झांसी। एक ही सड़क पर नगर निगम और लोक निर्माण विभाग की ओर से 42.82 लाख रुपये खर्च किए जाने का मामला अब शासन तक पहुंच गया। अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने लोक निर्माण विभाग और नगर निगम से पूरे मामले में जवाब तलब किया है। इसके बाद से दोनों महकमों में खलबली मची है। अफसर अपनी-अपनी सफाई देने में जुट गए हैं।
वार्ड संख्या 32 पिछोर क्षेत्र में मां पीतांबरा मिष्ठान से प्राथमिक विद्यालय, एग्जाम ट्रिप सेंटर से मनोज आटा चक्की और रेड क्लिक लैब से माता मंदिर होते हुए लक्ष्मी हार्डवेयर तक सड़क सुधार एवं निर्माण कार्य कराया
गया। नगर निगम ने तीन महीने पहले इस सड़क पर करीब 25.27 लाख रुपये खर्च कर सड़क की मरम्मत कराई। हैरानी की बात यह रही कि इस चमाचम सड़क की कुछ महीने बाद ही लोक निर्माण विभाग ने अप्रैल माह में 17.55 लाख रुपये खर्च कर डामरीकरण करा दिया। इस तरह एक ही सड़क पर दोनों विभागों ने कुल 42.82 लाख रुपये खर्च कर दिए। अमर उजाला के 29 अप्रैल के अंक में इस संबंध में समाचार प्रकाशित होने के बाद मामला सीएम कार्यालय तक पहुंचा। सीएम कार्यालय ने दोनों ही विभागों से इस बारे में जवाब देने को कहा।
इनसेट
एक दूसरे पर फोड़ रहे ठीकरा
इस मामले में दोनों ही महकमे एक दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। नगर आयुक्त आकांक्षा राणा का तर्क है कि सड़क का रखरखाव लोक निर्माण विभाग के जिम्मे है, इसलिए उनके अभियंताओं को जांच करनी चाहिए थी कि सड़क हाल ही में बनी है या नहीं। अगर सड़क का निर्माण हो गया है, तब इसका निर्माण नहीं करान चाहिए था। वहीं, लोक निर्माण विभाग के नोडल एवं अधिशासी अभियंता रजनीश गुप्ता का तर्क है कि सड़क पीडब्ल्यूडी के अधीन है और नगर निगम ने बिना सूचना दिए वहां काम कराया।
