विद्युत उपभोक्ताओं से ईंधन अधिभार वसूली मामले में नया मोड़ आ गया है। जून माह में 10 फीसदी ईंधन अधिभार वसूली मामले में अप्रैल 2025 से जिस फार्मूले से वसूली हो रही है, उसे नियामक आयोग ने गलत ठहरा दिया। यह भी आदेश दिया कि अब आगे इस फार्मूले से गलत वसूली न करें।

राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने नियामक आयोग में याचिका लगाकर जून माह में 10 फीसदी ईंधन अधिभार गलत तरीके से वसूलने का आरोप लगाया। नियामक आयोग ने सुनवाई करते हुए पावर कार्पोरेशन से ईंधन अधिभार गणना के सभी दस्तावेज तलब किए। 

विद्युत नियामक आयोग द्वारा उठाए गए सवालों पर पावर कार्पोरेशन के प्रबंध निदेशक की ओर से 19 जून को जवाब दाखिल किया गया। इसमें कार्पोरेशन ने बताया कि अप्रैल 2025 से पूरे प्रदेश में विद्युत क्रय समायोजन अधिभार (एफपीपीसीए) की वसूली एक विशेष फार्मूले के आधार पर की जा रही है। उसी फार्मूले के तहत जून 2026 माह में भी अधिभार तय किया गया है। मंगलवार को नियामक आयोग की द्विसदस्यीय पीठ ने पूरे मामले में अपना फैसला सुनाया। 

आयोग ने कहा कि पावर कॉरपोरेशन द्वारा अब तक की गई एफपीपीसीए गणना पूरी तरह गलत है। एफपीपीसीए की मासिक गणना केवल उसी माह की वास्तविक विद्युत क्रय लागत तथा ट्रांसमिशन शुल्क के आधार पर की जाएगी। किसी अन्य माह की देनदारी या समायोजन को एफपीपीसीए में शामिल नहीं किया जा सकता। 

आयोग ने यह भी कहा कि पावर कॉरपोरेशन आगे इस प्रकार की गलती ना करें। कानून की परिधि में रहकर ही कार्य करें। आयोग ने अपने फैसले में पावर कारपोरेशन को कड़ी फटकार भी लगाई है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि यदि 14 माह से गलत तरीके से वसूली की जा रही है तो उसकी भरपाई उपभोक्ताओं को कैसे की जाएगी?

 




 



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