कोंच। देशभर में साइबर ठगी से अर्जित धनराशि का नेटवर्क अब कोंच तक पहुंच चुका है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि पिछले कई महीनों से साइबर अपराधियों द्वारा ठगी की रकम स्थानीय बैंक खातों के माध्यम से ट्रांजिट कराई जा रही थी। मामूली कमीशन के लालच में कई खाताधारकों ने न सिर्फ अपने, बल्कि परिचितों और परिजनों के बैंक खातों का भी इस्तेमाल कराया। अब यही लालच उनके लिए बड़ी मुसीबत बनता नजर आ रहा है।
केंद्र सरकार के समन्वय प्रतिबिंब पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों के आधार पर एसबीआई की कोंच मुख्य शाखा और नदीगांव रोड स्थित मंडी शाखा के कई खातों में संदिग्ध वित्तीय लेनदेन का मामला सामने आया। जांच शुरू होते ही पुलिस ने बैंक प्रबंधन के सहयोग से संदिग्ध खातों को होल्ड कर कार्रवाई तेज कर दी है। शुरुआत में करीब 50 बैंक खाते पुलिस के रडार पर थे, लेकिन जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है और नए संदिग्ध खातों की पहचान की जा रही है। पुलिस का मानना है कि साइबर ठगी से प्राप्त रकम कई स्तरों (लेयर) में एक खाते से दूसरे और फिर तीसरे खाते में भेजी गई, जिससे असली अपराधियों तक पहुंचना कठिन हो सके।
अब तक कोतवाली कोंच में चार एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। पुलिस संबंधित खाताधारकों के साथ उन लोगों से भी पूछताछ कर रही है, जिन्होंने कथित तौर पर इन खातों का इस्तेमाल कराने में भूमिका निभाई। जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ लोगों ने कमीशन के लालच में अपने बैंक खाते उपलब्ध करा दिए जिनसे लाखों रुपये का ट्रांजेक्शन कराया गया। जबकि कुछ लोगों ने अपने परिचितों के खाते भी इस नेटवर्क में शामिल करा दिए। जांच के अनुसार, साइबर अपराधियों द्वारा ठगी की रकम पहले इन खातों में भेजी जाती थी और फिर अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर निकासी की जाती थी।
इस पूरे नेटवर्क में कई लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। इस मामले में अब तक चार एफआईआर दर्ज कर आठ लोगों के नाम प्रकाश में आ चुके है। पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है। जैसे-जैसे नए तथ्य सामने आएंगे, कार्रवाई का दायरा और बढ़ सकता है। ऐसे में साइबर ठगी की रकम के लेनदेन से जुड़े अन्य लोगों पर भी शिकंजा कसने की संभावना है।
सीओ परमेश्वर प्रसाद ने कहा कि कुछ संदिग्ध खातों की पहचान की गई है। लेनदेन की जांच की जा रही है। जल्द ही कार्रवाई की जाएगी।
