झांसी। मोबाइल की स्क्रीन पर घंटों बीत रहा समय बच्चों की सेहत पर असर डाल रहा है। खेल के मैदान से दूरी और लगातार बैठे रहने की आदत के कारण बच्चों में हड्डियों, जोड़ों और मांसपेशियों से जुड़ी शिकायतें बढ़ रही हैं। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के हड्डी रोग विभाग की ओपीडी में ऐसे औसतन 15 बच्चे और किशोर रोजाना पहुंच रहे हैं।

दौड़ेंगे-कूदेंगे तो मजबूत होंगी हड्डियां

हड्डी रोग विभागाध्यक्ष डॉ. पारस गुप्ता के अनुसार, बच्चों की बढ़ती उम्र में हड्डियों पर पड़ने वाला सामान्य दबाव उनके विकास और मजबूती में मदद करता है। दौड़ना, कूदना और अन्य वजन सहने वाली गतिविधियों से हड्डियों का घनत्व बेहतर होने में मदद मिलती है। खेलकूद से जोड़ों को सहारा देने वाली मांसपेशियां भी मजबूत होती हैं।

शारीरिक गतिविधि कम होने पर जोड़ों में अकड़न और लचीलेपन में कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसके साथ ही ऊर्जा खर्च कम होने से वजन बढ़ने की समस्या भी हो सकती है। ऐसे में बच्चे एक ओर वजन बढ़ने की समस्या से जूझ सकते हैं तो दूसरी ओर मांसपेशियों की ताकत प्रभावित हो सकती है।

मोबाइल देखते समय गर्दन झुकाना भी नुकसानदायक

बच्चे मोबाइल देखने के दौरान अक्सर गर्दन झुकाकर या लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठे रहते हैं। इससे गर्दन और रीढ़ पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। डॉ. पारस गुप्ता के मुताबिक, ओपीडी में अब पैरों और जोड़ों के दर्द के साथ गर्दन और कमर दर्द की शिकायत लेकर आने वाले बच्चे और किशोर भी पहुंच रहे हैं।

बच्चों के लिए अभिभावक अपनाएं ये चार उपाय

रोज कम से कम एक घंटा सक्रिय रहें – बच्चों को रोजाना करीब 60 मिनट तेज शारीरिक गतिविधि के लिए प्रोत्साहित करें। इसे एक साथ करने के बजाय दिनभर में अलग-अलग गतिविधियों में भी बांटा जा सकता है।

दौड़ना-कूदना दिनचर्या में शामिल करेंं – दौड़ना, रस्सी कूदना, डांस, साइकिल चलाना और आउटडोर गेम जैसी गतिविधियां बच्चों को सक्रिय रखने के अच्छे विकल्प हैं।

स्क्रीन के बीच ब्रेक जरूरी – बच्चे लगातार लंबे समय तक मोबाइल, टीवी या कंप्यूटर न देखें। बीच-बीच में उठकर चलने, स्ट्रेचिंग करने और शरीर को सक्रिय करने की आदत डालें।

खानपान भी हो संतुलित- बच्चों के भोजन में पर्याप्त कैल्शियम, विटामिन-डी, प्रोटीन और अन्य जरूरी पोषक तत्व शामिल हों। किसी पोषक तत्व की कमी की आशंका होने पर चिकित्सक की सलाह लें।

कब सतर्क हों अभिभावक

बच्चे को लगातार या बार-बार हड्डियों, जोड़ों, गर्दन या कमर में दर्द हो, खेलते समय दर्द बढ़े, चलने-फिरने में परेशानी हो या दर्द के कारण उसकी रोजमर्रा की गतिविधियां प्रभावित होने लगें तो इसे केवल थकान मानकर नजरअंदाज न करें। ऐसी स्थिति में चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।

-बच्चों को स्क्रीन से पूरी तरह दूर करना जरूरी नहीं है लेकिन स्क्रीन और शारीरिक गतिविधि के बीच संतुलन जरूरी है। अभिभावक बच्चों को रोजाना मैदान में खेलने और सक्रिय रहने के लिए प्रोत्साहित करें। बढ़ती उम्र में यही आदत उनकी मांसपेशियों और हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करेगी। – डॉ. पारस गुप्ता, विभागाध्यक्ष, हड्डी रोग विभाग, मेडिकल कॉलेज



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *