मुख्यमंत्री के सख्त रुख के बाद शासन ने आगरा सहित प्रदेशभर के नगरीय क्षेत्रों में अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ महाभियान छेड़ने का आदेश दिया है। मुख्य सचिव राहुल भटनागर ने बृहस्पतिवार से 15 दिनों के भीतर युद्धस्तर पर सार्वजनिक और बहुमूल्य सरकारी जमीनों को कब्जा मुक्त कराने के निर्देश जारी किए हैं। शहर में अतिक्रमण न रुकने पर सीधे अधिकारी जिम्मेदार होंगे और उन्हें जेल की सजा भी हो सकती है।
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अतिक्रमण रोकने के लिए शहर को जोन में बांटकर नगर निगम और विकास प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास अधिनियम-1973 की धारा-26-घ के तहत एक माह का साधारण कारावास या 10 हजार रुपये का जुर्माना अथवा दोनों दंड दिए जा सकते हैं। एडीए उपाध्यक्ष एम अरुन्मोली ने बताया कि राष्ट्रीय, राज्य मार्गों, महत्वपूर्ण चौराहों और फुटपाथों पर हुए अनधिकृत निर्माणों को पहली वरीयता पर हटाया जाएगा।
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बिना नक्शा स्वीकृत कराए या सेटबैक का उल्लंघन कर बनाए गए अवैध निर्माणों पर भी प्राथमिकता से कार्रवाई होगी। खाली कराई गई भूमि पर दोबारा अतिक्रमण रोकने के लिए तुरंत चहारदीवारी या फेंसिंग कराई जाएगी। सड़कों व फुटपाथों का सुदृढ़ीकरण और चौड़ीकरण कराया जाएगा। पुलिस इसकी अभिरक्षा करेगी। मंडलायुक्त इस अभियान की मॉनिटरिंग करेंगे। प्रतिदिन शाम 5 बजे तक आवास बंधु को मुक्त कराई गई जमीन की प्रगति रिपोर्ट भेजनी होगी।
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