खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) विभाग राजधानी में नकली दवाओं के नेटवर्क को तोड़ नहीं पा रहा। इसकी बड़ी वजह ये है कि राजधानी में नकली दवाओं की ज्यादातर आपूर्ति कूरियर के जरिये पहुंच रही है। जिले के अंदर और आसपास के जिलों में माल को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने के लिए ही वाहनों का इस्तेमाल किया जाता है।
अधिकारी भी मानते हैं कि दवा की दुकानों तक पहुंचने के बाद नकली-असली की पहचान करना काफी मुश्किल हो जाता है। नकली दवाओं को पकड़ने के लिए गोपनीय सूचनाओं पर आश्रित रहना पड़ता है। बृहस्पतिवार रात विभिन्न ब्रांड की नकली दवाओं की बरामदगी ने फिर से सवाल खड़े किए हैं कि आखिर इन दवाओं के निर्माण और सप्लाई का नेटवर्क कहां से संचालित हो रहा है।
पिछले तीन वर्ष में कई बार कार्रवाई के बाद भी नकली दवाओं के धंधे पर पूरी तरह से रोक नहीं लग सकी है। पुलिस और एफएसडीए के अधिकारी भी मानते हैं कि जब तक नकली दवाओं के उत्पादन और आपूर्ति पर नकेल नहीं कसेगी, तब तक इस धंधे को रोक पाना मुश्किल है।
