर कार और अन्य सामान बरामद किया है। पुलिस का कहना है कि यह गिरोह लंबे समय से प्रतिबंधित दवाइयों की तस्करी कर मोटा मुनाफा कमा रहा था।


‘ऑपरेशन सवेरा’ के तहत चल रहा था विशेष अभियान

सहारनपुर रेंज के पुलिस उपमहानिरीक्षक द्वारा पूरे परिक्षेत्र में मादक पदार्थों और प्रतिबंधित दवाइयों की तस्करी पर रोक लगाने के लिए “ऑपरेशन सवेरा – नशे के अंधकार से जीवन के उजाले की ओर” अभियान चलाया जा रहा है।

इसी अभियान के तहत वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा के निर्देशन, पुलिस अधीक्षक नगर अमृत जैन और सहायक पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ के. मिश्रा के पर्यवेक्षण में थाना खालापार पुलिस लगातार संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रख रही थी।

थाना प्रभारी बबलू सिंह वर्मा के नेतृत्व में पुलिस टीम ने यह बड़ी सफलता हासिल की।


वाहन चेकिंग के दौरान पकड़ी गई नशीली दवाइयों की खेप

पुलिस के अनुसार थाना खालापार क्षेत्र में गहरा बाग वाले रास्ते पर संदिग्ध वाहनों और व्यक्तियों की चेकिंग की जा रही थी। इसी दौरान एक संदिग्ध कार आती दिखाई दी, जिसे पुलिस ने रोक लिया।

कार में दो व्यक्ति सवार थे और उसमें दो गत्ते के कार्टून रखे हुए थे। जब पुलिस ने कार्टूनों के बारे में पूछताछ की तो दोनों युवक घबरा गए। सख्ती से पूछताछ करने पर उन्होंने स्वीकार किया कि कार्टूनों में ट्रामाडोल हाईड्रोक्लोराइड और डाइक्लोमाइन हाईड्रोक्लोराइड से बने “स्पासमोर” कंपनी के कैप्सूल हैं, जिनका इस्तेमाल नशे के रूप में किया जाता है।


पहले से वांछित था एक आरोपी

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अश्वनी शर्मा निवासी जैननगर खतौली और विनोद कुमार निवासी दयालपुरम खतौली के रूप में हुई। पुलिस जांच में सामने आया कि अश्वनी शर्मा पहले से ही एनडीपीएस एक्ट के एक मामले में वांछित चल रहा था।

इसके बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों से गहन पूछताछ की, जिसमें पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ।


फर्जी फर्म बनाकर मंगाई जाती थीं प्रतिबंधित दवाइयां

पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उन्होंने “आरएस इंटरप्राइजेज” नाम से एक फर्म रजिस्टर्ड कर रखी थी। आरोप है कि यह फर्म दूसरे व्यक्ति सागर के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर बनाई गई थी।

आरोपियों ने बताया कि इसी फर्म के नाम पर बिल तैयार कर गोरखपुर निवासी शशांक नामक व्यक्ति से ट्रांसपोर्ट के माध्यम से नशीली दवाइयों की खेप मंगाई जाती थी।

इसके बाद मांग के अनुसार अलग-अलग स्थानों पर सप्लाई कर भारी मुनाफा कमाया जाता था। पुलिस का मानना है कि यह नेटवर्क कई जिलों तक फैला हो सकता है।


खंडहरनुमा गोदाम में छिपा रखा था करोड़ों का माल

गिरफ्तार आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस टीम अतिरिक्त बल के साथ सुजडू गांव के पास स्थित एक खंडहरनुमा गोदाम तक पहुंची। वहां पुलिस ने छापेमारी की तो एक व्यक्ति पुलिस को देखकर भागने लगा।

घेराबंदी कर उसे भी पकड़ लिया गया। उसकी पहचान यशपाल ग्रोवर निवासी गांधी कॉलोनी नई मंडी, मुजफ्फरनगर के रूप में हुई।

गोदाम में तिरपाल से ढके हुए 52 गत्ते के कार्टून मिले। जब पुलिस ने उन्हें खोलकर देखा तो उनमें बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित नशीले कैप्सूल भरे हुए थे।

पहले कार से बरामद दो कार्टूनों को मिलाकर कुल 54 कार्टून नशीली दवाइयों के बरामद किए गए।


11 लाख से ज्यादा कैप्सूल बरामद, कीमत करीब एक करोड़ रुपये

पुलिस के मुताबिक कुल 11 लाख 66 हजार 400 नशीले कैप्सूल बरामद किए गए हैं, जिनकी अनुमानित कीमत करीब एक करोड़ रुपये बताई जा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रामाडोल जैसी दवाइयों का दुरुपयोग युवाओं में तेजी से बढ़ रहा है। प्रतिबंधित होने के बावजूद इनकी अवैध सप्लाई कई राज्यों में चिंता का विषय बनी हुई है।


गिरोह का नेटवर्क खंगालने में जुटी पुलिस

पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है। आरोपियों के मोबाइल फोन, बैंक ट्रांजैक्शन, ट्रांसपोर्ट रिकॉर्ड और सप्लाई चैन की जानकारी जुटाई जा रही है।

पुलिस का मानना है कि इस गिरोह से जुड़े कई अन्य लोग भी सामने आ सकते हैं। साथ ही गोरखपुर कनेक्शन की भी जांच तेज कर दी गई है।

अधिकारियों का कहना है कि नशे के कारोबार में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।


युवाओं में बढ़ते नशे को लेकर चिंता

विशेषज्ञों का कहना है कि प्रतिबंधित दवाइयों का नशे के रूप में इस्तेमाल युवाओं के स्वास्थ्य और समाज दोनों के लिए बेहद खतरनाक है।

ट्रामाडोल जैसे कैप्सूल मेडिकल उपयोग के लिए बनाए जाते हैं, लेकिन गलत तरीके से इस्तेमाल होने पर यह गंभीर लत और स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकते हैं।

यही वजह है कि पुलिस और प्रशासन नशीली दवाइयों की अवैध सप्लाई पर लगातार कार्रवाई कर रहे हैं।


पुलिस टीम को मिला 25 हजार रुपये का इनाम

इस सराहनीय कार्रवाई के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा द्वारा पुलिस टीम को 25 हजार रुपये के पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

इस अभियान में थाना प्रभारी बबलू सिंह वर्मा, उपनिरीक्षक असगर अली, गजेंद्र चाहर, हेड कांस्टेबल जितेंद्र कुमार, शिवओम भाटी, यश कुमार, अनिल कुमार, मनेन्द्र कुमार, गवेन्द्र सिंह और राहुल कुमार की महत्वपूर्ण भूमिका रही।


मुजफ्फरनगर में “ऑपरेशन सवेरा” के तहत हुई यह कार्रवाई नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ पुलिस की बड़ी सफलता मानी जा रही है। करोड़ों रुपये की प्रतिबंधित नशीली दवाइयों की बरामदगी ने यह साफ कर दिया है कि तस्करों का नेटवर्क कितना संगठित और व्यापक हो चुका है। पुलिस अब पूरे गिरोह और उससे जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने की कोशिश में जुटी हुई है, ताकि युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाया जा सके।

 



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

अभी अभी की खबरें