Nutrition Month 2026 की शुरुआत बुधवार को Muzaffarnagar में महत्वपूर्ण संदेश के साथ हुई। गर्भवती और धात्री महिलाओं, बच्चों तथा किशोरियों के पोषण और स्वास्थ्य को केंद्र में रखते हुए 9वें राष्ट्रीय पोषण माह का जनपदीय शुभारंभ विकास भवन सभागार में किया गया। राज्य स्तर पर आयोजित शुभारंभ कार्यक्रम का सजीव प्रसारण भी यहां मौजूद अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों एवं सहायिकाओं ने एलईडी स्क्रीन के माध्यम से देखा और सुना।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा राज्य स्तरीय कार्यक्रम में राष्ट्रीय पोषण माह का शुभारंभ किए जाने के बाद मुजफ्फरनगर में भी कार्यक्रम को विधिवत आगे बढ़ाया गया। कार्यक्रम में राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार, व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग कपिल देव अग्रवाल मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। उनके साथ प्रशासक जिला पंचायत डॉ. वीरपाल निर्वाल और मीरापुर विधायक प्रतिनिधि सुप्रिया पाल भी उपस्थित रहीं।

दीप प्रज्वलित कर जनपदीय कार्यक्रम की शुरुआत की गई। इसके बाद पोषण, स्वास्थ्य और समाज के कमजोर वर्गों तक सरकारी योजनाओं की पहुंच को लेकर वक्ताओं ने अपने विचार रखे।

9 सितंबर से 8 अक्टूबर तक चलेगा राष्ट्रीय पोषण माह

इस वर्ष राष्ट्रीय पोषण माह का आयोजन 9 सितंबर से 8 अक्टूबर 2026 तक किया जा रहा है। एक महीने तक चलने वाले इस अभियान का उद्देश्य महिलाओं और बच्चों के पोषण तथा स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाना है।

गर्भावस्था के दौरान संतुलित पोषण, प्रसव के बाद माताओं की देखभाल, बच्चों के उचित पोषण और किशोरियों के स्वास्थ्य जैसे विषय इस तरह के अभियानों में विशेष महत्व रखते हैं। इसी वजह से आंगनबाड़ी केंद्रों और कार्यकत्रियों की भूमिका अभियान को घर-घर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

मुजफ्फरनगर में आयोजित कार्यक्रम में भी आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों से केवल कार्यक्रमों में भागीदारी तक सीमित न रहते हुए समुदाय के बीच सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की गई।

कपिल देव अग्रवाल ने आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के बढ़े मानदेय की दी जानकारी

कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं के मानदेय में वृद्धि से जुड़ी घोषणा रही। राज्य मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि प्रदेश सरकार ने हाल ही में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का मानदेय ₹8,000 से बढ़ाकर ₹12,000 और सहायिकाओं का मानदेय ₹4,000 से बढ़ाकर ₹6,000 करने की घोषणा की है।

उन्होंने इसे आंगनबाड़ी कर्मियों के सम्मान से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम बताया।

कार्यक्रम में मौजूद आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं ने इस वृद्धि पर मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया। लंबे समय से जमीनी स्तर पर महिलाओं और बच्चों से जुड़े पोषण एवं देखभाल के कार्यों में शामिल आंगनबाड़ी कर्मियों के लिए मानदेय वृद्धि को आर्थिक सहयोग के साथ-साथ सम्मान से भी जोड़कर देखा गया।

साड़ी के लिए ₹500 की सहायता और कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा का भी उल्लेख

राज्य मंत्री ने आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं के लिए सरकार द्वारा किए गए अन्य प्रावधानों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि साड़ी के लिए ₹500 की सहायता के साथ कैशलेस चिकित्सा स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की गई है।

कार्यक्रम में मौजूद कर्मियों के बीच इन घोषणाओं को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली। आंगनबाड़ी व्यवस्था में काम करने वाली महिलाओं के लिए कार्य से जुड़े सम्मान और सुविधाओं का मुद्दा लंबे समय से महत्वपूर्ण माना जाता रहा है।

पोषण अभियान को घर-घर तक पहुंचाने की अपील

कार्यक्रम के दौरान यह स्पष्ट किया गया कि राष्ट्रीय पोषण माह की सफलता केवल सरकारी कार्यक्रम आयोजित करने से नहीं होगी। इसका वास्तविक असर तभी दिखाई देगा जब पोषण और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी परिवारों तक पहुंचे।

प्रशासक जिला पंचायत डॉ. वीरपाल निर्वाल और मीरापुर विधायक प्रतिनिधि सुप्रिया पाल ने भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से अभियान के दौरान सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।

उन्होंने कहा कि 9 सितंबर से 8 अक्टूबर तक चलने वाले पोषण माह में कार्यकत्रियां घर-घर जाकर गर्भवती और धात्री महिलाओं, बच्चों तथा किशोरियों को बेहतर स्वास्थ्य और पोषण के प्रति जागरूक करें।

यानी इस बार अभियान का जोर केवल मंचीय कार्यक्रमों तक नहीं, बल्कि सीधे परिवारों तक पहुंचने पर रखा गया है।

गर्भवती महिलाओं के पोषण पर विशेष ध्यान

गर्भावस्था किसी भी महिला के जीवन का महत्वपूर्ण चरण होता है। इस दौरान महिला के स्वास्थ्य के साथ गर्भ में पल रहे बच्चे के विकास का भी सीधा संबंध पोषण से होता है।

इसी वजह से पोषण माह के दौरान गर्भवती महिलाओं को संतुलित आहार, नियमित स्वास्थ्य जांच और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में जागरूक करना महत्वपूर्ण लक्ष्य माना जाता है।

ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां स्थानीय स्तर पर महिलाओं तक पहुंच बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। परिवारों के साथ उनका सीधा संपर्क होने के कारण सरकारी स्वास्थ्य और पोषण संदेशों को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में उनकी भूमिका अहम हो जाती है।

धात्री महिलाओं और बच्चों की देखभाल भी अभियान के केंद्र में

प्रसव के बाद मां और बच्चे दोनों के लिए उचित देखभाल आवश्यक होती है। ऐसे समय में पोषण, स्वच्छता, शिशु की देखभाल और स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में सही जानकारी परिवार के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।

राष्ट्रीय पोषण माह में धात्री महिलाओं और बच्चों को भी प्रमुखता से शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य परिवारों में पोषण को लेकर जागरूकता बढ़ाना और उपलब्ध सरकारी सेवाओं का लाभ लेने के लिए लोगों को प्रेरित करना है।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को इस संदेश को घर-घर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई है।

किशोरियों के स्वास्थ्य को भी अभियान में मिली जगह

पोषण की चर्चा अक्सर छोटे बच्चों और गर्भवती महिलाओं तक सीमित रह जाती है, लेकिन किशोरियों का स्वास्थ्य भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

किशोरावस्था में शरीर तेजी से विकसित होता है। इस दौरान उचित पोषण और स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता आगे के जीवन पर भी असर डाल सकती है। इसी कारण पोषण माह के दौरान किशोरियों को स्वास्थ्य और पोषण के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया जा रहा है।

मुजफ्फरनगर में आयोजित कार्यक्रम में भी इस वर्ग को अभियान के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में शामिल किया गया।

सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने पर जोर

कपिल देव अग्रवाल ने अपने संबोधन में कहा कि केंद्र और राज्य सरकार महिलाओं एवं बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार कार्य कर रही हैं।

उन्होंने महिला सुरक्षा, आवास, शिक्षा, शौचालय, ‘हर घर जल’ योजना के माध्यम से पेयजल, उज्ज्वला योजना के जरिए रसोई गैस और युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने जैसे विषयों का उल्लेख किया।

मंत्री ने कहा कि जनकल्याणकारी योजनाओं का उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाना है। उन्होंने बिना भेदभाव के विकास और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की बात भी कही।

आंगनबाड़ी कर्मियों से सरकारी सेवक की तरह जिम्मेदारी निभाने का आह्वान

कार्यक्रम में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को उनकी भूमिका की गंभीरता का भी अहसास कराया गया।

कपिल देव अग्रवाल ने उनसे कहा कि वे स्वयं को केवल किसी संस्था से जुड़ा हुआ न मानें, बल्कि एक निष्ठावान सरकारी सेवक के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाएं।

उन्होंने बच्चों के बेहतर भविष्य और सशक्त भारत के निर्माण में आंगनबाड़ी कर्मियों के योगदान को महत्वपूर्ण बताया।

उनका संदेश साफ था कि पोषण अभियान की सफलता जमीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों की सक्रियता पर काफी निर्भर करेगी।

‘पोषण माह’ सिर्फ एक महीने का कार्यक्रम नहीं

राष्ट्रीय पोषण माह की अवधि एक महीने की है, लेकिन पोषण से जुड़े व्यवहार में बदलाव लंबे समय की प्रक्रिया होती है।

परिवारों को केवल एक बार जानकारी देने से पोषण संबंधी आदतें नहीं बदलतीं। इसके लिए लगातार संवाद, स्थानीय स्तर पर जागरूकता और उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी जरूरी होती है।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की नियमित पहुंच इसी कारण महत्वपूर्ण हो जाती है। वे परिवारों से सीधे संपर्क कर महिलाओं, बच्चों और किशोरियों से जुड़े स्वास्थ्य एवं पोषण संदेशों को समझाने का काम कर सकती हैं।

मुजफ्फरनगर में जमीनी अभियान को लेकर बढ़ी जिम्मेदारी

जनपद स्तर पर आयोजित कार्यक्रम के बाद अब अगले एक महीने में विभिन्न क्षेत्रों में जागरूकता गतिविधियों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी संबंधित विभागों और आंगनबाड़ी नेटवर्क पर होगी।

विशेष रूप से उन परिवारों तक पहुंचना जरूरी होगा जहां स्वास्थ्य और पोषण संबंधी जानकारी सीमित है या सरकारी सेवाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।

गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं, बच्चों और किशोरियों को समय पर उचित जानकारी और स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ना अभियान की वास्तविक सफलता का पैमाना बन सकता है।

मुख्यमंत्री के राज्य स्तरीय कार्यक्रम का लाइव प्रसारण देखा

मुजफ्फरनगर के विकास भवन सभागार में मौजूद अतिथियों और प्रतिभागियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के राज्य स्तरीय संबोधन का एलईडी स्क्रीन के माध्यम से लाइव प्रसारण देखा।

राज्य स्तरीय शुभारंभ के साथ ही जिले में भी अभियान की औपचारिक शुरुआत हुई। दीप प्रज्वलन के बाद जनपदीय कार्यक्रम में मौजूद लोगों को राष्ट्रीय पोषण माह के उद्देश्यों और इसकी व्यापक भूमिका से अवगत कराया गया।

इस तरह राज्य और जिला स्तर के कार्यक्रमों को एक साथ जोड़कर अभियान की शुरुआत की गई।

कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की मौजूदगी

कार्यक्रम में प्रशासक जिला पंचायत डॉ. वीरपाल निर्वाल, मीरापुर विधायक प्रतिनिधि सुप्रिया पाल, जिला विकास अधिकारी दिग्विजयनाथ तिवारी और जिला कार्यक्रम अधिकारी सुशील कुमार सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।

बड़ी संख्या में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां और सहायिकाएं भी कार्यक्रम में शामिल हुईं।

कार्यक्रम का संचालन बाल कल्याण समिति के सदस्य राजीव कुमार ने किया।

इस मौके पर विभागीय अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने पोषण माह को प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए जमीनी स्तर पर सक्रियता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

आंगनबाड़ी केंद्रों की भूमिका फिर चर्चा के केंद्र में

राष्ट्रीय पोषण माह के दौरान आंगनबाड़ी केंद्रों की भूमिका स्वाभाविक रूप से महत्वपूर्ण हो जाती है। बच्चों की देखभाल, पोषण संबंधी जागरूकता और महिलाओं तक आवश्यक जानकारी पहुंचाने में इन केंद्रों का स्थानीय स्तर पर सीधा संपर्क रहता है।

कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं से अपेक्षा की गई है कि वे अभियान के दौरान समुदाय के बीच जाकर लोगों को जागरूक करें।

इसके लिए केवल आंकड़ों या औपचारिक गतिविधियों के बजाय वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचना अधिक महत्वपूर्ण होगा।

महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ा संदेश घर तक पहुंचाने की चुनौती

किसी भी पोषण अभियान की सबसे बड़ी चुनौती यही होती है कि सरकारी संदेश कागज और मंच से निकलकर वास्तविक परिवारों तक पहुंचे।

कई बार परिवारों में भोजन की उपलब्धता होने के बावजूद संतुलित आहार, पोषण की आवश्यकता और स्वास्थ्य सेवाओं के इस्तेमाल को लेकर पर्याप्त जानकारी नहीं होती। ऐसे में स्थानीय स्तर पर लगातार संवाद की आवश्यकता रहती है।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के जरिए महिलाओं और परिवारों तक सरल भाषा में जानकारी पहुंचाना इस दिशा में उपयोगी कदम हो सकता है।

बच्चों के पोषण से जुड़ी जागरूकता पर भी जोर

बच्चों के शुरुआती वर्षों में उचित पोषण उनके विकास के लिए महत्वपूर्ण होता है। इसलिए पोषण माह में बच्चों के साथ-साथ उनके माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्यों को भी जागरूक करना जरूरी है।

बच्चे के लिए क्या भोजन बेहतर है, स्वास्थ्य संबंधी किन संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और उपलब्ध सरकारी सेवाओं का उपयोग कैसे किया जाए—ऐसी बुनियादी जानकारी परिवारों के लिए उपयोगी हो सकती है।

अभियान का उद्देश्य इसी प्रकार की जागरूकता को व्यापक स्तर तक ले जाना है।

मानदेय वृद्धि से आंगनबाड़ी कर्मियों में उत्साह

कार्यक्रम में मानदेय वृद्धि की चर्चा ने भी विशेष ध्यान खींचा। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां और सहायिकाएं सीधे समुदाय के साथ काम करती हैं। उनके काम का बड़ा हिस्सा जमीनी स्तर पर लोगों से संपर्क और सेवाओं से जुड़ा है।

कार्यकत्रियों का मानदेय ₹8,000 से ₹12,000 और सहायिकाओं का ₹4,000 से ₹6,000 किए जाने की घोषणा को लेकर मौजूद कर्मियों ने आभार जताया।

इसके साथ साड़ी के लिए ₹500 सहायता और कैशलेस चिकित्सा सुविधा का उल्लेख भी किया गया।

अब असली परीक्षा जमीनी अमल की

मुजफ्फरनगर में राष्ट्रीय पोषण माह की शुरुआत हो चुकी है। अब अगले चरण में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अभियान की गतिविधियां कितनी प्रभावी तरीके से गांवों, मोहल्लों और परिवारों तक पहुंचती हैं।

9 सितंबर से 8 अक्टूबर तक चलने वाले इस अभियान में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की सक्रियता, विभागीय समन्वय और समुदाय की भागीदारी महत्वपूर्ण होगी।

गर्भवती और धात्री महिलाओं, बच्चों तथा किशोरियों के स्वास्थ्य और पोषण को लेकर जागरूकता बढ़ाना केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं है। परिवार और समाज की भागीदारी भी उतनी ही जरूरी है।

मुजफ्फरनगर में हुए शुभारंभ कार्यक्रम ने इसी दिशा में एक महीने के अभियान की शुरुआत कर दी है। अब मंच से दिए गए संदेश को घर-घर तक पहुंचाना और पात्र परिवारों को उपलब्ध सेवाओं से जोड़ना सबसे महत्वपूर्ण काम होगा।

मुजफ्फरनगर में 9वें राष्ट्रीय पोषण माह की शुरुआत गर्भवती एवं धात्री महिलाओं, बच्चों और किशोरियों के स्वास्थ्य तथा पोषण को केंद्र में रखकर की गई। विकास भवन सभागार में आयोजित जनपदीय कार्यक्रम में राज्य मंत्री कपिल देव अग्रवाल, प्रशासक जिला पंचायत डॉ. वीरपाल निर्वाल, मीरापुर विधायक प्रतिनिधि सुप्रिया पाल और विभागीय अधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के राज्य स्तरीय शुभारंभ का लाइव प्रसारण देखा गया। इस दौरान आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का मानदेय ₹8,000 से बढ़ाकर ₹12,000 तथा सहायिकाओं का ₹4,000 से बढ़ाकर ₹6,000 किए जाने की घोषणा का भी उल्लेख किया गया। अब 9 सितंबर से 8 अक्टूबर तक चलने वाले अभियान में आंगनबाड़ी कर्मियों से घर-घर पहुंचकर महिलाओं, बच्चों और किशोरियों को पोषण एवं स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने की अपील की गई है।

 



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