हाथरस एसीजेएम एमपी/एमएलए कोर्ट में लोकसभा सांसद व नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर चल रहे मानहानि के परिवाद पर न्यायालय में 2 मई को सुनवाई हुई। संज्ञान के बिंदु पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने आदेश सुरक्षित रख लिया है। कोर्ट इस पर आदेश देगी कि इस मामले में राहुल गांधी को तलब किया जाना है या नहीं।

राहुल गांधी की ओर से प्रकरण में आपत्ति दाखिल की गई थी, जिस पर बहस होनी थी। अगली तारीख 13 मई लगाई गई है। थाना चंदपा क्षेत्र के गांव में 14 सितंबर 2020 को अनुसूचित जाति की एक युवती के साथ घटित घटना पूरे देश में सुर्खियों में रही थी। प्रकरण में दो मार्च 2023 में न्यायालय का फैसला आया, जिसमें एक आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई गई और तीन को दोष मुक्त कर दिया था।

12 दिसंबर 2024 को राहुल गांधी पीड़िता के गांव पहुंचे थे और परिवार से मुलाकात की थी। दोष मुक्त होने के बाद भी राहुल गांधी ने युवकों के बारे में बयानबाजी की थी। साथ ही अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट करते हुए अपराधियों के खुलेआम घूमने की बात कही थी। इसी बयान से क्षुब्ध होकर तीन में से एक आरोपी ने 24 दिसंबर 2025 को राहुल गांधी को नोटिस भेजा था और मानहानि का दावा करते हुए 50 लाख रुपये प्रतिकर की मांग की थी। जवाब न मिलने पर 24 जनवरी 2025 को मानहानि के आरोप में परिवाद दाखिल किया गया।

16 मार्च 2026 को हुई सुनवाई में लखनऊ से आए अधिवक्ता ने राहुल गांधी की ओर से आपत्ति दाखिल कर आरोपों को गलत बताते हुए केस खारिज करने की मांग की थी। 13 अप्रैल को इस आपत्ति पर सुनवाई होनी थी, लेकिन किसी कारण वश नहीं हो सकी और दो मई की तारीख लग गई थी। शनिवार को आपत्ति पर सुनवाई हुई, जिसमें राहुल गांधी की ओर से लखनऊ से तीन अधिवक्ता उपस्थित हुए।

बयान को ठहराया है सही

नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कोर्ट में 15 बिंदुओं में सात पेज की आपत्ति दाखिल की थी। इसमें उन्होंने अपने बयान को सही ठहराने का प्रयास किया था। आपत्ति में राहुल गांधी ने स्वीकारा कि उनके द्वारा बयान दिया गया है, लेकिन यह बयान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष होने के नाते अपने कर्तव्यों के निवर्हन के लिए लोकसभा में दिया है। लोकसभा में दिए गए बयान को ही एक्स हैंडल पर पोस्ट किया गया है।



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