मथुरा के बलदेव क्षेत्र में किसानों की मेहनत पर घटिया बीज ने पानी फेर दिया है। राया कट स्थित राजकीय कृषि बीज भंडार से सब्सिडी पर मक्का का बीज खरीदने वाले किसान आज खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। खेतों में मक्के की फसल तो लहलहा रही है और पौधों पर भुट्टे भी हैं, लेकिन इन भुट्टों में दाने नहीं पड़े हैं। हरी-भरी दिखने वाली फसल के अंदर सिर्फ दिखावे का भुट्टा निकल रहा है, जिससे क्षेत्र के किसान बीज कंपनी पर सवाल उठा रहे हैं। यह स्थिति जिले में कई स्थानों पर है लेकिन बलदेव क्षेत्र का मामला तूल पकड़ रहा है।
किसानों का कहना है कि उन्होंने सरकार के भरोसे सरकारी गोदाम से लगभग तीन माह पहले 300 रुपये प्रति किलो मक्का का बीज खरीदा था। इस बीज पर सरकार की तरफ से 150 रुपये प्रति किलो सब्सिडी भी दी गई थी। दरअसल एक निजी कंपनी का यह बीज था जो सरकारी गोदाम के जरिए बेचा गया था। किसानों ने बीज बोया और खाद, पानी, छुट्टा पशुओं से बचाव में खूब पैसा खर्च किया। अब फसल काटने का नंबर आया तो किसान ठगे से रह गए। पौधों पर भुट्टे तो आए पर अधिकतर खाली निकले। कुछ में इक्का दुक्का दाने हैं लेकिन अधिकतर फसल बेकार चली गई है। घटिया बीज की इस मार से आक्रोशित कारब गांव के दर्जनों किसानों ने इस बाबत प्रशासनिक स्तर पर आपत्ति दर्ज कराई है।
किसानों को प्रति बीघा 25 हजार का नुकसान
किसानों का कहना कि हर साल एक बीघा में लगभग 12 क्विंटल मक्का की पैदावार होती थी, जिसकी बाजार में लगभग 25 हजार रुपये कीमत आंकी गई है। किसी ने दो बीघा तो किसी ने दस बीघा में फसल की बुवाई की थी। सभी किसानों ने राया कट के निकट राजकीय कृषि बीज भंडार से ही बीज खरीदा था। किसान अजय, रतिराम आदि का कहना है यह नुकसान तो हुआ ही है, ऊपर से सारी लागत पर खर्च की गई रकम भी व्यर्थ चली गई।
पिछले साल बाजरा की फसल ने दिया था दगा
किसानों ने बताया कि बीते साल बाजरा की फसल ने भी इसी तरह दगा दिया था। बाजरे की फसल में बालियां तो निकली लेकिन उनमें दाने नहीं आए। मजबूर होकर किसानों ने फसल को अपने पशुओं को खिलाया था। इसका भी बीज इसी बीज भंडार से खरीदा गया था। किसानों की शिकायत के बाद बदले में अधिकारियों ने 72 किसानों को नया बीज उपलब्ध कराया था। हालांकि यह बीज समय गुजर जाने के कारण बोया ही नहीं जा सका। किसानों की लागत भी बेकार गई थी।
एक केंद्र से ही बांटा 16 क्विंटल बीज
इस सरकारी केंद्र में शिविर लगाकर इस साल करीब 16 क्विंटल मक्के का बीज बांटा गया था। पूरे जिले में लगभग सौ क्विंटल बीज बांटने की बात सामने आ रही है। हालांकि इसका हिसाब अभी लगाया जा रहा है। दरअसल मामला तो जिले भर का है पर राया ब्लॉक के गांवों में यह तब सामने आ गया जब किसानों ने इस बाबत अपनी आपत्ति दर्ज करा दी।
ये बोले किसान
किसान अजय कुमार ने बताया कि हमने इस उम्मीद में सरकारी गोदाम से बीज लिया था कि पैदावार अच्छी होगी। तीन महीने से दिन-रात खेतों में पसीना बहाया, समय पर पानी और महंगी खाद लगाई। फसल देखकर लग रहा था कि इस बार मुनाफा होगा, लेकिन जब भुट्टे तोड़े तो पैरों तले जमीन खिसक गई। भुट्टों में दाने ही नहीं हैं। हमारी पूरी लागत और मेहनत बर्बाद हो गई। किसान रतीराम ने बताया कि अगर हम बाजार की किसी प्राइवेट दुकान से बीज खरीदते, तो एक पल को मान लेते कि दुकानदार ने ठग लिया, लेकिन जब सरकारी गोदाम से ही ऐसा घटिया और मिलावटी बीज मिलेगा तो किसान आखिर किस पर भरोसा करेगा। तीन महीने बीत गए पर दो बीघे में खड़ी फसल के भुट्टों में दाने नहीं हैं। नुकसान की भरपाई होनी चाहिए। किसान ओमप्रकाश ने बताया कि खेत में सिर्फ खोखले भुट्टे खड़े हैं, जो किसी काम के नहीं हैं। जिम्मेदारों को मौके पर आकर बीज में हुई गड़बड़ी की जांच करनी चाहिए और पीड़ित किसानों के लिए मुआवजे मिलना चाहिए। ताकि उसकी मेहनत की भरपाई हो सके।
राया राजकीय कृषि बीज भंडार प्रभारी रमित चौहान ने बताया कि कारब गांव के किसानों की शिकायत आई है। प्रथम दृष्टया लग रहा है कि गर्मी के कारण भुट्टे में दाने नहीं पड़े हैं। हालांकि कई अन्य गांवों से कोई शिकायत नहीं आई है। वहां किसानों को भी बीज दिया था। जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
जिला कृषि अधिकारी आवेश कुमार सिंह ने बताया कि किसानों ने इस बाबत शिकायत की है और इसे गंभीरता से लिया जा रहा है। राया के राजकीय कृषि बीज भंडार के अलावा जिले भर से इस कंपनी ने कितना बीज बांटा इसका भी आकलन किया जा रहा है। शिकायत के आधार पर बीज की जांच कराई जाएगी और नियमानुसार आगे दिशा तय होगी।
