पीलीभीत के बीसलपुर नगर पालिका की बर्खास्त कर्मचारी उपेंद्र शंखधर ने यूं ही आत्महत्या नहीं की है, वह पहले जेल जाने और फिर इंतजाम कर 18 लाख जमा करने से बुरी तरह टूट गए थे। इसके बाद सोमवार को हद तब हुई, जब दोपहर 12 बजे उन्हें फोन करके बहाली के लिए आठ लाख रुपये मांगे गए। यह कहना है उनके भाई अनुराग का। उन्होंने वीडियो बनाकर वायरल करते हुए मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचाने और आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। इससे पहले की बेबसी भी उपेंद्र के पांच पेज के सुसाइड नोट से भी झलकती है।

 

भाई अनुराग ने बताया कि खुद ईओ शमशेर सिंह ने उपेंद्र के फोन पर कॉल की। इसके बाद उपेंद्र ने घरवालों को बताया कि ईओ ने बहाली के लिए आठ लाख रुपये मांगे हैं। इसके साथ ही उपेंद्र ने कहा कि अब वह बुरी तरह टूट चुके हैं, इतनी बड़ी रकम जुटाने की हिम्मत नहीं है। घरवालों ने फिलहाल शांत रहने की सलाह देते हुए शिकायत करने को कहा। वहीं उपेंद्र ने इसके बाद अपनी जान देने की तैयारी कर ली। 

सितंबर में दर्ज हुआ था टैक्स घोटाले का केस 

इस मामले में सितंबर 2025 में उपेंद्र शंखधर के साथ ही अनुभाग के कर्मचारी रामनिवास, जितेंद्र कुमार और पूर्व कर अधीक्षक उमेश चंद्र आनंद और अंकित वर्मा को दोषी बताते हुए रिपोर्ट लिखाई गई थी। उपेंद्र शंखधार और जितेंद्र कुमार को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा था। उमेश, रामनिवास और अंकित इलाहाबाद हाईकोर्ट से अपनी गिरफ्तारी पर स्थगनादेश ले आए थे।

बाद में ईओ ने रामनिवास, जितेंद्र कुमार और उपेंद्र शंखधर को दो फरवरी 2026 को बर्खास्त कर दिया था।



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