कानपुर के चर्चित किडनी ट्रांसप्लांट मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लांड्रिंग का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। लखनऊ स्थित ईडी के जोनल मुख्यालय ने कानपुर पुलिस कमिश्नरी को पत्र लिखकर अब तक हुई जांच में सामने आए तथ्य, दस्तावेज और साक्ष्यों की जानकारी मांगी है। आरोपियों की संपत्तियों की जांच के लिए उपनिबंधन कार्यालयों को पत्र लिखा गया है। इस मामले में चार आरोपी अब भी पुलिस की गिरफ्त से दूर हैं।
रावतपुर थाने के दरोगा मुकेश कुमार ने 31 मार्च को एफआईआर दर्ज कराई थी। बिहार के बेगूसराय निवासी आयुष की किडनी मेरठ की पारुल तोमर को ट्रांसप्लांट हुई थी। पारुल को पनकी रोड के प्रिया अस्पताल और आयुष को कल्याणपुर के मेडलाइफ अस्पताल में रखा गया था। वहीं साउथ अफ्रीका की अरेबिका का भी आहूजा अस्पताल में ट्रांसप्लांट हुआ था। बीते वर्ष एक अन्य महिला का ट्रांसप्लांट कर कार से दिल्ली भेजा, जहां उसकी मौत हो गई।
विवेचना से साफ हो गया कि किडनी की खरीद-फरोख्त का काम सिंडिकेट बनाकर हो रहा है। पुलिस ने डॉ. सुरजीत सिंह आहूजा, डॉ. प्रीती आहूजा, शिवम अग्रवाल, राजेश कुमार, राम प्रकाश कुशवाहा, नरेंद्र सिंह, कुलदीप सिंह राघव, राजेश कुमार तोमर को गिरफ्तार किया था। वहीं आरोपी मुदस्सर अली ने अदालत में आत्मसमर्पण किया था। जांच में लखनऊ के डॉ. सैफुद्दीन, डॉ. कैफ, डॉ. अखिलेश तिवारी, हरदोई के डॉ. रोहित आदि के नाम भी सामने आए थे।
अभी भी अफजाल, नवीन पांडेय, डॉ वैभव व अनुराग की गिरफ्तारी कानपुर पुलिस नहीं कर सकी है। ऐसे में ईडी के आने की आहट ने पुलिस की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पुलिस ने फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए हैं। पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल का कहना है कि ईडी को मामले से संबंधित जानकारियां उपलब्ध करा दी गई हैं। जांच में टीम का पूरा सहयोग किया जाएगा।
