Muzaffarnagar उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत रामपुर तिराहा स्थित उत्तराखंड शहीद स्मारक पहुंचे। उन्होंने उत्तराखंड राज्य आंदोलन के शहीदों को पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और इसके बाद केंद्र तथा उत्तर प्रदेश सरकार की नीतियों को लेकर कई सवाल उठाए।
रामपुर तिराहा पहुंचने पर स्थानीय कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने हरीश रावत का स्वागत किया। इसके बाद उन्होंने शहीद स्मारक स्थल पर पहुंचकर आंदोलनकारियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। स्मारक स्थल पर बातचीत के दौरान उन्होंने किसानों की आर्थिक स्थिति, गन्ने और मक्के के इस्तेमाल, चीनी की कीमतों, एथेनॉल, बेरोजगारी और महंगाई जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।
हरीश रावत ने आरोप लगाया कि सरकार किसानों की फसलों का इस्तेमाल चीनी और एथेनॉल जैसे क्षेत्रों में कर रही है, लेकिन किसानों को उनकी उपज का पर्याप्त आर्थिक लाभ नहीं मिल रहा। उन्होंने मांग रखी कि गन्ने और मक्के से होने वाली आर्थिक गतिविधियों में किसानों को बोनस के रूप में अतिरिक्त लाभ दिया जाना चाहिए।
उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में सामने आई है जब पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गन्ने के मूल्य और किसान हितों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। हाल ही में मुजफ्फरनगर में भारतीय किसान यूनियन की महापंचायत में भी गन्ने के लिए 500 रुपये प्रति क्विंटल की मांग सहित कई किसान मुद्दे उठाए गए थे।
रामपुर तिराहा शहीद स्मारक पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत
नई दिल्ली से देहरादून जाते समय हरीश रावत मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहा पहुंचे। यह स्थान उत्तराखंड राज्य आंदोलन की स्मृतियों से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थल है। यहां स्थित शहीद स्मारक पर उन्होंने आंदोलनकारियों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
स्थानीय कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। इसके बाद शहीद स्मारक स्थल पर उन्होंने राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर बातचीत की। स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ चर्चा के दौरान उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश से जुड़े विभिन्न राजनीतिक विषयों पर भी विचार-विमर्श हुआ।
हरीश रावत ने इस दौरान किसानों और आम जनता से जुड़े मुद्दों को अपने संबोधन का प्रमुख हिस्सा बनाया। उन्होंने कहा कि सरकारों को जनता की आर्थिक परेशानियों और किसानों की आय से जुड़े सवालों पर ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
चीनी और एथेनॉल को लेकर हरीश रावत ने सरकार से पूछे सवाल
हरीश रावत ने कहा कि चीनी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है और दूसरी ओर पेट्रोल में एथेनॉल का इस्तेमाल बढ़ रहा है। उनके आरोप के मुताबिक गन्ने और मक्के जैसे कृषि उत्पादों का इस्तेमाल इन क्षेत्रों में किया जा रहा है, लेकिन इससे किसानों को उनकी फसल का अपेक्षित आर्थिक लाभ नहीं मिल रहा।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसानों की उपज से चीनी और एथेनॉल आधारित अर्थव्यवस्था को फायदा मिल रहा है तो किसानों को भी इस आर्थिक गतिविधि में अतिरिक्त हिस्सेदारी मिलनी चाहिए।
इसी आधार पर उन्होंने सरकार से गन्ना और मक्का किसानों के लिए बोनस देने की मांग की। उनके मुताबिक किसानों को केवल निर्धारित फसल मूल्य तक सीमित रखने के बजाय ऐसे प्रावधानों पर विचार होना चाहिए, जिससे उत्पादन और उससे जुड़े उद्योगों से होने वाले लाभ में किसानों की हिस्सेदारी बढ़ सके।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ये हरीश रावत द्वारा सरकार की नीतियों को लेकर लगाए गए राजनीतिक आरोप और उनके द्वारा रखी गई मांगें हैं। इन्हें सरकारी नीति या स्थापित तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि उनके बयान के रूप में देखा जाना चाहिए।
गन्ना किसानों के लिए बोनस की मांग क्यों बनी चर्चा का विषय
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गन्ना ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मुजफ्फरनगर और आसपास के जिलों में बड़ी संख्या में किसान गन्ने की खेती से जुड़े हैं और चीनी मिलों से संबंधित भुगतान तथा गन्ने के मूल्य का मुद्दा लगातार राजनीतिक चर्चा में रहता है।
हाल के दिनों में मुजफ्फरनगर में किसानों से जुड़े कई कार्यक्रमों में गन्ने के मूल्य और भुगतान का मुद्दा सामने आया है। 17 सितंबर को हुई भारतीय किसान यूनियन की महापंचायत में किसानों ने नए पेराई सत्र के लिए 500 रुपये प्रति क्विंटल गन्ना मूल्य की मांग उठाई थी।
वहीं, 18 सितंबर की एक रिपोर्ट में भाकियू नेता नरेश टिकैत की ओर से भी सरकार से गन्ने का मूल्य घोषित करने की मांग का उल्लेख किया गया।
ऐसे माहौल में हरीश रावत की बोनस संबंधी मांग ने किसान और गन्ना अर्थव्यवस्था से जुड़े राजनीतिक विमर्श को एक और दिशा दी है।
एथेनॉल का मुद्दा किसानों से कैसे जुड़ता है
एथेनॉल उत्पादन में कृषि उत्पादों का इस्तेमाल होने के कारण इसकी नीति का संबंध किसानों और कृषि बाजार से भी जुड़ता है। गन्ना चीनी उद्योग के साथ-साथ एथेनॉल उत्पादन के लिए भी महत्वपूर्ण कच्चा माल है। मक्का भी एथेनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल होने वाली प्रमुख कृषि फसलों में शामिल है।
हरीश रावत ने इसी कड़ी को किसानों की आर्थिक हिस्सेदारी के सवाल से जोड़ते हुए कहा कि यदि कृषि उत्पादों से जुड़े उद्योगों का विस्तार हो रहा है तो किसानों को भी उसका अतिरिक्त आर्थिक लाभ मिलना चाहिए।
उनकी मांग का केंद्र यही है कि किसान केवल कच्चा माल उपलब्ध कराने वाला पक्ष न रहे, बल्कि उससे बनने वाले अतिरिक्त आर्थिक मूल्य का कुछ लाभ उसे भी मिले।
गन्ना मूल्य को लेकर पश्चिमी यूपी में लगातार सक्रियता
गन्ने के मूल्य को लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसान संगठनों की सक्रियता नई नहीं है। इस क्षेत्र में गन्ना किसानों का भुगतान, राज्य परामर्शित मूल्य, चीनी मिलों की स्थिति और पेराई सत्र से जुड़े मुद्दे लंबे समय से राजनीतिक चर्चा में रहते हैं।
सितंबर 2026 में मुजफ्फरनगर में हुई किसान महापंचायत में भी गन्ने का मूल्य 500 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग प्रमुखता से उठाई गई थी। किसानों ने इसके साथ फसलों के लिए एमएसपी की कानूनी गारंटी, सरकारी खरीद व्यवस्था, बिजली, खाद, कृषि ऋण और अन्य ग्रामीण समस्याओं को भी उठाया।
इस पृष्ठभूमि में हरीश रावत का बयान क्षेत्र के मौजूदा किसान विमर्श से जुड़ता दिखाई देता है।
किसानों को उचित दाम के साथ बोनस देने की मांग
हरीश रावत ने कहा कि किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिलना चाहिए। उन्होंने केवल फसल के निर्धारित मूल्य की बात नहीं की, बल्कि गन्ने और मक्के के इस्तेमाल से पैदा होने वाले अतिरिक्त आर्थिक लाभ में किसानों को बोनस दिए जाने की मांग की।
कृषि क्षेत्र में किसी भी अतिरिक्त भुगतान या बोनस व्यवस्था का स्वरूप सरकार की नीति, उद्योग की आर्थिक स्थिति और संबंधित क्षेत्र के नियमों पर निर्भर करता है। हरीश रावत ने अपने राजनीतिक बयान में इस दिशा में सरकार से पहल की मांग की।
उनके मुताबिक किसानों की आय और आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए सरकारों को केवल घोषणाओं के बजाय ठोस आर्थिक व्यवस्था बनानी चाहिए।
बेरोजगारी को लेकर भी सरकार पर हमला
हरीश रावत ने किसानों के अलावा बेरोजगारी के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा शासन में बेरोजगारी चरम पर पहुंच गई है।
उन्होंने कहा कि देश के युवा रोजगार और आर्थिक अवसरों को लेकर परेशान हैं। उनके बयान में बेरोजगारी को किसानों की आर्थिक स्थिति और आम जनता की परेशानियों के साथ जोड़कर प्रस्तुत किया गया।
उन्होंने सरकारों से रोजगार के अवसर बढ़ाने और युवाओं की आर्थिक स्थिति सुधारने की दिशा में प्रभावी कदम उठाने की मांग की।
महंगाई पर भी हरीश रावत ने साधा निशाना
पूर्व मुख्यमंत्री ने बढ़ती महंगाई को लेकर भी सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि आम जनता पर महंगाई का दबाव बढ़ रहा है और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना कठिन होता जा रहा है।
हरीश रावत ने कहा कि सरकारों को राजनीतिक नारों और दावों से आगे बढ़कर आम आदमी की आर्थिक समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए।
महंगाई और बेरोजगारी को लेकर उनका बयान कांग्रेस की ओर से लगातार उठाए जाने वाले आर्थिक मुद्दों के अनुरूप रहा। उन्होंने किसानों और आम जनता के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।
‘जुमलेबाजी छोड़कर ठोस कदम उठाएं सरकारें’
हरीश रावत ने सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि अब केवल जुमलेबाजी से काम नहीं चलेगा। उन्होंने किसानों और आम जनता के हित में ठोस नीतिगत कदम उठाने की जरूरत बताई।
उनके मुताबिक किसानों की फसल का उचित मूल्य, युवाओं के लिए रोजगार और आम जनता के लिए महंगाई से राहत जैसे मुद्दों पर सरकार को जवाबदेही के साथ काम करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि किसान देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और उसकी आर्थिक स्थिति मजबूत किए बिना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना कठिन होगा।
मुजफ्फरनगर में राजनीतिक गतिविधियों के बीच आया बयान
हरीश रावत का मुजफ्फरनगर दौरा ऐसे समय में हुआ है जब जिले में किसान और राजनीतिक गतिविधियां लगातार चर्चा में हैं। एक ओर किसान संगठन गन्ने के मूल्य और अन्य कृषि समस्याओं को लेकर अपनी मांगें उठा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक दल भी किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े मुद्दों को अपने कार्यक्रमों में प्रमुखता दे रहे हैं।
हाल ही में रालोद के एक कार्यक्रम में भी गन्ने के मूल्य को लेकर चर्चा हुई थी। रालोद विधानमंडल दल के नेता राजपाल बालियान ने कहा था कि इस बार भी गन्ने का मूल्य बढ़वाया जाएगा।
इस तरह एक ही समय में किसान संगठनों और राजनीतिक दलों की ओर से गन्ने की कीमत और किसान हित से जुड़े मुद्दों पर सक्रियता दिखाई दे रही है।
किसानों की आर्थिक स्थिति पर लगातार हो रही राजनीतिक बहस
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसान मुद्दे केवल कृषि तक सीमित नहीं हैं। गन्ना मिलें, भुगतान, मजदूरी, बिजली, सिंचाई, खाद, कृषि ऋण और ग्रामीण रोजगार जैसे कई विषय सीधे ग्रामीण परिवारों की अर्थव्यवस्था से जुड़े हैं।
मुजफ्फरनगर में सितंबर के दौरान आयोजित किसान कार्यक्रमों में भी इन मुद्दों की लंबी सूची सामने आई। भारतीय किसान यूनियन की महापंचायत में गन्ने के अलावा बिजली, खाद, गलत मुकदमों, आवारा पशुओं, बाढ़ और कृषि ऋण जैसी समस्याएं उठाई गई थीं।
हरीश रावत ने अपने बयान में इन व्यापक समस्याओं के बीच फसल मूल्य और किसानों को अतिरिक्त लाभ देने के मुद्दे को प्रमुखता दी।
गन्ने के बाद मक्का भी चर्चा के केंद्र में
हरीश रावत के बयान में गन्ने के साथ मक्के का भी उल्लेख विशेष रूप से किया गया। आमतौर पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश की किसान राजनीति में गन्ना सबसे प्रमुख फसलों में गिना जाता है, लेकिन एथेनॉल उत्पादन के संदर्भ में मक्का भी महत्वपूर्ण हो सकता है।
उन्होंने कहा कि यदि कृषि उत्पादों का औद्योगिक उपयोग बढ़ रहा है तो किसानों को भी उससे पैदा होने वाले आर्थिक लाभ का हिस्सा मिलना चाहिए।
यह मांग कृषि उत्पादों और उद्योग के बीच मूल्य श्रृंखला में किसानों की हिस्सेदारी को लेकर एक व्यापक बहस की ओर भी इशारा करती है।
रामपुर तिराहा पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने किया स्वागत
नई दिल्ली से देहरादून जाते समय मुजफ्फरनगर पहुंचे हरीश रावत का रामपुर तिराहा पर स्थानीय कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता राकेश पुंडीर, जिलाध्यक्ष सतपाल कटारिया, नगराध्यक्ष रंजन मित्तल, असद फारूकी, दिनेश पाल और अकिल राणा सहित बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता मौजूद रहे।
कार्यकर्ताओं के साथ बातचीत में विभिन्न राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा हुई। इसके बाद हरीश रावत ने शहीद स्मारक पर पहुंचकर आंदोलनकारियों को श्रद्धांजलि दी।
शहीद स्मारक पर श्रद्धांजलि के बाद राजनीतिक बयान
रामपुर तिराहा का शहीद स्मारक उत्तराखंड आंदोलन की स्मृति से जुड़ा स्थल है। हरीश रावत ने यहां पहुंचकर आंदोलनकारियों को पुष्प अर्पित किए।
श्रद्धांजलि के बाद उन्होंने पत्रकारों और स्थानीय कार्यकर्ताओं से बातचीत में समकालीन राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर अपना पक्ष रखा।
इस दौरान किसानों का मुद्दा उनके वक्तव्य का सबसे प्रमुख हिस्सा रहा। गन्ने और मक्के से लेकर एथेनॉल और चीनी तक उन्होंने कृषि और उद्योग के संबंध को किसानों के आर्थिक हित से जोड़कर देखा।
किसान और युवा दोनों को लेकर सरकार से सवाल
हरीश रावत ने एक तरफ किसानों के लिए उचित दाम और बोनस की मांग की, तो दूसरी तरफ बेरोजगारी को लेकर युवाओं की स्थिति पर सवाल उठाया।
उनका कहना था कि देश के युवा और किसान दोनों आर्थिक दबाव का सामना कर रहे हैं। उन्होंने सरकार से रोजगार और कृषि आय के मोर्चे पर ठोस कदम उठाने की मांग की।
उनके बयान में ग्रामीण अर्थव्यवस्था के दो महत्वपूर्ण हिस्से—कृषि और रोजगार—एक साथ दिखाई दिए।
चीनी उद्योग और किसान के बीच आर्थिक संबंध पर बहस
गन्ने की कीमत का सवाल केवल किसान और सरकार के बीच का मुद्दा नहीं है। इसके साथ चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति, चीनी की कीमत, गन्ने की लागत, उत्पादन और एथेनॉल जैसे वैकल्पिक उपयोग भी जुड़े होते हैं।
हरीश रावत ने अपने बयान में इसी पूरी श्रृंखला के बीच किसान को अधिक आर्थिक लाभ देने की मांग की।
उनका तर्क था कि जब गन्ने और मक्के जैसे उत्पादों का इस्तेमाल विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में हो रहा है तो उत्पादन करने वाले किसान को भी उसका लाभ मिलना चाहिए।
मुजफ्फरनगर में किसान मुद्दों की गूंज तेज
मुजफ्फरनगर में पिछले कुछ दिनों में किसान मुद्दों को लेकर कई बड़े कार्यक्रम सामने आए हैं। 17 सितंबर की किसान महापंचायत में गन्ने के 500 रुपये प्रति क्विंटल मूल्य की मांग सहित 16 मुद्दे उठाए गए थे।
इसके बाद गन्ने के नए पेराई सत्र से पहले किसानों के सर्वे और सट्टे से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की अपील भी सामने आई है। इससे साफ है कि किसानों के लिए गन्ने की कीमत के साथ-साथ पर्ची, सर्वे और आपूर्ति संबंधी रिकॉर्ड भी महत्वपूर्ण हैं।
ऐसे माहौल में हरीश रावत की बोनस की मांग ने किसान मुद्दे को एक अलग राजनीतिक कोण दिया है।
हरीश रावत के बयान पर अब राजनीतिक प्रतिक्रिया की नजर
किसानों के लिए बोनस, गन्ने का मूल्य और एथेनॉल से जुड़े लाभ का मुद्दा आने वाले समय में राजनीतिक बहस का हिस्सा बन सकता है। खासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों की बड़ी संख्या होने के कारण ऐसे बयानों का स्थानीय राजनीतिक महत्व भी रहता है।
हालांकि हरीश रावत द्वारा लगाए गए आरोप राजनीतिक बयान हैं। इनके जवाब में संबंधित सरकार या अन्य राजनीतिक दलों की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है, यह आगे की राजनीतिक बहस को प्रभावित कर सकता है।
उत्तराखंड की राजनीति से पश्चिमी यूपी तक किसान मुद्दा
हरीश रावत उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हैं, लेकिन मुजफ्फरनगर में उनका दौरा केवल उत्तराखंड से जुड़े विषयों तक सीमित नहीं रहा। रामपुर तिराहा पर उन्होंने उत्तराखंड आंदोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि देने के साथ ही उत्तर प्रदेश और केंद्र सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठाए।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच भौगोलिक तथा सामाजिक संपर्क के कारण रामपुर तिराहा का अपना अलग महत्व है। हरीश रावत ने इसी स्थल से किसानों और आम जनता से जुड़े आर्थिक मुद्दों को उठाया।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ संगठनात्मक चर्चा
शहीद स्मारक पर पहुंचने से पहले और बाद में हरीश रावत ने स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ विभिन्न राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा की। इस दौरान पार्टी के स्थानीय पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।
कार्यकर्ताओं की मौजूदगी ने उनके मुजफ्फरनगर दौरे को स्थानीय संगठन के लिए भी महत्वपूर्ण बना दिया।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता राकेश पुंडीर, जिलाध्यक्ष सतपाल कटारिया, नगराध्यक्ष रंजन मित्तल, असद फारूकी, दिनेश पाल और अकिल राणा सहित अन्य कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया।
किसानों को बोनस की मांग ने बढ़ाई बहस
हरीश रावत का सबसे प्रमुख संदेश किसानों के लिए बोनस से जुड़ा रहा। उनका कहना था कि गन्ने और मक्के से बनने वाले उत्पादों तथा उनसे होने वाले आर्थिक लाभ में किसानों की हिस्सेदारी बढ़नी चाहिए।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गन्ने की अर्थव्यवस्था को देखते हुए इस मांग पर राजनीतिक चर्चा होना स्वाभाविक है। किसान संगठनों की ओर से जहां गन्ने के मूल्य में वृद्धि की मांग की जा रही है, वहीं हरीश रावत ने फसल के उपयोग से जुड़े अतिरिक्त आर्थिक लाभ को बोनस के रूप में किसानों तक पहुंचाने की बात कही।
रामपुर तिराहा स्थित उत्तराखंड शहीद स्मारक पर रविवार को पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने किसानों, युवाओं और आम जनता से जुड़े कई मुद्दे उठाए। उन्होंने गन्ने और मक्के के इस्तेमाल से होने वाले आर्थिक लाभ में किसानों की हिस्सेदारी बढ़ाने तथा बोनस देने की मांग रखी। साथ ही चीनी की कीमतों, एथेनॉल, बेरोजगारी और महंगाई को लेकर केंद्र एवं उत्तर प्रदेश सरकार पर राजनीतिक सवाल उठाए। उनके बयान ऐसे समय में सामने आए हैं जब पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गन्ने के मूल्य और किसान हितों को लेकर विभिन्न किसान संगठनों तथा राजनीतिक दलों की गतिविधियां तेज हैं।
