आगरा। आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाने वाला योगिनी एकादशी का व्रत शुक्रवार को है। इस बार एकादशी पर्व पर गजकेसरी और बुधादित्य योग का विशेष संयोग बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह व्रत सभी प्रकार के पापों, रोगों और शारीरिक कष्टों से मुक्ति दिलाने वाला माना गया है।

ज्योतिषाचार्य डॉ. अरविंद मिश्रा ने बताया कि शास्त्रों में वर्णित है कि योगिनी एकादशी का उपवास रखने से जातक को 88,000 ब्राह्मणों को भोजन कराने के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। श्रद्धालु ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें तो यह विशेष फलदायी है।

बताया कि एकादशी व्रत में अन्न और चावल का सेवन पूरी तरह से वर्जित है, श्रद्धालु केवल फलाहार, दूध और मेवे को ग्रहण कर सकते हैं। अगले दिन शुभ मुहूर्त में ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा देकर ही पारण किया जाता है।

तिथियों के फेर के कारण दो दिन रखा जाएगा व्रत

ज्योतिषाचार्य ने बताया कि गृहस्थों के लिए व्रत 10 जुलाई को सुबह 8 बजकर 22 मिनट शुरू होगा और 11 जुलाई को सुबह 5 बजकर 22 मिनट तक एकादशी तिथि है। वहीं वैष्णव संप्रदाय के लिए व्रत 11 जुलाई को मान्य होगा।

व्रत से मिलती है शांति

बचपन से मां को यह व्रत करते देखा है। मान्यता है कि योगिनी एकादशी का व्रत रखने से न केवल मन को शांति मिलती है, बल्कि घर में सुख-समृद्धि और आरोग्य का वास होता है।- शकुंतला देवी, सिकंदरा।

सात्विक जीवन जीने की मिलती है प्रेरणा

इस व्रत में कथा सुनने का विशेष महत्व है। परिवार के लोग मिलकर भजन-कीर्तन करते हैं। यह व्रत हमें संयम और सात्विक जीवन जीने की प्रेरणा देता है। -निकिता तिमोरी, अर्जुन नगर।

योगिनी एकादशी व्रत

योगिनी एकादशी व्रत

योगिनी एकादशी व्रत

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